तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल को प्राकृतिक तरीके से कैसे कम करें? जानें यहाँ
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 28 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आज के तेज़-तर्रार जीवन में तनाव का बढ़ना एक सामान्य समस्या बन गई है। व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में हो रही चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना कठिन हो जाता है, जिससे तनाव को संभालना भी मुश्किल हो जाता है।
जब शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, तो यह अन्य हार्मोनों को भी असंतुलित कर देता है। यदि यह स्तर लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कॉर्टिसोल को आमतौर पर तनाव हार्मोन कहा जाता है। यह दोनों किडनी के ऊपर स्थित एक ग्रंथि, जिसे एड्रेनल ग्लैंड कहा जाता है, से निकलता है। जब इसकी मात्रा शरीर में बढ़ जाती है, तो यह दिमाग और शरीर दोनों के लिए हानिकारक हो सकता है। यह खराब जीवनशैली, तनाव, अपर्याप्त नींद, अस्वस्थ खान-पान और कम शारीरिक गतिविधियों के कारण बढ़ता है। इसके प्रभाव से चिंता, वजन बढ़ना, थकान, सिर भारी होना और नींद में कठिनाई जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। आयुर्वेद में कॉर्टिसोल को कम करने के लिए कई प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं।
कॉर्टिसोल के स्तर को कम करने के लिए गहरी नींद लेना अत्यंत आवश्यक है। अच्छी नींद लेने से शरीर में ग्रोथ हार्मोन का निर्माण होता है, जो कॉर्टिसोल को कम करने में मदद करता है। प्रतिदिन कम से कम ८-१० घंटे की नींद अवश्य लें। इससे आपका मन और शरीर दोनों हल्का महसूस करेंगे। अपनी दिनचर्या में इंटरमिटेंट फास्टिंग को शामिल करें। बार-बार खाने से बचें और समय पर खाना खाएं, जिससे आपके पेट को खाना पचाने का पूरा समय मिले और शरीर को आवश्यक पोषण मिल सके। इंटरमिटेंट फास्टिंग कॉर्टिसोल को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कॉर्टिसोल को कम करने के लिए धूप और विटामिन डी का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। रोजाना १० मिनट की धूप लेना फायदेमंद है। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी होती है और कॉर्टिसोल का प्रभाव कम होता है। इसके साथ ही, पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल करना भी लाभकारी है। अपनी डाइट में केला, नारियल पानी, हरी सब्जियां, टमाटर और अखरोट अवश्य शामिल करें।