पेट के खराब पाचन से जुड़ा है बार-बार सिर दर्द, जानें इससे राहत पाने के उपाय
सारांश
Key Takeaways
- पाचन और सिरदर्द के बीच गहरा संबंध है।
- आयुर्वेद में नस्य क्रिया का महत्व है।
- धनिया और मिश्री का पानी मददगार हो सकता है।
- सोंठ का लेप सिरदर्द में राहत देता है।
नई दिल्ली, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अत्यधिक कार्य या तनाव के कारण सिर दर्द होना सामान्य है, लेकिन यदि यह समस्या बार-बार होती है तो इसका संबंध खराब पाचन से है।
सिरदर्द के समय हम तात्कालिक राहत के लिए पेन किलर लेते हैं, लेकिन यह केवल एक अस्थायी समाधान है क्योंकि असली समस्या पाचन में गड़बड़ी है, न कि मस्तिष्क से संबंधित।
आयुर्वेद के अनुसार, बार-बार होने वाला सिरदर्द गंभीर समस्या है क्योंकि पाचन शक्ति और सिर का गहरा संबंध है। यह हमारे शरीर के 'उत्तम अंग' का संकेत है कि शरीर में किसी प्रकार की गड़बड़ी हो रही है। इसलिए इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आयुर्वेद में कहा गया है कि जब पाचन में असामान्यता होती है तो वात, पित्त और कफ असंतुलित होकर मस्तिष्क की नसों को प्रभावित करते हैं। कभी-कभी यह गैस बनकर पेट और सीने में जलन पैदा कर देती है, तो कभी कब्ज बनकर सिर और शरीर में भारीपन लाती है। यही कारण है कि शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने पर मन और तन दोनों में ताजगी आती है।
अब सवाल यह है कि इससे बचने के लिए क्या उपाय करें। आयुर्वेद नस्य क्रिया की सलाह देता है, जिसमें नाक में कुछ बूंदें तेल की डालने से मस्तिष्क पर पड़ने वाला दबाव कम होता है और असंतुलित पित्त घटता है। दूसरा उपाय है धनिया और मिश्री का मिश्रित पानी। धनिया और मिश्री को रात में भिगोकर सुबह सेवन करने से कब्ज की समस्या दूर होती है। यदि पेट साफ नहीं होता है, तो यह उपाय बहुत उपयोगी है।
तीसरा और प्रभावी उपाय है सोंठ का लेप। यदि सिरदर्द बार-बार हो रहा है और दवाओं से राहत नहीं मिल रही है, तो माथे पर सोंठ का लेप लगाने से आराम मिलेगा। सोंठ को पानी के साथ मिलाकर माथे पर लगाएं।