12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कोलकाता में PM मोदी ने किया योगाभ्यास, भाजपा नेताओं ने बताया ऐतिहासिक
सारांश
मुख्य बातें
21 जून 2025 को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता में एक भव्य महाआयोजन संपन्न हुआ, जिसमें स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित रहे और हज़ारों नागरिकों के साथ योगाभ्यास किया। पश्चिम बंगाल की राजधानी में इस स्तर पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन हुआ, जिसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने राज्य के लिए गौरव का क्षण बताया।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष महत्व दिया। यह ऐसे समय में आया है जब कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस कार्यक्रम का आयोजन पहली बार इतने व्यापक पैमाने पर किया गया। गौरतलब है कि 2015 से हर वर्ष 21 जून को विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है — यह परंपरा भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित की गई थी।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
पश्चिम बंगाल के मंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कहा कि पहली बार कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इतने भव्य स्तर पर मनाया गया। उन्होंने कहा, 'यह पश्चिम बंगाल के हर युवा और हर नागरिक के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री स्वयं यहाँ आकर सभी के साथ योग कर रहे हैं।'
मंत्री शंकर घोष ने कहा कि योग को वैश्विक पहचान दिलाने में प्रधानमंत्री मोदी का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उनके अनुसार, 'उनके प्रयासों की वजह से आज पूरी दुनिया योग के महत्व को समझ रही है और इसे अपने जीवन का हिस्सा बना रही है।'
मंत्री मनोज कुमार उरांव ने योग को भारत की प्राचीन परंपरा और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इसे एक बार फिर लोगों के बीच, विशेषकर युवा पीढ़ी के बीच, लोकप्रिय बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
विधायकों और सांसदों की राय
BJP विधायक रितेश तिवारी ने 21 जून 2025 को कोलकाता के लिए ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि योग दिवस पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी में इस आयोजन का हिस्सा बनना उनके लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
BJP सांसद खगेन मुर्मू ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के योगाभ्यास करने से जनता में उत्साह बढ़ा है। उन्होंने जनता की ओर से प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया।
आम जनता पर असर
इस आयोजन ने पश्चिम बंगाल में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी से स्वास्थ्य के प्रति जन-जागरूकता को बल मिलता है। भविष्य में इस तरह के आयोजनों के और व्यापक होने की संभावना है, क्योंकि योग अब केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक वैश्विक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुका है।