केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय स्थानांतरण: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को 3 सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के शास्त्री भवन में स्थित 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (CSL) को सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत स्थानांतरित करने के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति पी.वी. संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें नई प्रस्तावित जगह का लेआउट प्लान और पूरी जानकारी शामिल हो।
मुख्य घटनाक्रम
पीठ ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रूप से बताने को कहा है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना में लगभग 8.5 लाख पुस्तकों के संग्रह वाले इस पुस्तकालय के लिए कितनी जगह निर्धारित की गई है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या प्रस्तावित नई जगह इन सभी पुस्तकों को उचित ढंग से रखने के लिए पर्याप्त होगी।
कोर्ट ने आरके पुरम में डिब्बों में रखी लगभग 2 लाख अतिरिक्त पुस्तकों के बारे में भी जानकारी माँगी है — विशेष रूप से यह कि क्या नई जगह इन किताबों के भंडारण के लिए भी समुचित व्यवस्था कर सकेगी।
सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि सेंट्रल विस्टा योजना में पुस्तकालय के लिए जगह निर्धारित की गई है। हालाँकि, कोर्ट ने इस आश्वासन को पर्याप्त नहीं माना और विस्तृत हलफनामे की माँग बरकरार रखी।
पुस्तकालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (CSL) की स्थापना 1891 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में इंपीरियल सचिवालय पुस्तकालय के रूप में हुई थी। 1912 में राजधानी के दिल्ली स्थानांतरण के साथ यह पुस्तकालय भी सिविल लाइंस स्थित पुराने सचिवालय भवन में आ गया। तब से 1969 में इसे शास्त्री भवन में स्थानांतरित किया गया, जहाँ यह आज भी स्थित है।
यह पुस्तकालय केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत है और कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा केंद्रीय सरकारी पुस्तकालय है।
सेंट्रल विस्टा और विरासत का सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना पहले से ही विरासत संरचनाओं के संरक्षण को लेकर बहस के केंद्र में है। गौरतलब है कि 135 वर्षों की विरासत और 10.5 लाख से अधिक पुस्तकों व दस्तावेजों के इस भंडार को किसी नई जगह में व्यवस्थित करना एक जटिल चुनौती है।
आलोचकों का कहना है कि केवल जगह की घोषणा पर्याप्त नहीं — यह सुनिश्चित करना भी ज़रूरी है कि नई जगह में जलवायु नियंत्रण, दुर्लभ पांडुलिपियों की सुरक्षा और शोधकर्ताओं की पहुँच जैसी सुविधाएँ बनी रहें।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए केंद्र को तीन सप्ताह का समय दिया है। हलफनामे में लेआउट प्लान, क्षेत्रफल का ब्यौरा और भंडारण क्षमता की पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से शामिल करनी होगी। इस मामले में कोर्ट का अगला निर्देश तय करेगा कि सेंट्रल विस्टा के तहत इस ऐतिहासिक पुस्तकालय का भविष्य किस दिशा में जाएगा।