14 अक्टूबर 2026 पंचांग: नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, रात 8:38 बजे तक आयुष्मान योग
सारांश
मुख्य बातें
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन, 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को, मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की उपासना की जाती है। पंचांग के अनुसार इस दिन आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि रात 1:13 बजे तक रहेगी, जिसके बाद पंचमी तिथि आरंभ होगी। रात 8:38 बजे तक आयुष्मान योग का शुभ संयोग भी इस दिन को विशेष बनाता है।
मां कूष्मांडा की महिमा और पूजा का महत्व
मान्यता है कि मां कूष्मांडा की आराधना से भक्तों की आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है। देवी की आठ भुजाएँ होने के कारण इन्हें 'अष्टभुजा देवी' भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला सुशोभित हैं। उनका वाहन सिंह है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह स्थिति
बुधवार को सुबह 6:27 बजे सूर्योदय और शाम 5:58 बजे सूर्यास्त होगा। सुबह 9:36 बजे चंद्रोदय और रात 8:21 बजे चंद्रास्त रहेगा। इस दिन सूर्य देव कन्या राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे। ज्योतिषीय दृष्टि से वृश्चिक राशि में चंद्रमा 'नीच' अवस्था में होता है, जिससे व्यक्ति भावनाओं को गहराई से अनुभव करता है।
पंचांग के अनुसार, सूर्य देव चित्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं, जो सूर्य के मित्र माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य और मंगल के इस संयोग से आत्मविश्वास, साहस और ऊर्जा में वृद्धि होती है। नौकरीपेशा और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को इस दिन विशेष लाभ मिलने की संभावना बताई जाती है।
शुभ मुहूर्त: आयुष्मान योग, अभिजीत और अमृतकाल
इस दिन सबसे उल्लेखनीय योग आयुष्मान योग है, जो रात 8:38 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में यह तीसरा नित्य योग है और इसका अर्थ 'दीर्घायु' माना जाता है। इसके अधिष्ठाता देवता चंद्रमा हैं और प्रमुख ग्रह केतु।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार यह दिन का सर्वाधिक फलदायी समय है, जो लगभग 48 मिनट का होता है। इस अवधि में आरंभ किए गए कार्यों के सभी दोष स्वतः निवृत्त होते हैं, ऐसी मान्यता है।
शाम 4:37 बजे से 6:23 बजे तक अमृतकाल रहेगा। यह मुहूर्त नए व्यापार, निवेश, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण यात्रा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड
राहुकाल दोपहर 12:12 बजे से 1:39 बजे तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य आरंभ करना वर्जित माना जाता है, हालाँकि पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखा जा सकता है।
गुलिक काल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:12 बजे तक रहेगा। इसे 'विषैला समय' भी कहते हैं। मान्यता के अनुसार इसमें नए कार्य न शुरू करें, परंतु बैंक में धन जमा करना, दान और नियमित निवेश इस काल में उचित माने जाते हैं।
यमगंड काल सुबह 7:53 बजे से 9:20 बजे तक रहेगा। यह समय मृत्यु के देवता यमराज से संबंधित माना जाता है और इस दौरान यात्रा तथा धन लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।
दिशाशूल और विशेष सावधानी
बुधवार को दिशाशूल उत्तर दिशा में रहेगा। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, दिशाशूल उस दिशा का संकेत है जिसमें उस दिन यात्रा करना अशुभ माना जाता है। उत्तर दिशा में आवश्यक यात्रा से पहले विशेष उपाय करने की परंपरा है। नवरात्र के इस पावन पर्व पर मां कूष्मांडा की आराधना और शुभ मुहूर्तों का लाभ उठाते हुए दिन को फलदायी बनाया जा सकता है।