मलेशिया में 15 दिन फंसे जालंधर के आकाश की वापसी, सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से मिली राहत
सारांश
मुख्य बातें
जालंधर निवासी युवक आकाश करीब 15 दिनों तक मलेशिया में फंसे रहने के बाद आखिरकार सुरक्षित भारत लौट आया है। राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के लगातार प्रयासों के बाद यह वापसी संभव हो सकी। भारत पहुँचते ही आकाश के परिवार ने सीचेवाल से मुलाकात कर उनका आभार जताया।
कैसे शुरू हुई मुसीबत
जानकारी के अनुसार आकाश 13 साल पहले न्यूज़ीलैंड गया था और 24 अप्रैल को स्वदेश लौट रहा था। वह मलेशिया की एयरलाइन से दिल्ली पहुँचा, लेकिन किसी विवाद में उसका नाम आने के कारण इमिग्रेशन विभाग ने उसे भारत में प्रवेश देने से इनकार कर दिया और वापस भेज दिया। मलेशिया प्रशासन ने भी उसे अपने देश में प्रवेश नहीं दिया, जिससे वह दस्तावेज़ी उलझन में फँस गया।
एयरपोर्ट से डिटेंशन सेंटर तक
आकाश को कई दिनों तक मलेशिया के एयरपोर्ट पर ही रुकना पड़ा। इसके बाद उसे डिटेंशन सेंटर (कैंप) में रखा गया। आकाश ने बताया कि उसने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया — कई दिन एयरपोर्ट पर गुज़ारे और मानसिक रूप से काफी परेशान रहा। परिवार की उम्मीदें भी धीरे-धीरे कम होती जा रही थीं।
सांसद सीचेवाल की पहल
आकाश के माता-पिता राज्यसभा सांसद संत बलबीर सिंह सीचेवाल के पास मदद माँगने पहुँचे। सीचेवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज हर नौजवान की दौड़ विदेश जाने की है, लेकिन कुछ इस चक्कर में फँस भी जाते हैं और फिर रास्ता नहीं सूझता। उन्होंने आकाश के मामले में हस्तक्षेप किया और लगातार प्रयासों के ज़रिये उसकी वापसी सुनिश्चित की।
परिवार की भावुक प्रतिक्रिया
भारत लौटने के बाद आकाश और उसके परिवार ने सीचेवाल से मुलाकात की और उन्हें नोटों की माला पहनाकर आभार व्यक्त किया। आकाश ने सांसद के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। परिवार ने बताया कि बेटे के विदेश में फँसे रहने से घर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था।
व्यापक माँग: विदेश में फँसे भारतीयों की मदद हो मज़बूत
आकाश ने कहा कि ऐसे मामलों में विदेशों में फँसे भारतीयों की सहायता के लिए व्यवस्था और अधिक मज़बूत होनी चाहिए ताकि किसी को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े। परिवार ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से भी अपील की कि संकट में फँसे भारतीयों के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह मामला उन सैकड़ों भारतीयों की स्थिति की ओर ध्यान दिलाता है जो दस्तावेज़ी या कानूनी उलझनों में विदेश में फँस जाते हैं और जिनके लिए राजनयिक और प्रशासनिक सहायता की राह अक्सर लंबी और थकाऊ होती है।