17 वर्षीय रेहान चौधरी की 'द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट': पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में 420 महिलाओं को वित्तीय साक्षरता
सारांश
मुख्य बातें
दुबई के नॉर्ड एंग्लिया इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ाई कर रहे 17 वर्षीय रेहान चौधरी ने 2025 में 'द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट' नाम की एक वित्तीय शिक्षा पहल शुरू की, जो अब तक पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में 420 प्रतिभागियों तक पहुँच चुकी है। यह पहल उन महिलाओं को बजट बनाने, बचत, कर्ज और वित्तीय धोखाधड़ी से बचाव जैसे व्यावहारिक वित्तीय विषयों की जानकारी देती है, जिनकी वित्तीय सेवाओं तक पहुँच तो है, लेकिन उन्हें समझने का ढाँचा नहीं।
पहल का जन्म कैसे हुआ
इस परियोजना का विचार रेहान के जीवन में एक व्यक्तिगत अनुभव से उपजा। शंपा — जो जन्म से रेहान की देखभाल कर रही हैं — के परिवार के साथ वित्तीय धोखाधड़ी की घटना के बारे में जानने के बाद रेहान ने सोचा कि जागरूकता की कमी कितनी बड़ी समस्या बन सकती है। वित्त के प्रति उनकी व्यक्तिगत रुचि धीरे-धीरे एक सामुदायिक जिम्मेदारी में तब्दील हो गई।
इसी सोच से उन्होंने 'नोइंग योर मनी' नाम का 10 मॉड्यूल वाला पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक तैयार की, जिसमें परिचित परिस्थितियों और सरल उदाहरणों के ज़रिए वित्तीय अवधारणाओं को समझाया गया है।
पाठ्यक्रम में क्या है
पाठ्यक्रम में बजट निर्माण, वेतन प्रबंधन, बचत, कर्ज, निवेश, डिजिटल भुगतान, वित्तीय धोखाधड़ी और आपातकालीन योजना जैसे विषय शामिल हैं। कार्यशालाओं में प्रतिभागियों को घरेलू खर्चों का हिसाब रखना, कर्ज की शर्तों की तुलना करना, बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और वित्तीय उत्पादों के जोखिम पहचानना सिखाया जाता है।
रेहान ने कहा, 'मैं वित्तीय शिक्षा को व्यावहारिक और लोगों के रोजमर्रा के जीवन में लिए जाने वाले फैसलों के लिए प्रासंगिक बनाना चाहता था। यह केवल यह जानने के बारे में नहीं है कि पैसा कैसे काम करता है, बल्कि सही सवाल पूछने, इसमें शामिल जोखिमों को समझने और अपने पैसों के बारे में सोच-समझकर फैसले लेने में सक्षम होने के बारे में भी है।'
विस्तार और साझेदारी
पहल की शुरुआत पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में बंधन-कोन्नगर के सहयोग और बंधन बैंक के समर्थन से हुई। इसके बाद बंगाल सृष्टि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड और फीड के माध्यम से इसे आसनसोल तक विस्तारित किया गया। महाराष्ट्र के कोल्हापुर में इंडो काउंट के कार्यस्थल पर आयोजित कार्यशालाओं में अकेले 200 महिलाओं ने भाग लिया।
द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट द्वारा उपलब्ध कराए गए आँकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 420 प्रत्यक्ष प्रतिभागियों तक पहुँचा जा चुका है — बंधन-कोन्नगर के ज़रिए 40, बंगाल सृष्टि के माध्यम से 70, फीड के द्वारा 110 और इंडो काउंट के माध्यम से 200।
सामुदायिक विस्तार का मॉडल
कार्यशालाओं से परे, परियोजना का एक अहम स्तंभ है 'कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन' (CRP) मॉडल। रेहान ने बंधन और बंगाल सृष्टि के सहयोग से 40 सीआरपी को प्रशिक्षित किया है, ताकि वे आगे भी शिक्षण सामग्री अपने समुदायों तक पहुँचाते रहें। ये सीआरपी 420 प्रत्यक्ष प्रतिभागियों में शामिल हैं, जबकि उनके ज़रिए बाद में शिक्षा पाने वाले लोग इस गिनती में अलग हैं।
कार्यशालाएँ हिंदी और अंग्रेज़ी में आयोजित होती हैं; इंडो काउंट में स्थानीय सहयोग से मराठी अनुवाद भी उपलब्ध कराया गया। परियोजना के तहत शिक्षण वीडियो, बहुभाषी अध्ययन सामग्री और एक वेबसाइट भी तैयार की गई है।
आगे की राह
परियोजना में प्रशिक्षण से पहले और बाद में मूल्यांकन की व्यवस्था है, ताकि प्रतिभागियों की समझ का आकलन हो सके। रेहान ने इसके लिए एक सहायक प्रणाली भी विकसित की है जो उत्तरों का मिलान कर अंकों की गणना करती है। एक प्रभाव रिपोर्ट अंतिम रूप में तैयार हो रही है और परियोजना की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।
द प्रॉस्पेरिटी प्रोजेक्ट का दीर्घकालिक लक्ष्य अतिरिक्त सामुदायिक संगठनों और नियोक्ताओं के साथ साझेदारी कर विस्तार करना है, ताकि स्थानीय प्रशिक्षक अपने समुदायों और कार्यस्थलों पर वित्तीय शिक्षा की यह लौ स्वतंत्र रूप से जलाए रखें।