इंदौर में एसएससी अभ्यर्थी प्रियांश कौरव (18) ने किराए के कमरे में की आत्महत्या, जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
इंदौर के भंवरकुआं इलाके में स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) परीक्षा की तैयारी कर रहे 18 वर्षीय प्रियांश कौरव ने अपने किराए के कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी। सोमवार रात सामने आई इस दुखद घटना के बाद भंवरकुआं पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटनाक्रम: कैसे सामने आई खबर
पुलिस के अनुसार, सोमवार रात जब प्रियांश के दो रूममेट कोचिंग क्लास से लौटे, तो उन्होंने उसे कमरे के अंदर फंदे से लटका हुआ पाया। दोनों ने तत्काल उसे नीचे उतारा और पास के अस्पताल पहुँचाया। हालत गंभीर देखते हुए उसे महाराजा यशवंतराव अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने बताया कि घटना के वक्त तीसरा रूममेट किसी परिचित से मिलने बाहर गया हुआ था, जिसके चलते प्रियांश कमरे में अकेला था। कमरे की तलाशी में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
कौन था प्रियांश कौरव
मृतक की पहचान नरसिंहगढ़-गाडरवारा इलाके की इंद्रपुरी कॉलोनी निवासी प्रियांश कौरव के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार वह एक किसान परिवार से था — उसके पिता खेती करते हैं, जबकि बड़ा भाई भोपाल में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। प्रियांश करीब 15 दिन पहले एसएससी की तैयारी के उद्देश्य से इंदौर आया था और तीन दोस्तों के साथ किराए के कमरे में रह रहा था।
पढ़ाई में कठिनाई और घर लौटने की इच्छा
शुरुआती जांच के दौरान प्रियांश के दोस्तों ने पुलिस को बताया कि उसने हाल ही में एसएससी की डेमो क्लास के लिए दाखिला लिया था, लेकिन पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में उसे कठिनाई हो रही थी। कुछ दिन पहले उसने अपने माता-पिता से बात कर घर लौटने की इच्छा जताई थी, क्योंकि इंदौर में तैयारी जारी रखना उसे मुश्किल लग रहा था। रिपोर्टों के अनुसार, उसका परिवार उसे वापस बुलाने पर सहमत हो गया था, लेकिन शहर छोड़ने से पहले ही यह घटना घट गई।
पुलिस जांच की स्थिति
भंवरकुआं पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि मृतक के परिवार के सदस्यों और रूममेट्स के बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा घटना के सही कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं पर मानसिक दबाव की चिंताएँ लगातार उठती रही हैं। गौरतलब है कि छोटे शहरों और ग्रामीण परिवारों से आए अभ्यर्थी अक्सर अपरिचित शहर में अकेलेपन, आर्थिक बोझ और प्रदर्शन की उम्मीदों के बीच जूझते हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से कोचिंग संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र की माँग करते आए हैं। पुलिस की जांच पूरी होने पर घटना के कारणों की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक संकट में है, तो कृपया iCall हेल्पलाइन: 9152987821 या Vandrevala Foundation: 1860-2662-345 से संपर्क करें।