24 अगस्त 2026
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18वाँ अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव 2026 शुरू, पहले दिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अजमेर शरीफ पहुँचे

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18वाँ अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव 2026 शुरू, पहले दिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अजमेर शरीफ पहुँचे

सारांश

अजमेर शरीफ की दरगाह में 18वें अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव का आगाज हुआ — पहले ही दिन 50 हजार से अधिक श्रद्धालु, 43 देशी-विदेशी कलाकार, दुर्लभ हस्तलिखित कुरआन और महफिल-ए-समा के साथ। यह आयोजन 26 अगस्त 2026 तक चलेगा और मोहब्बत व सद्भाव का सूफियाना संदेश दे रहा है।

मुख्य बातें

18वाँ अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव 2026 का उद्घाटन 24 अगस्त 2026 को अजमेर शरीफ के महफिल खाना में हुआ।
पहले दिन देश-विदेश से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु और अकीदतमंद पहुँचे — आयोजकों के अनुसार 18 वर्षों में सबसे बड़े जनसमूहों में से एक।
पाँच दिवसीय महोत्सव में 43 नामचीन कलाकार भाग ले रहे हैं; आयोजन 26 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा।
महोत्सव में दो दुर्लभ कुरआन शरीफ प्रदर्शित — एक आब-ए-जमजम, गोंद और केसर से लिखा, दूसरा हाथ से सिला हुआ।
लाइव कैलिग्राफी वर्कशॉप, कालीन आर्ट पेंटिंग और प्रतिदिन शाम महफिल-ए-समा का आयोजन; प्रवेश सभी के लिए निःशुल्क और खुला।

अजमेर शरीफ के ऐतिहासिक महफिल खाना में 24 अगस्त 2026 को 18वें अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव 2026 का भव्य उद्घाटन हुआ। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के पावन आँगन में आयोजित इस पाँच दिवसीय महोत्सव के पहले ही दिन देश-विदेश से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु और अकीदतमंद पहुँचे। आयोजकों के अनुसार, 18 वर्षों के इस सफर में यह उपस्थिति महोत्सव के सबसे बड़े जनसमूहों में से एक रही।

महोत्सव का स्वरूप और कलाकार

इस वर्ष के महोत्सव में भारत सहित विभिन्न देशों के 43 नामचीन कलाकार सूफी संगीत, कैलिग्राफी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दे रहे हैं। महोत्सव का नेतृत्व चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती, फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. अजीम एस. मेमन, फेस्टिवल एडवाइजर एम्बेसडर डॉ. फहीम एफ. खान और कोऑर्डिनेटर उस्ताद महमूद शेख कर रहे हैं।

उद्घाटन समारोह की निजामत और पवित्र कुरआन की किरात सैयद फुजैल चिश्ती ने की। इसके बाद अंजुमन-ए-खुद्दाम-ए-ख्वाजा के सचिव सैयद कलीमुद्दीन चिश्ती ने दुआओं और आशीर्वचनों से आयोजन को नवाजा। हैदराबाद से पहुँचे अनिल चौहान ने रूहानी अंदाज में नात-ए-रसूल पेश की, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहरे आध्यात्मिक अनुभव से भर दिया।

उर्दू और कैलिग्राफी पर विशेष जोर

राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल), नई दिल्ली के प्रोजेक्ट असिस्टेंट मोहम्मद कासिम ने नई पीढ़ी के बीच कैलिग्राफी और उर्दू भाषा के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि डिजिटल दौर में पारंपरिक कला और उर्दू लिपि की खूबसूरती को नई पीढ़ी तक पहुँचाना बेहद ज़रूरी है। इंदौर से आए आफताब कादरी ने महफिल-ए-समा में सूफी कलाम पेश कर पूरे माहौल को सूफियाना रंग में रंग दिया।

दुर्लभ कुरआन और विशेष प्रदर्शनियाँ

महोत्सव में आध्यात्मिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ दो दुर्लभ कुरआन शरीफ विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इनमें से एक कुरआन आब-ए-जमजम, गोंद और केसर के प्राकृतिक मिश्रण से लिखा गया है, जबकि दूसरा पूरी तरह हाथ से सिला हुआ है। इसके अलावा लाइव कैलिग्राफी वर्कशॉप और लाइव कालीन आर्ट पेंटिंग का प्रदर्शन भी किया जा रहा है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन और पर्यटक महफिल खाना पहुँच रहे हैं।

सलमान चिश्ती का संदेश

हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने महोत्सव के मूल भाव को स्पष्ट करते हुए कहा, 'सूफी रंग कोई प्रस्तुति नहीं, बल्कि रंगों, रेखाओं, हुरूफ और सुरों में अदा की गई एक दुआ है।' उन्होंने कहा कि जब हजारों तलबगार ख्वाजा गरीब नवाज के आँगन में पहुँचते हैं तो वे केवल दर्शक बनकर नहीं, बल्कि एक ही राह के मुसाफिर बनकर आते हैं। उनके अनुसार, 'कैलिग्राफर की कलम का हर नक्श और समा का हर सुर वही पैगाम देता है, जो अजमेर शरीफ सदियों से दुनिया को देता आया है — सबके लिए मोहब्बत और किसी के लिए द्वेष नहीं।'

आगे का कार्यक्रम

यह महोत्सव 26 अगस्त 2026 तक दरगाह अजमेर शरीफ में जारी रहेगा। प्रतिदिन कैलिग्राफी सत्र, कलाकारों की प्रदर्शनियाँ, दुर्लभ पांडुलिपियों के दीदार और शाम के समय महफिल-ए-समा का आयोजन होगा। आयोजकों के अनुसार, यह कार्यक्रम बिना किसी धर्म, राष्ट्रीयता या भेदभाव के सभी के लिए खुला है — अजमेर शरीफ की सदियों पुरानी सूफी परंपरा का यही संदेश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसी सरकारी प्रचार की मोहताज नहीं। यह ऐसे समय में मायने रखता है जब सांप्रदायिक विमर्श अक्सर सुर्खियों पर हावी रहता है — 50 हजार से अधिक लोगों का बिना किसी भेदभाव के एक छत के नीचे आना अपने आप में एक बयान है। गौरतलब है कि महोत्सव की यह सांस्कृतिक गहराई — दुर्लभ हस्तलिखित कुरआन से लेकर लाइव कैलिग्राफी तक — मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर उपेक्षित रह जाती है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव 2026 क्या है?
यह अजमेर शरीफ की दरगाह के महफिल खाना में आयोजित पाँच दिवसीय सूफी संगीत, कैलिग्राफी और सांस्कृतिक महोत्सव है, जो 24 अगस्त से 26 अगस्त 2026 तक चलेगा। इसमें भारत सहित विभिन्न देशों के 43 कलाकार भाग ले रहे हैं और यह सभी के लिए निःशुल्क व खुला है।
सूफी रंग महोत्सव 2026 कब और कहाँ हो रहा है?
यह महोत्सव 24 अगस्त से 26 अगस्त 2026 तक राजस्थान के अजमेर में स्थित दरगाह अजमेर शरीफ के ऐतिहासिक महफिल खाना में आयोजित हो रहा है। प्रतिदिन शाम को महफिल-ए-समा और दिन में कैलिग्राफी सत्र व प्रदर्शनियाँ होती हैं।
महोत्सव में क्या-क्या देखने को मिलेगा?
महोत्सव में लाइव कैलिग्राफी वर्कशॉप, कालीन आर्ट पेंटिंग, दुर्लभ पांडुलिपियों के दीदार और शाम की महफिल-ए-समा शामिल हैं। इसके अलावा दो दुर्लभ हस्तलिखित कुरआन शरीफ — एक आब-ए-जमजम, गोंद और केसर से लिखा और दूसरा हाथ से सिला हुआ — विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
सूफी रंग महोत्सव का आयोजन कौन करता है?
इस महोत्सव का आयोजन चिश्ती फाउंडेशन करती है। इसके चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती हैं, जबकि फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. अजीम एस. मेमन, फेस्टिवल एडवाइजर एम्बेसडर डॉ. फहीम एफ. खान और कोऑर्डिनेटर उस्ताद महमूद शेख हैं।
क्या यह महोत्सव सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला है?
हाँ, आयोजकों के अनुसार यह महोत्सव बिना किसी धर्म, राष्ट्रीयता या भेदभाव के सभी के लिए पूरी तरह खुला है। हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा है कि अजमेर शरीफ का संदेश सदियों से यही रहा है — सबके लिए मोहब्बत और किसी के लिए द्वेष नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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