चंडीगढ़ में बब्बर खालसा के तीन आतंकी गिरफ्तार, 6 किलो जिलेटिन विस्फोटक और पिस्तौल बरामद
सारांश
मुख्य बातें
चंडीगढ़ पुलिस ने 23 अगस्त 2026 को बब्बर खालसा इंटरनेशनल (बीकेआई) के एक सक्रिय मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए तीन संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया और शहर के भीड़भाड़ वाले इलाके में आईईडी धमाके की बड़ी साजिश को नाकाम किया। पुलिस के ऑपरेशन सेल ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ संयुक्त कार्रवाई में लवप्रीत सिंह (19), जशनप्रीत सिंह उर्फ जशनदीप (21) और प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ (19) को हिरासत में लिया। इनके पास से 6 किलोग्राम जिलेटिन स्टिक विस्फोटक, डेटोनेटर, रिमोट-नियंत्रित सिस्टम, पावर सोर्स, एक पिस्तौल और 5 कारतूस बरामद हुए हैं।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि
पुलिस को 22 अगस्त को गुप्त सूचना मिली थी कि पंजाब के तरनतारन जिले के दो युवक विदेश में बैठे बीकेआई हैंडलर्स के संपर्क में हैं और उनके पास भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री है। सूचना के अनुसार दोनों सेक्टर 42/43 के इलाके में सक्रिय थे। इस आधार पर थाना 36 में विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4(बी) और 5 के तहत एफआईआर नंबर 143 दर्ज की गई और सभी टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
मानव खुफिया तंत्र और तकनीकी निगरानी की मदद से अगले 24 घंटों के भीतर तीनों आरोपियों को दबोच लिया गया। यह ऑपरेशन डीजीपी सागरप्रीत हुड्डा और आईजी पुष्पेंद्र के मार्गदर्शन में, तथा डीआईजी राजीव रंजन और एसपी ऑपरेशन्स अनुराग दारू की देखरेख में चलाया गया। मैदानी टीम का नेतृत्व डीएसपी ऑपरेशन्स रणजोध सिंह और इंस्पेक्टर सतविंदर सिंह ने किया।
आरोपियों की पहचान और भूमिका
लवप्रीत सिंह गांव सरहाली, तरनतारन का निवासी है। पेशे से पेंटर और अनपढ़ लवप्रीत ने सोशल मीडिया के ज़रिए बीकेआई हैंडलर आशु और सत्ता से संपर्क साधा था। उस पर पहले से नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज है। पुलिस ने उसके पास से 6 किलो जिलेटिन स्टिक बरामद की।
जशनप्रीत सिंह उर्फ जशनदीप गांव देवबाथ, तरनतारन का रहने वाला है और दसवीं पास है। उसके पास से डेटोनेटर और रिमोट-नियंत्रित सिस्टम मिला। प्रभप्रीत सिंह उर्फ प्रभ गांव तरसिक्का, अमृतसर का निवासी है, जो ग्यारहवीं तक पढ़ा है और गैस एजेंसी में हेल्पर का काम करता था। उसके पास से पिस्तौल और 5 कारतूस बरामद हुए।
साजिश का मकसद
जांच में सामने आया है कि तीनों आरोपियों को विदेश में बैठे बीकेआई हैंडलर्स ने अलग-अलग भूमिकाएं सौंपी थीं — हैंडलर्स से संपर्क बनाए रखना, विस्फोटक सामग्री हासिल करना, उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना, ज़रूरी पुर्जे जुटाना और चंडीगढ़ की किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर आईईडी विस्फोट कर दहशत फैलाना। पुलिस के अनुसार, पूरी साजिश विदेश में बैठे हैंडलर्स द्वारा रची गई थी।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब और उससे सटे केंद्र शासित प्रदेशों में बीकेआई और अन्य खालिस्तान समर्थक संगठनों से जुड़े मॉड्यूल की गतिविधियों में कथित तौर पर उछाल देखा गया है। गौरतलब है कि विदेश स्थित हैंडलर्स द्वारा सोशल मीडिया के ज़रिए युवाओं की भर्ती की यह पद्धति सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आगे की जांच ऑपरेशन सेल द्वारा जारी है।