अयोध्या मछली दावत विवाद: अशोक वाजपेयी का कांग्रेस पर सनातन धर्म अपमान का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद अशोक वाजपेयी ने 24 अगस्त को कांग्रेस पर सनातन धर्म का अपमान करने का गंभीर आरोप लगाया। यह विवाद अयोध्या में कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत समारोह के दौरान आयोजित मछली दावत को लेकर उठा है, जो पवित्र सावन माह में आयोजित की गई थी।
मछली दावत पर वाजपेयी की तीखी प्रतिक्रिया
अशोक वाजपेयी ने इस मामले पर कहा, 'यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अयोध्या धर्म नगरी है। यह मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि है, और देश भर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था इससे गहराई से जुड़ी है। यह सावन का पवित्र महीना है। इस महीने में कई लोग रुद्राभिषेक करते हैं, और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का अयोध्या आकर मछली की दावत में शामिल होना — इससे ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? इससे साफ पता चलता है कि अयोध्या के प्रति कांग्रेस नेताओं का क्या नज़रिया है।'
उन्होंने यह भी कहा कि अजय राय के इस कदम से स्पष्ट होता है कि वे सनातन धर्म के प्रति कितना सम्मान रखते हैं। वाजपेयी ने माँग की कि कांग्रेस को ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को पार्टी से निष्कासित करना चाहिए।
तुष्टीकरण की राजनीति पर निशाना
BJP नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लंबे समय से तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है, जिसके चलते कई विवाद उत्पन्न हुए हैं। उनके अनुसार, वोट बैंक की राजनीति के कारण कांग्रेस बार-बार सनातनधर्मियों और हिंदू धर्मावलंबियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाती है।
सज्जन कुमार और 1984 के दंगों पर बयान
कांग्रेस में सज्जन कुमार को 'रोल मॉडल' बताए जाने के विवाद पर वाजपेयी ने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों में सैकड़ों सिखों की हत्या की गई थी। उन्होंने कहा, 'आज भी जब उस दंगे की याद आती है तो मन सिहर उठता है। जिस व्यक्ति का पूरा जीवन जेल में बीता, उसके प्रति कांग्रेस की सहानुभूति से पार्टी के नेताओं की सोच का पता चलता है। सज्जन कुमार उस नरसंहार का सबसे बड़ा गुनहगार था।' गौरतलब है कि पूर्व स्पीकर ने दीपेंद्र हुड्डा को हटाने की माँग करते हुए पार्टी अध्यक्ष को पत्र लिखा है, जिस पर वाजपेयी ने उस माँग को उचित ठहराया।
राहुल गांधी पर 'छात्रों की गूंज' को लेकर सवाल
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर वाजपेयी ने तंज कसते हुए कहा, 'जब दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हो रहा था तो राहुल गांधी ने बड़ी-बड़ी बातें कीं, लेकिन जब झारखंड में छात्र लगातार भूख हड़ताल और आमरण अनशन कर रहे थे, तब उनकी तरफ से सहानुभूति का एक शब्द भी नहीं आया। क्या झारखंड के छात्र, छात्र नहीं थे?' उन्होंने कहा कि भारत का नौजवान समझदार है और इस तरह की 'सतही राजनीति' से प्रभावित नहीं होगा।
आरक्षण विवाद पर संसदीय प्रक्रिया की वकालत
आरक्षण समाप्त करने की माँग को लेकर हो रहे छात्र प्रदर्शनों पर वाजपेयी ने कहा कि इस मुद्दे पर संसद में पक्ष और विपक्ष दोनों को संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चर्चा करनी चाहिए। उनके अनुसार, यह निर्णय संसदीय बहस के ज़रिए ही होना उचित है। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है।