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प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के लिए अजमेर दरगाह में दुआ, मुस्लिम समुदाय ने पेश की चादर

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प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य के लिए अजमेर दरगाह में दुआ, मुस्लिम समुदाय ने पेश की चादर

सारांश

अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह में मुस्लिम समुदाय ने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ माँगी और चादर पेश की — एक ऐसा दृश्य जो भारत की अंतरधार्मिक सद्भावना की जीवंत परंपरा को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

अजमेर दरगाह में 27 मई को मुस्लिम समुदाय ने संत प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ माँगी और चादर पेश की।
संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है।
दरगाह के खिदमतगार सैयद हसन चिश्ती और सर्वधर्म एकता समिति के सचिव रफीक कादरी इस आयोजन में उपस्थित रहे।
रफीक कादरी ने कहा कि यह आयोजन भारत की अंतरधार्मिक एकता की परंपरा का प्रतीक है।
सैयद हसन चिश्ती ने कहा कि अजमेर दरगाह सदा से सभी धर्मों के लोगों के लिए शांति और दुआ का केंद्र रही है।

अजमेर की प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह में बुधवार, 27 मई को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने संत प्रेमानंद महाराज के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए विशेष दुआ की और चादर पेश की। इस आयोजन में दरगाह के खिदमतगार सैयद हसन चिश्ती और सर्वधर्म एकता समिति के सचिव रफीक कादरी सहित समुदाय के अनेक लोग उपस्थित रहे।

क्यों की गई दुआ

सर्वधर्म एकता समिति के सचिव रफीक कादरी ने बताया कि संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत इन दिनों ठीक नहीं है और उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है। इसी स्थिति को देखते हुए समुदाय के लोगों ने एकजुट होकर दरगाह में उनके स्वास्थ्य के लिए दुआ माँगने का निर्णय लिया। चादर पेश करने के साथ सभी ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

दरगाह खिदमतगार का बयान

दरगाह के खिदमतगार सैयद हसन चिश्ती ने कहा कि जब भी किसी संत या भले इंसान की तबीयत खराब होती है, तो उनके लिए दुआ करना इंसानियत का अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद महाराज देशभर में प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश फैलाते हैं, और उसी भावना से प्रेरित होकर यह दुआ की गई। उन्होंने यह भी कहा कि अजमेर दरगाह सदा से सभी धर्मों के लोगों के लिए दुआ और शांति का केंद्र रही है, जहाँ बिना किसी भेदभाव के हर कोई अपनी अर्ज़ी लेकर आता है।

सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश

रफीक कादरी ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन किसी एक धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि यह भारत की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के लिए दुआ करते हैं और एकता का संदेश देते हैं। उनका मानना है कि सच्चे संत वही होते हैं जो समाज में प्रेम और भाईचारे की भावना को जीवित रखते हैं, और प्रेमानंद महाराज ऐसे ही व्यक्तित्व हैं जो सभी के दिलों में स्थान रखते हैं।

प्रेमानंद महाराज के बारे में

कादरी ने कहा, 'पूरे एशिया में प्रेमानंद महाराज जैसा कोई संत नहीं है। वह हमेशा से प्रेम और भाईचारे का संदेश देते आए हैं, इसलिए हम सबने मिलकर आज उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।' यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत में अंतरधार्मिक सद्भाव केवल कागज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के व्यवहार में भी जीवित है। आने वाले दिनों में प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य में सुधार की कामना के साथ इस तरह के और भी आयोजनों की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ये समाज की असली बुनावट को दर्शाते हैं। प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता केवल हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं है — यह घटना उनके व्यापक सामाजिक प्रभाव की पुष्टि करती है। सवाल यह है कि क्या ऐसे सहज सांप्रदायिक सौहार्द को वह मीडिया स्थान मिलता है जिसका वह हकदार है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अजमेर दरगाह में प्रेमानंद महाराज के लिए दुआ क्यों माँगी गई?
संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता पड़ रही है। इसी कारण मुस्लिम समुदाय के लोगों ने 27 मई को अजमेर दरगाह में उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए दुआ माँगी और चादर पेश की।
इस आयोजन में कौन-कौन शामिल थे?
इस आयोजन में दरगाह के खिदमतगार सैयद हसन चिश्ती और सर्वधर्म एकता समिति के सचिव रफीक कादरी सहित मुस्लिम समुदाय के अनेक लोग उपस्थित रहे।
प्रेमानंद महाराज कौन हैं और उनका स्वास्थ्य वर्तमान में कैसा है?
प्रेमानंद महाराज एक प्रसिद्ध संत हैं जो देशभर में प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश देते हैं। रफीक कादरी के अनुसार, इन दिनों उनकी तबीयत ठीक नहीं है और उन्हें नियमित डायलिसिस की ज़रूरत पड़ रही है।
अजमेर दरगाह का सर्वधर्म सद्भाव में क्या महत्व है?
सैयद हसन चिश्ती के अनुसार, अजमेर दरगाह सदा से सभी धर्मों के लोगों के लिए दुआ और शांति का केंद्र रही है, जहाँ बिना किसी भेदभाव के हर कोई अपनी अर्ज़ी लेकर आता है। यह घटना उसी परंपरा की एक और कड़ी है।
सर्वधर्म एकता समिति क्या है?
सर्वधर्म एकता समिति एक संगठन है जो विभिन्न धर्मों के बीच एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का कार्य करता है। इस आयोजन में समिति के सचिव रफीक कादरी ने प्रमुख भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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