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22 अक्टूबर 2026 पंचांग: द्वादशी तिथि पर विष्णु पूजा, शुभ मुहूर्त 11:16 से 12:01 बजे तक

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22 अक्टूबर 2026 पंचांग: द्वादशी तिथि पर विष्णु पूजा, शुभ मुहूर्त 11:16 से 12:01 बजे तक

सारांश

22 अक्टूबर 2026 को आश्विन शुक्ल द्वादशी और शोभन योग का संयोग भगवान विष्णु की पूजा के लिए इस दिन को विशेष बनाता है। शुभ मुहूर्त सुबह 11:16 से दोपहर 12:01 बजे तक है, जबकि राहुकाल समेत तीन अशुभ कालखंडों में मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह है।

मुख्य बातें

22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को आश्विन शुक्ल द्वादशी तिथि रात 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी।
शुभ मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक — पूजा व मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त।
राहुकाल दोपहर 1:27 से 2:53 , गुलिक काल सुबह 9:10 से 10:36 , यमगण्ड काल सुबह 6:30 से 7:56 — इन कालखंडों में शुभ कार्य वर्जित।
पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र सुबह 5:41 बजे तक; शोभन योग शाम 4:18 बजे तक।
सूर्य तुला और चंद्रमा कुंभ राशि में; गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल।

22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी, जो भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विष्णु पूजन और जरूरतमंदों की सहायता से सुख, समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग में तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों के आधार पर दिन का शुभाशुभ विचार किया जाता है।

तिथि, नक्षत्र और योग की स्थिति

द्वादशी तिथि इस दिन रात 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी, जिसके पश्चात त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा। नक्षत्र की दृष्टि से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रातः 5 बजकर 41 मिनट तक प्रभावी रहेगा। शोभन योग सायं 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगा, जो मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। करण में बव करण दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

ग्रह-स्थिति की बात करें तो इस दिन सूर्य तुला राशि में और चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे।

शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

22 अक्टूबर को शुभ मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पूजा-पाठ, नए व्यापार की शुरुआत या अन्य मांगलिक कार्य संपन्न करना शास्त्रसम्मत माना जाता है। सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 30 मिनट पर होगा और सूर्यास्त सायं 5 बजकर 32 मिनट पर। चंद्रोदय दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर और चंद्रास्त अगले दिन रात 1 बजकर 22 मिनट पर होगा।

अशुभ काल: राहुकाल, गुलिक काल और यमगण्ड

पंचांग के अनुसार, इस दिन तीन प्रमुख अशुभ कालखंड हैं जिनमें नए मांगलिक कार्यों का आरंभ वर्जित माना जाता है। राहुकाल दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल प्रातः 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक और यमगण्ड काल प्रातः 6 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। धार्मिक परंपरा में इन तीनों कालखंडों में शुभ कार्यों से परहेज की सलाह दी जाती है।

दिशाशूल और यात्रा संबंधी सावधानी

पारंपरिक पंचांग मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि अनिवार्य कारणों से यात्रा करनी पड़े, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय कर यात्रा की जा सकती है।

आम जनता के लिए उपयोगी संदेश

गुरुवार को भगवान विष्णु का दिन माना जाने के कारण यह तिथि श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। शोभन योग और द्वादशी तिथि का संयोग इस दिन को धार्मिक दृष्टि से और अधिक फलदायी बनाता है। शुभ मुहूर्त का समुचित उपयोग करते हुए और अशुभ कालखंडों से बचते हुए इस दिन का अधिकतम लाभ उठाया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसे अक्सर केवल सूचना-सूची तक सीमित रखा जाता है। इस पंचांग की असली उपयोगिता तब सामने आती है जब पाठक को सटीक समय के साथ-साथ यह भी बताया जाए कि किस कालखंड में क्या करना है और क्यों। द्वादशी-शोभन योग का संयोग और विष्णु पूजा की परंपरा मिलकर इस गुरुवार को धार्मिक दृष्टि से अर्थपूर्ण बनाते हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

22 अक्टूबर 2026 को कौन-सी तिथि है?
22 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है, जो रात 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी।
22 अक्टूबर 2026 का शुभ मुहूर्त कब है?
22 अक्टूबर 2026 को शुभ मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में पूजा-पाठ, व्यापार आरंभ या अन्य मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।
22 अक्टूबर 2026 को राहुकाल का समय क्या है?
22 अक्टूबर 2026 को राहुकाल दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में नए शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।
इस दिन कौन-सा नक्षत्र और योग रहेगा?
22 अक्टूबर 2026 को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रातः 5 बजकर 41 मिनट तक और शोभन योग सायं 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। शोभन योग को मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
गुरुवार को दिशाशूल किस दिशा में होता है और इसका क्या अर्थ है?
पंचांग की परंपरागत मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इसका अर्थ है कि इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा से यदि संभव हो तो बचना चाहिए; यदि यात्रा अनिवार्य हो तो धार्मिक उपाय करके जाया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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