मध्य प्रदेश 24 घंटे ग्रीन एनर्जी आपूर्ति को प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन और प्रदर्शनी-2026 में घोषणा की कि मध्य प्रदेश चौबीसों घंटे ग्रीन एनर्जी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रसर है और इसके लिए टेंडर भी जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश के सबसे तेज़ी से उभरते राज्यों में शुमार हो चुका है।
मुख्यमंत्री की घोषणा और प्रतिबद्धता
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "मुझे खुशी है कि मध्य प्रदेश रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में तेज़ी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है। आम तौर पर सोलर और विंड एनर्जी सीमित घंटों के लिए ही उपलब्ध होती है, लेकिन मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जो चौबीसों घंटे रिन्यूएबल एनर्जी उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं और इसके लिए टेंडर भी जारी कर चुके हैं। हम दुनिया को यह दिखाने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि हम 24 घंटे ग्रीन एनर्जी की सप्लाई कर सकते हैं।"
इस सम्मेलन में केंद्रीय नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मध्य प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।
मध्य प्रदेश की ऊर्जा उपलब्धियाँ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि राज्य नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और हरित औद्योगिक विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना चुका है। उल्लेखनीय है कि दिल्ली मेट्रो का संचालन भी मध्य प्रदेश में उत्पादित बिजली से किया जा रहा है — जो राज्य की ऊर्जा क्षमता का एक ठोस प्रमाण है।
यादव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में राज्य की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा, पंप्ड हाइड्रो ऊर्जा भंडारण और बायोमास से संबंधित नीतियाँ लागू कर निवेश व नवाचार को नई गति दी है।
देश की सबसे सस्ती बिजली का दावा
मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्य प्रदेश में देश की सबसे सस्ती बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब देशभर में बिजली की बढ़ती माँग और नवीकरणीय स्रोतों की ओर संक्रमण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुकी है। गौरतलब है कि राउंड-द-क्लॉक (RTC) ग्रीन एनर्जी आपूर्ति अभी भी देश के अधिकांश राज्यों के लिए एक चुनौती बनी हुई है।
राष्ट्रीय संदर्भ में मध्य प्रदेश की भूमिका
7वाँ अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश का पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बायोमास नीति ढाँचा इस दिशा में एक मॉडल के रूप में उभर सकता है। आने वाले समय में राज्य की 24×7 ग्रीन एनर्जी परियोजना की व्यावहारिक सफलता यह तय करेगी कि यह प्रतिबद्धता महज़ घोषणा है या एक दीर्घकालिक ऊर्जा बदलाव की नींव।