मध्य प्रदेश में 24 घंटे हरित ऊर्जा का लक्ष्य: सीएम मोहन यादव ने निवेशकों को दिया न्योता
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर तेज़ी से काम कर रही है। नई दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश भवन में आयोजित प्री-बिड मीटिंग को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से वर्चुअली संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दावोस में की गई घोषणा के अनुरूप मध्य प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है।
प्रमुख परियोजनाएँ और उपलब्धियाँ
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना ने देश में सबसे कम सौर टैरिफ स्थापित कर भारत को वैश्विक पहचान दिलाई। शाजापुर-नीमच सोलर पार्कों ने ₹2.14 प्रति यूनिट का प्रदेश का सबसे कम टैरिफ अर्जित किया। इसके अलावा, हाल ही में मुरैना की चार घंटे की स्टोरेज प्लस परियोजना के लिए ₹2.70 प्रति यूनिट पर पीपीए (पावर परचेज़ एग्रीमेंट) संपन्न हुआ, जिसे देश की सबसे प्रतिस्पर्धी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में से एक बताया जा रहा है।
निवेशकों से अपील और नीतिगत प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने देश-विदेश के निवेशकों से मध्य प्रदेश की ऊर्जा क्रांति में सहभागी बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को पारदर्शी नीतियाँ, त्वरित निर्णय और उत्कृष्ट अधोसंरचना उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में राज्य सरकारें नवकरणीय ऊर्जा में निवेश आकर्षित करने की होड़ में हैं।
राज्य का दीर्घकालिक लक्ष्य
मुख्यमंत्री यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल परियोजनाएँ स्थापित करना नहीं, बल्कि हरित ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में मध्य प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर परियोजना और सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयास से यह 24 घंटे नवकरणीय ऊर्जा परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक सिद्ध होगी।
उद्योग जगत की भागीदारी
नई दिल्ली में आयोजित इस प्री-बिड मीटिंग में टाटा पॉवर, रिलायंस एनर्जी, टोरेंट पॉवर, जिंदल रिन्युएबल, एनटीपीसी (NTPC), हिन्दुस्तान पॉवर, महिंद्रा सिस्टम सहित अनेक प्रमुख ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। गौरतलब है कि इस स्तर की भागीदारी मध्य प्रदेश की नवकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में उद्योग जगत की बढ़ती रुचि को दर्शाती है।
आने वाले महीनों में बोली प्रक्रिया के पूरा होने के बाद इस परियोजना की रूपरेखा और अधिक स्पष्ट होगी, जो मध्य प्रदेश को देश के हरित ऊर्जा मानचित्र पर एक नई पहचान दे सकती है।