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8वें वेतन आयोग की चंडीगढ़ में तीन दिवसीय बैठकें शुरू, 1.15 करोड़ कर्मचारियों-पेंशनभोगियों पर होगा असर

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8वें वेतन आयोग की चंडीगढ़ में तीन दिवसीय बैठकें शुरू, 1.15 करोड़ कर्मचारियों-पेंशनभोगियों पर होगा असर

सारांश

8वाँ केंद्रीय वेतन आयोग चंडीगढ़ पहुँचा है — और इसके साथ आई हैं 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें। फिटमेंट फैक्टर, डीए संशोधन और एचआरए पुनर्गठन जैसे मुद्दे मेज़ पर हैं। न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में यह परामर्श दौर तय करेगा कि लाखों परिवारों की जेब पर क्या फर्क पड़ेगा।

मुख्य बातें

8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने 16 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में तीन दिवसीय परामर्श बैठकें शुरू कीं, जो 18 सितंबर 2026 तक चलेंगी।
आयोग की अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई हैं; सदस्यों में पंकज जैन और पुलक घोष शामिल हैं।
आयोग की सिफारिशों का असर लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख माँगों में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाना , डीए की अधिक बार समीक्षा और एचआरए संशोधन शामिल हैं।
आयोग को 3 नवंबर 2025 के गठन से 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपनी हैं।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के प्रतिनिधि तथा रेलवे और रक्षा संगठन बैठकों में भाग ले रहे हैं।

8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 से चंडीगढ़ में तीन दिवसीय परामर्श बैठकों की शृंखला शुरू की है, जिसमें वेतन संरचना, सेवा शर्तों और पेंशन व्यवस्था में संभावित बदलावों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा। ये बैठकें शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 तक जारी रहेंगी और इनके निष्कर्ष लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों तथा करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।

आयोग की संरचना और नेतृत्व

8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग में सदस्य सचिव के रूप में पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन तथा सदस्य के रूप में वित्त विशेषज्ञ एवं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य पुलक घोष शामिल हैं। आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और इसे गठन के 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी हैं।

बैठकों में कौन-कौन शामिल

चंडीगढ़ की इन बैठकों में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के क्षेत्रीय प्रशासनिक प्रतिनिधि अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त, रेलवे और रक्षा कर्मियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन, कर्मचारी संघ और पेंशनभोगी समूह भी आयोग के समक्ष अपनी माँगें रखेंगे। गौरतलब है कि यह परामर्श प्रक्रिया आयोग द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में चलाई जा रही व्यापक संवाद पहल का हिस्सा है।

कर्मचारी संगठनों की प्रमुख माँगें

कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष कई अहम माँगें रखी हैं। सबसे प्रमुख माँग फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की है, जिससे नए वेतनमान के तहत मूल वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही संगठनों ने महंगाई भत्ते (डीए) की समीक्षा अधिक बार करने और एक निश्चित सीमा पर उसे मूल वेतन में समाहित करने की माँग की है।

हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), परिवहन भत्ता और कठिन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों के लिए विशेष भत्तों की पुनर्समीक्षा की माँग भी जोरशोर से उठाई गई है। संगठनों का तर्क है कि बड़े शहरों में जीवनयापन की लागत तेज़ी से बढ़ी है और मौजूदा भत्ते उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं।

पेंशनभोगियों की चिंताएँ

पेंशनभोगी संगठनों ने सेवानिवृत्ति के बाद आय की सुरक्षा मज़बूत करने, पारिवारिक पेंशन में सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया है। इसके अलावा, पदोन्नति व्यवस्था और सेवा शर्तों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की माँग भी उठाई गई है, ताकि सरकारी सेवा नई प्रतिभाओं को आकर्षित कर सके।

आगे क्या होगा

चंडीगढ़ की इन बैठकों से प्राप्त सुझाव और प्रतिक्रियाएँ आयोग की अंतिम सिफारिशें तैयार करते समय महत्वपूर्ण आधार बनेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से वेतन ढाँचे में व्यापक सुधार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आयोग की सिफारिशों का असर 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ने की संभावना है, जिनमें रक्षा और रेलवे कर्मी भी शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका दाँव बड़ा है — 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू हुए एक दशक बीत चुका है और बीच के वर्षों में महंगाई ने वास्तविक वेतन को खासा कमज़ोर किया है। कर्मचारी संगठनों की फिटमेंट फैक्टर वृद्धि की माँग न्यायसंगत लगती है, लेकिन राजकोषीय दबाव के बीच सरकार के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। असली सवाल यह है कि आयोग परामर्श को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सिफारिशों में परिलक्षित करेगा या नहीं — पिछले कई आयोगों में संगठनों की माँगें और अंतिम रिपोर्ट के बीच बड़ी खाई देखी गई है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

8वाँ केंद्रीय वेतन आयोग क्या है और इसका गठन कब हुआ?
8वाँ केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार द्वारा गठित एक संवैधानिक निकाय है, जो केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढाँचे की समीक्षा करता है। इसका गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ और इसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
चंडीगढ़ बैठकों में कौन से मुद्दे उठाए जा रहे हैं?
इन बैठकों में मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर वृद्धि, महंगाई भत्ते (डीए) की अधिक बार समीक्षा, हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), परिवहन भत्ता, पेंशन सुधार और पारिवारिक पेंशन बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के साथ-साथ रेलवे और रक्षा कर्मियों के संगठन भी अपने सुझाव प्रस्तुत कर रहे हैं।
8वें वेतन आयोग की सिफारिशें किन लोगों पर असर डालेंगी?
आयोग की सिफारिशें लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों पर असर डालेंगी, यानी कुल मिलाकर 1 करोड़ से अधिक लोगों पर। इस दायरे में रक्षा और रेलवे कर्मी तथा उनके सेवानिवृत्त साथी भी शामिल हैं।
8वें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट कब तक देनी है?
आयोग को उसके कार्यक्षेत्र के अनुसार गठन की तिथि 3 नवंबर 2025 से 18 महीने के भीतर, यानी लगभग मई 2027 तक, अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी हैं।
फिटमेंट फैक्टर क्या है और कर्मचारी इसे क्यों बढ़ाना चाहते हैं?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसके आधार पर पुराने वेतनमान को नए वेतनमान में परिवर्तित किया जाता है। 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था; कर्मचारी संगठन इसे और अधिक बढ़ाने की माँग कर रहे हैं, ताकि मूल वेतन में उल्लेखनीय वृद्धि हो और बढ़ती महंगाई का मुकाबला किया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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