पंचायत चुनाव भी नहीं जीत सकते 'आप' छोड़ BJP में गए राज्यसभा सांसद: CM उमर अब्दुल्ला का तीखा हमला
सारांश
Key Takeaways
- जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने 25 अप्रैल को बेंगलुरु में AAP छोड़ BJP में गए सांसदों पर तीखा हमला बोला।
- राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसद AAP छोड़कर BJP में शामिल हुए, जिन्हें उमर ने जनाधारहीन बताया।
- उमर के अनुसार इन सांसदों से BJP को जमीनी स्तर पर 10 वोट का भी फायदा नहीं होगा।
- पश्चिम बंगाल की 70 सीटों पर मतदाता सूची से हटाए गए वोटरों की संख्या BJP की पिछली जीत-हार के अंतर से अधिक है।
- SIR प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से मतदान प्रतिशत कृत्रिम रूप से बढ़ा दिखाई दे रहा है।
- 73 राज्यसभा सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का नोटिस दिया, मामला अब संसद के सामने है।
बेंगलुरु, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए सात राज्यसभा सांसदों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ये नेता अपने बूते एक भी पंचायत चुनाव नहीं जीत सकते। बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 25 अप्रैल को दिए बयान में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस दलबदल से BJP को जमीनी स्तर पर कोई खास राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला।
दलबदल पर उमर का सीधा वार
राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के AAP से BJP में जाने पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि इन्होंने पार्टी छोड़ी है तो यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है, लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को तत्काल कोई बड़ी क्षति नहीं होगी। उन्होंने माना कि थोड़ा नुकसान जरूर संभव है, परंतु वह नगण्य होगा।
उमर ने सीधे शब्दों में कहा, "इन सात सांसदों में से कोई भी अकेले अपने दम पर एक भी सीट जीतने में सक्षम नहीं है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इनके BJP में आने से पार्टी को जमीनी स्तर पर 10 वोट का भी फायदा नहीं होगा। उनका सीधा संदेश था — ये सांसद पंचायत चुनाव तक जीतने की हैसियत नहीं रखते।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पर गंभीर सवाल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की मतदान प्रतिशत पर उमर अब्दुल्ला ने गंभीर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अपने निर्वाचन क्षेत्र में ही 25 प्रतिशत मतदाता कम हो गए हैं।
उन्होंने बताया कि बंगाल में ऐसी 70 सीटें हैं जहां मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव में BJP की जीत या हार के अंतर से भी अधिक है। यह आंकड़ा चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
EVM नहीं, वोटर लिस्ट में धांधली असली खतरा
उमर अब्दुल्ला ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा EVM को खतरा नहीं माना, बल्कि मतदाता सूची में हेराफेरी को असली समस्या बताया है। उन्होंने कहा कि न्यायालय को इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था, लेकिन मामला चुनाव तक टाला जाता रहा।
उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा है कि मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। "जो लोग यह कह रहे हैं, वे या तो BJP का प्रेस नोट दोहरा रहे हैं या आंकड़ों की गहराई से पड़ताल नहीं की है," उन्होंने कहा। उनके अनुसार SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को सूची से बाहर किया गया, जिससे मतदान प्रतिशत कृत्रिम रूप से ऊंचा दिखाई दे रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त हटाने की मांग पर प्रतिक्रिया
73 राज्यसभा सांसदों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस दिए जाने पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह मामला अब संसद के समक्ष है और वहां क्या होता है, यह देखना होगा। उन्होंने कहा कि भले ही इसका कोई ठोस परिणाम न निकले, लेकिन इतने सांसदों के हस्ताक्षर से मुख्य चुनाव आयुक्त को कम से कम अपनी कार्यशैली पर आत्मचिंतन तो करना ही चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक प्रभाव
गौरतलब है कि AAP पिछले कुछ महीनों से गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रही है। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ा है। ऐसे में सात राज्यसभा सांसदों का एक साथ दलबदल पार्टी की संगठनात्मक कमजोरी को उजागर करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि राघव चड्ढा जैसे चेहरों का BJP में जाना प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन उमर अब्दुल्ला की यह टिप्पणी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक सच्चाई की ओर इशारा करती है — राज्यसभा सांसद अक्सर पार्टी संगठन की बजाय व्यक्तिगत संबंधों या नामांकन प्रक्रिया के जरिए चुने जाते हैं, इसलिए उनका जनाधार जमीनी स्तर पर सीमित होता है।
आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल चुनाव के शेष चरणों के नतीजे और सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई इस पूरे विवाद को नई दिशा दे सकती है।