जंतर-मंतर प्रदर्शन: AAP का आरोप — दिल्ली छावनी में तब्दील, 45 मेट्रो स्टेशन बंद
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 10 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित वोट चोरी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) विरोध प्रदर्शन से पहले केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं आतिशी और गोपाल राय ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए नई दिल्ली को छावनी में बदल दिया गया है।
AAP के आरोप: क्या-क्या कहा गया
AAP नेता आतिशी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि राजधानी में 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं और लगभग 45 हज़ार पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हज़ारों लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया, इंटरनेट सेवाएँ बंद की गईं और बाज़ार बंद कराए गए।
आतिशी ने BJP पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति पर उन्होंने BJP को कथित तौर पर अवैध रूप से चुनाव जिताने में मदद करने का आरोप लगाया, उसकी सुरक्षा के लिए इतनी बड़ी व्यवस्था क्यों की जा रही है। उनका यह बयान चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के विरुद्ध AAP के चल रहे आंदोलन से जुड़ा है।
गोपाल राय का 'ब्लैक इमर्जेंसी' वाला बयान
AAP नेता गोपाल राय ने भी केंद्र सरकार और BJP पर हमला बोलते हुए कहा, 'देश में आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा ब्लैक इमर्जेंसी घोषित की गई है।' उन्होंने कहा कि पूरे दिल्ली शहर को छावनी में बदल दिया गया है।
गोपाल राय ने चेतावनी देते हुए कहा कि आंदोलन को दबाने की जितनी अधिक कोशिश होगी, वह उतना ही मज़बूत होगा। उनके अनुसार, यह प्रदर्शन चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के मुद्दे को जनता के बीच ले जाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
AAP लंबे समय से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, जिसे वह 'वोट चोरी' करार देती है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है।
गौरतलब है कि AAP ने इससे पहले भी चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए हैं और जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का इतिहास रहा है।
AAP का लोकतांत्रिक अधिकार का तर्क
पार्टी ने स्पष्ट कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन राजनीतिक दलों और नागरिकों का मौलिक अधिकार है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार को विरोध की आवाज़ दबाने के बजाय उठाए जा रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि इन सभी आरोपों पर केंद्र सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया तत्काल उपलब्ध नहीं थी। आने वाले घंटों में प्रदर्शन की स्थिति और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस टकराव की दिशा तय करेगी।