AAP नेताओं का आरोप: ज्ञानेश कुमार इस्तीफा और SIR रद्द करने की बजाय दिल्ली में अघोषित आपातकाल
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने 10 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने नई दिल्ली में CJP (सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए 'अघोषित आपातकाल' लागू किया है। पार्टी नेताओं ने माँग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द किया जाए, अन्यथा यह आंदोलन जारी रहेगा।
गोपाल राय का बयान
AAP नेता गोपाल राय ने कहा, 'देश में 2 अक्टूबर से CEC ज्ञानेश कुमार की ओर से लोकतंत्र की हत्या किए जाने के खिलाफ आंदोलन चल रहा है। पूरे देश में विपक्षी पार्टियाँ, छात्र संगठन और नागरिक आवाज़ उठा रहे हैं, लेकिन सरकार CEC के इस्तीफे और SIR को रद्द करने के बजाय अघोषित आपातकाल लागू कर चुकी है।'
राय ने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार उन्हें बचाने के लिए सभी लोकतांत्रिक परंपराओं की धज्जियाँ उड़ा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन जंतर-मंतर तक पहुँचेगा और तब तक नहीं रुकेगा जब तक ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR रद्द नहीं हो जाता।
पंजाब मंत्री चीमा के आरोप
पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, 'बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने गरीबों को मताधिकार दिलाने के लिए बड़ा संघर्ष किया था। मेरा मानना है कि आज BJP चुनाव आयोग का इस्तेमाल गरीबों के अधिकार छीनने और उन्हें वोट देने के अधिकार से वंचित करने के लिए कर रही है।' उन्होंने कहा कि CJP पूरे देश में प्रदर्शन कर रही है और माँग कर रही है कि CEC को तुरंत हटाया जाए तथा उन पर मुकदमा दर्ज किया जाए।
चीमा ने दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन को रोकने के लिए ट्रेन और कई मेट्रो स्टेशन बंद किए गए तथा बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र के लिए काला दिन' करार दिया। चीमा ने BJP पर 'वोट चोरी' कर सत्ता में आने का भी आरोप लगाया।
आंदोलन का विस्तार और अगला कदम
हरपाल सिंह चीमा ने यह भी घोषणा की कि चुनाव आयोग के खिलाफ जल्द ही एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू होगा और वे एक नागरिक के रूप में इसमें शामिल होंगे। AAP का कहना है कि यह आंदोलन केवल उनकी पार्टी का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों, युवाओं और विपक्षी दलों का साझा मोर्चा है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की आपत्तियाँ लगातार बढ़ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि इस पुनरीक्षण से मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा सकते हैं, जिससे वंचित वर्गों का मताधिकार प्रभावित होगा।
सरकार और चुनाव आयोग की स्थिति
इस मामले में BJP और चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। सुरक्षा प्रबंधों के बारे में संबंधित अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्टीकरण जारी नहीं किया। यह देखना बाकी है कि सरकार CEC के इस्तीफे की माँग और SIR विवाद पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि आंदोलन के तेज़ होने के संकेत मिल रहे हैं।