अभिषेक बनर्जी कोलकाता पुलिस के सामने पेश, 27 अगस्त झड़प मामले में दूसरी बार पूछताछ
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के डायमंड हार्बर लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन पहुँचे, जहाँ उनसे 27 अगस्त को कैमैक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय के बाहर हुई झड़प के सिलसिले में पूछताछ की गई। यह इस मामले में उनकी दूसरी पूछताछ है; इससे पहले एक बार वे छह घंटे से अधिक पुलिस स्टेशन में रहे थे।
मामले की पृष्ठभूमि
27 अगस्त को उस समय तनाव भड़क उठा जब कोलकाता नगर निगम (KMC) के अधिकारी पुलिसकर्मियों के साथ अभिषेक बनर्जी के कैमैक स्ट्रीट कार्यालय पर लगा एक होर्डिंग हटाने पहुँचे। आरोप है कि इन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को अभिषेक बनर्जी, अन्य TMC नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके बाद झड़प हो गई।
शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन एफआईआर के अनुसार, पुलिस ने TMC कार्यकर्ताओं पर ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने और एक महिला पुलिस अधिकारी की मर्यादा भंग करने की कोशिश का आरोप लगाया है।
एफआईआर में नामजद प्रमुख नेता
इन तीन एफआईआर में से दो में अभिषेक बनर्जी के अलावा राज्यसभा सांसद और TMC के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन, तथा नेता हुमायूं कबीर और वैश्वनर चटर्जी के नाम शामिल हैं। पुलिस अब तक इस झड़प के सिलसिले में 14 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पहले नोटिस टाला, फिर नया समन
अभिषेक बनर्जी को पहले 8 अक्टूबर को पुलिस स्टेशन में पेश होना था। हालाँकि, उन्होंने उसी दिन पुलिस को ईमेल भेजकर अनुरोध किया कि पूछताछ की समय-सूचना कम से कम 48 घंटे पहले दी जाए। इस पर शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन ने नया नोटिस जारी कर उन्हें बुधवार सुबह 11 बजे तक उपस्थित होने का निर्देश दिया।
अभिषेक बनर्जी अपने वकील के साथ तय समय पर पुलिस स्टेशन पहुँचे। गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और TMC के युवा चेहरे माने जाते हैं।
जाँच की दिशा
पुलिस एफआईआर में नामजद व्यक्तियों के खिलाफ लगे आरोपों की जाँच कर रही है और यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि KMC अधिकारियों, पुलिसकर्मियों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की असल वजह क्या थी। यह मामला ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल और कानून-व्यवस्था के बीच के रिश्ते राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।
आगे चलकर पुलिस की जाँच के निष्कर्ष और अदालत की कार्यवाही यह तय करेगी कि मामले में नामजद नेताओं के विरुद्ध आरोप-पत्र दाखिल होता है या नहीं।