अभिषेक बनर्जी कोलकाता पुलिस पूछताछ से अनुपस्थित, 48 घंटे के नोटिस की माँग
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए नहीं पहुँचे। उन्हें 27 अगस्त को मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं, पुलिसकर्मियों और कोलकाता नगर निगम (KMC) के कर्मचारियों के बीच हुई झड़प के सिलसिले में तलब किया गया था।
48 घंटे के नोटिस की माँग
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी ने शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन को एक ईमेल भेजा है, जिसमें उन्होंने अनुरोध किया है कि पूछताछ की निर्धारित तिथि व समय की सूचना कम से कम 48 घंटे पहले दी जाए। अब यह देखना बाकी है कि कोलकाता पुलिस इस ईमेल के जवाब में क्या कदम उठाती है।
गौरतलब है कि पुलिस 8 अक्टूबर को भी कालीघाट रोड स्थित उनके आवास पर नोटिस देने पहुँची थी, किंतु उस समय वे नई दिल्ली में थे, इसलिए नोटिस नहीं दिया जा सका। बाद में, उनके कोलकाता लौटने की जानकारी मिलते ही, रविवार दोपहर पुलिस ने उनके आवास पर जाकर नोटिस सौंपा।
झड़प की पृष्ठभूमि
27 अगस्त को KMC के अधिकारी पुलिस के साथ कैमक स्ट्रीट कार्यालय से एक होर्डिंग हटाने पहुँचे थे। आरोप है कि अभिषेक बनर्जी और पार्टी के अन्य नेताओं के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नागरिक अधिकारियों व पुलिसकर्मियों का विरोध किया, जिससे मौके पर हाथापाई हो गई।
शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन एफआईआर के अनुसार, पुलिस ने TMC कार्यकर्ताओं पर ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के साथ मारपीट करने और एक महिला पुलिस अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। इस घटना में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पहले भी हो चुकी है पूछताछ
यह पहली बार नहीं है जब अभिषेक बनर्जी इस मामले में पुलिस के सामने पेश हुए हैं। इससे पहले भी एक बार उनसे पूछताछ की जा चुकी है, जिसके लिए उन्होंने शेक्सपियर सरणी पुलिस स्टेशन में छह घंटे से अधिक समय बिताया था। यह मामला ऐसे समय में सुर्खियों में है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में TMC और विपक्षी दलों के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है।
राजनीतिक संदर्भ
उल्लेखनीय है कि अभिषेक बनर्जी हाल ही में नई दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) आंदोलन में भाग लेने गए थे, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर आयोजित किया गया था। वे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं और TMC की राष्ट्रीय राजनीति में एक प्रमुख चेहरा माने जाते हैं।
आगे क्या होगा
अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि कोलकाता पुलिस अभिषेक बनर्जी की 48 घंटे के पूर्व-नोटिस की माँग पर क्या रुख अपनाती है। यदि वे पुनः पूछताछ के लिए नहीं आते, तो पुलिस कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकती है। यह प्रकरण पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था और सत्तारूढ़ दल के नेताओं की जवाबदेही को लेकर एक बड़े सवाल को जन्म देता है।