8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अभाविप ने DU कुलपति को सौंपा ज्ञापन, छात्रावास खाली कराने के दबाव पर रोक की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अभाविप ने DU कुलपति को सौंपा ज्ञापन, छात्रावास खाली कराने के दबाव पर रोक की मांग

सारांश

परीक्षाओं के बीच छात्रावास खाली कराने के दबाव के खिलाफ अभाविप ने DU कुलपति को ज्ञापन सौंपा। प्रशासन ने तत्काल राहत देते हुए अंतिम वर्ष की छात्राओं को 30 जून 2026 तक छात्रावास में रहने की अनुमति दी।

मुख्य बातें

अभाविप और डूसू ने 22 मई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति को छात्रहित संबंधी ज्ञापन सौंपा।
प्रशासन ने अंतिम वर्ष की छात्राओं को 30 जून 2026 तक छात्रावास में नियमित निवासी के रूप में रहने की अनुमति दी।
कथित तौर पर कई छात्रावासों में पानी, बिजली काटने और अध्ययन कक्ष बंद करने की शिकायतें सामने आईं।
पीजी प्रवेश प्रक्रिया की तकनीकी और दस्तावेजी समस्याओं को भी ज्ञापन में उठाया गया।
अभाविप दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि परिषद छात्रहित के हर मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), दिल्ली प्रांत और अभाविप नीत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) ने 22 मई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात कर छात्रहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए कुछ समस्याओं का तत्काल समाधान करने और शेष को शीघ्र निपटाने का आश्वासन दिया।

मुख्य मांगें और मुद्दे

अभाविप ने अपने ज्ञापन में विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास सहित विभिन्न छात्रावासों में रह रही छात्राओं की गंभीर समस्याओं को उठाया। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय की अंतिम सेमेस्टर परीक्षाएं जून 2026 तक जारी हैं और इसी अवधि में यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-नेट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित हो रही हैं।

परिषद ने तर्क दिया कि परीक्षाओं के इस संवेदनशील दौर में छात्राओं पर छात्रावास खाली करने का दबाव बनाना उनके शैक्षणिक भविष्य, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

अभाविप की पहल का असर तत्काल दिखा — विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतिम वर्ष की छात्राओं को 30 जून 2026 तक छात्रावास में नियमित निवासी के रूप में रहने की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय उन हजारों छात्राओं के लिए राहत लेकर आया है जो परीक्षा की तैयारी के बीच बेघर होने की आशंका से जूझ रही थीं।

संस्थागत उत्पीड़न के आरोप

अभाविप ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि कथित तौर पर अनेक छात्रावासों में छात्राओं पर दबाव बनाने के लिए पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं बाधित की जा रही हैं, अध्ययन कक्षों को बंद किया जा रहा है और अतिरिक्त आर्थिक दंड की चेतावनियाँ दी जा रही हैं। परिषद ने इसे छात्राओं के साथ संस्थागत उत्पीड़न करार देते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की माँग की।

पीजी प्रवेश की तकनीकी समस्याएं भी उठाईं

परिषद ने पीजी प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों के सामने आ रही तकनीकी और दस्तावेजी बाधाओं को भी ज्ञापन में शामिल किया। प्रशासन ने इन मुद्दों को संज्ञान में लेकर शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।

अभाविप का रुख

अभाविप दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, 'विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रत्येक निर्णय छात्रहित, पारदर्शिता और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। छात्रों के अधिकारों, गरिमा और शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए अभाविप निरंतर संघर्षरत रहेगी और छात्रहित से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को गंभीरता से उठाती रहेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के विश्वविद्यालयों में परीक्षा सत्र के दौरान छात्रावास नीतियों को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि परीक्षा काल में बुनियादी सुविधाएं काटने जैसी स्थिति उत्पन्न ही क्यों हुई। छात्रावास नीति और परीक्षा कैलेंडर के बीच यह टकराव हर साल दोहराया जाता है, जो प्रशासनिक समन्वय की पुरानी विफलता को उजागर करता है। अभाविप की सक्रियता ने तत्काल राहत दिलाई, लेकिन स्थायी समाधान के लिए विश्वविद्यालय को एक स्पष्ट, लिखित छात्रावास नीति बनानी होगी जो परीक्षा सत्र और प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ समन्वित हो।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अभाविप ने DU कुलपति को ज्ञापन में क्या मांगें रखीं?
अभाविप ने परीक्षा काल में छात्राओं पर छात्रावास खाली करने का दबाव बंद करने, पानी-बिजली जैसी सुविधाएं बहाल करने और पीजी प्रवेश की तकनीकी समस्याएं दूर करने की मांग की। साथ ही यूजीसी-नेट और सीएसआईआर-नेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं तक छात्रावास में रहने की अनुमति माँगी गई।
DU प्रशासन ने छात्रावास को लेकर क्या फैसला लिया?
अभाविप की पहल के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतिम वर्ष की छात्राओं को 30 जून 2026 तक छात्रावास में नियमित निवासी के रूप में रहने की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय जून तक चलने वाली अंतिम सेमेस्टर परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
छात्रावासों में छात्राओं के साथ कथित उत्पीड़न कैसे हो रहा था?
अभाविप के अनुसार, कथित तौर पर कई छात्रावासों में पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं बाधित की जा रही थीं, अध्ययन कक्ष बंद किए जा रहे थे और अतिरिक्त आर्थिक दंड की चेतावनियाँ दी जा रही थीं। परिषद ने इसे संस्थागत उत्पीड़न बताते हुए तत्काल रोक की माँग की।
पीजी प्रवेश की समस्याओं पर प्रशासन ने क्या कहा?
दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीजी प्रवेश प्रक्रिया में आ रही तकनीकी और दस्तावेजी समस्याओं को गंभीरता से संज्ञान में लिया और शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। इन मुद्दों को अभाविप ने ज्ञापन में विस्तार से उठाया था।
अभाविप दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने क्या कहा?
सार्थक शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के हर निर्णय का आधार छात्रहित, पारदर्शिता और समान अवसर होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभाविप छात्रों के अधिकारों और शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्षरत रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले