अभाविप ने DU कुलपति को सौंपा ज्ञापन, छात्रावास खाली कराने के दबाव पर रोक की मांग
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), दिल्ली प्रांत और अभाविप नीत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) ने 22 मई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से मुलाकात कर छात्रहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए कुछ समस्याओं का तत्काल समाधान करने और शेष को शीघ्र निपटाने का आश्वासन दिया।
मुख्य मांगें और मुद्दे
अभाविप ने अपने ज्ञापन में विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास सहित विभिन्न छात्रावासों में रह रही छात्राओं की गंभीर समस्याओं को उठाया। परिषद ने कहा कि विश्वविद्यालय की अंतिम सेमेस्टर परीक्षाएं जून 2026 तक जारी हैं और इसी अवधि में यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-नेट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित हो रही हैं।
परिषद ने तर्क दिया कि परीक्षाओं के इस संवेदनशील दौर में छात्राओं पर छात्रावास खाली करने का दबाव बनाना उनके शैक्षणिक भविष्य, मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
अभाविप की पहल का असर तत्काल दिखा — विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतिम वर्ष की छात्राओं को 30 जून 2026 तक छात्रावास में नियमित निवासी के रूप में रहने की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय उन हजारों छात्राओं के लिए राहत लेकर आया है जो परीक्षा की तैयारी के बीच बेघर होने की आशंका से जूझ रही थीं।
संस्थागत उत्पीड़न के आरोप
अभाविप ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि कथित तौर पर अनेक छात्रावासों में छात्राओं पर दबाव बनाने के लिए पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं बाधित की जा रही हैं, अध्ययन कक्षों को बंद किया जा रहा है और अतिरिक्त आर्थिक दंड की चेतावनियाँ दी जा रही हैं। परिषद ने इसे छात्राओं के साथ संस्थागत उत्पीड़न करार देते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की माँग की।
पीजी प्रवेश की तकनीकी समस्याएं भी उठाईं
परिषद ने पीजी प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों के सामने आ रही तकनीकी और दस्तावेजी बाधाओं को भी ज्ञापन में शामिल किया। प्रशासन ने इन मुद्दों को संज्ञान में लेकर शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया।
अभाविप का रुख
अभाविप दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा, 'विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रत्येक निर्णय छात्रहित, पारदर्शिता और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। छात्रों के अधिकारों, गरिमा और शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए अभाविप निरंतर संघर्षरत रहेगी और छात्रहित से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को गंभीरता से उठाती रहेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के विश्वविद्यालयों में परीक्षा सत्र के दौरान छात्रावास नीतियों को लेकर विवाद बढ़ रहे हैं।