ओडिशा छात्र संघ चुनाव 2026: एबीवीपी ने 79 संस्थानों में जीत का दावा, बीसीजेडी 49 पर
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने ओडिशा के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 15 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुए छात्र संघ चुनावों में बड़ी बढ़त बनाई है। शाम 7 बजे तक उपलब्ध अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार एबीवीपी ने 79 शिक्षण संस्थानों में जीत दर्ज की, जबकि बीजू छात्र जनता दल (बीसीजेडी) 49 कॉलेजों में विजयी रहा। यह चुनाव ओडिशा में आठ वर्षों के अंतराल के बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आयोजित किए गए।
मतदान और उम्मीदवारों का आंकड़ा
ओडिशा उच्च शिक्षा विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य के 332 उच्च शिक्षण संस्थानों में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान हुआ। इनमें लगभग 320 कॉलेज और 12 विश्वविद्यालय शामिल थे। चुनावी मैदान में कुल 6,696 उम्मीदवार उतरे — कॉलेजों से 6,358 और विश्वविद्यालयों से 338।
शाम 6:45 बजे तक 153 कॉलेजों ने अपने परिणाम घोषित कर दिए थे, जिनमें कुल 1,398 उम्मीदवार विजयी घोषित हुए। इनमें से 756 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए, जबकि 642 मतदान के ज़रिए चुने गए।
दलीय प्रदर्शन
एबीवीपी की बढ़त उल्लेखनीय इसलिए भी है क्योंकि राज्य के 7 विश्वविद्यालयों में से 5 में उसने जीत दर्ज की — यह विश्वविद्यालय-स्तरीय राजनीति में संगठन की मज़बूत पकड़ दर्शाता है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की छात्र शाखा नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और निर्दलीय उम्मीदवार प्रत्येक 7-7 संस्थानों में जीत सके। हालाँकि, ओडिशा उच्च शिक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर की शाम तक राज्यव्यापी परिणामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी।
तनाव और हिंसा की घटनाएँ
चुनाव प्रक्रिया मोटे तौर पर शांतिपूर्ण रही, लेकिन छिटपुट घटनाएँ ज़रूर हुईं। भुवनेश्वर के रमा देवी महिला विश्वविद्यालय में बीसीजेडी और एबीवीपी के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। यह स्थिति बीसीजेडी अध्यक्ष इप्शिता साहू की कमिश्नरेट पुलिस द्वारा गिरफ्तारी के बाद बनी।
पुरी जिले के सातापदा पंचायत कॉलेज में कथित तौर पर कई देसी बम फेंके जाने के बाद प्रशासन ने कॉलेज को अनिश्चित काल के लिए बंद करने का आदेश दिया। अधिकारियों के अनुसार इन घटनाओं में कोई हताहत या घायल नहीं हुआ। राज्य के कुछ अन्य स्थानों पर भी छिटपुट तनाव की खबरें आईं, परंतु कोई बड़ी हिंसा या चोट की घटना सामने नहीं आई।
आठ साल बाद लौटे चुनाव — ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि ओडिशा में छात्र संघ चुनावों पर लंबे समय से रोक लगी हुई थी और 8 वर्षों के अंतराल के बाद इस बार ये चुनाव शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आयोजित किए गए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में छात्र राजनीति के पुनरुत्थान की बहस चल रही है और विभिन्न राज्यों में छात्र संघ चुनावों की बहाली की माँग तेज़ हो रही है। एबीवीपी का यह प्रदर्शन राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बढ़ते जनाधार का परिलक्षण माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
ओडिशा उच्च शिक्षा विभाग से शेष संस्थानों के अंतिम आधिकारिक परिणाम अगले कुछ घंटों या दिनों में जारी होने की उम्मीद है। सातापदा पंचायत कॉलेज में बंद की स्थिति और गिरफ्तारी के बाद की राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ आने वाले समय में परिसर माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।