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अदाणी ग्रीन एनर्जी ने खावड़ा में बीईएसएस क्षमता 6.63 GWh पर पहुँचाई, 14 महीनों में हुई दोगुनी

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अदाणी ग्रीन एनर्जी ने खावड़ा में बीईएसएस क्षमता 6.63 GWh पर पहुँचाई, 14 महीनों में हुई दोगुनी

सारांश

अदाणी ग्रीन एनर्जी ने सिर्फ 14 महीनों में खावड़ा की BESS क्षमता लगभग दोगुनी कर 6.63 GWh पर पहुँचाई — यानी भारत की कुल ऑपरेशनल बैटरी स्टोरेज का आधे से ज़्यादा एक ही कंपनी के पास। यह उपलब्धि खावड़ा को दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-साइट BESS संयंत्र के रूप में पक्का करती है।

मुख्य बातें

अदाणी ग्रीन एनर्जी (AGEL) ने खावड़ा, गुजरात में BESS क्षमता 3.55 GWh से बढ़ाकर 6.63 GWh कर दी — सिर्फ 14 महीनों में।
AGEL के पास अब भारत की कुल 12.6 GWh ऑपरेशनल BESS क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा है।
यह क्षमता 20 लाख घरों को एक दिन तक बिजली देने और दिल्ली मेट्रो की दैनिक ज़रूरत के दोगुने के बराबर ऊर्जा स्टोर करने में सक्षम है।
खावड़ा को एक ही स्थान पर दुनिया का सबसे बड़ा ऑपरेशनल BESS संयंत्र माना जा रहा है।
AGEL का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 में 10 GWh से अधिक और अगले 5 वर्षों में 50 GWh स्टोरेज क्षमता हासिल करना है।

अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने 1 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि उसने गुजरात के खावड़ा स्थित अपनी ऑपरेशनल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्षमता को जून 2026 के 3.55 गीगावाट-घंटे से बढ़ाकर 6.63 गीगावाट-घंटे कर दिया है — यह विस्तार केवल 14 महीनों में हासिल किया गया। इस उपलब्धि के साथ AGEL के पास भारत की कुल 12.6 गीगावाट-घंटे की ऑपरेशनल BESS क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आ गया है।

उपलब्धि का पैमाना

6.63 गीगावाट-घंटे की यह स्टोरेज क्षमता इतनी स्वच्छ ऊर्जा संचित कर सकती है कि लगभग 20 लाख घरों को एक दिन तक बिजली दी जा सके। साथ ही यह नागपुर, पटना या विशाखापत्तनम जैसे शहरों की पीक बिजली माँग को कई घंटों तक पूरा कर सकती है।

खावड़ा का यह BESS संयंत्र 1.5 लाख से अधिक मध्यम आकार के इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी स्टोरेज क्षमता के बराबर है। प्रतिदिन यह इतनी ऊर्जा स्टोर कर सकता है जो दिल्ली मेट्रो की अनुमानित दैनिक बिजली ज़रूरत के लगभग दोगुने के बराबर है — इससे इस स्थापना के असाधारण पैमाने का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

कंपनी का नज़रिया

AGEL के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा, 'सिर्फ 14 महीनों में 6.63 गीगावाट-घंटे की ऑपरेशनल बैटरी स्टोरेज क्षमता हासिल करना AGEL और भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस स्तर पर स्टोरेज अक्षय ऊर्जा से बनने वाली बिजली को अधिक स्थिर, भरोसेमंद और जरूरत पड़ने पर ग्रिड में उपलब्ध कराने योग्य बना सकता है।'

उन्होंने आगे कहा, 'जैसे-जैसे भारत में बिजली की माँग बढ़ रही है, हम बैटरी और पंप्ड स्टोरेज दोनों तरह के ऊर्जा भंडारण समाधानों का विस्तार जारी रखेंगे, ताकि अधिक मज़बूत और कम कार्बन वाले बिजली ग्रिड को समर्थन दिया जा सके।'

तकनीकी ढाँचा

खावड़ा के इस BESS में लिथियम-आयन बैटरी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसे एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) और ऑटोमेटेड टेलीमेट्री से जोड़ा गया है, जो बैटरी की चार्जिंग और डिस्चार्जिंग को नियंत्रित करता है, सिस्टम के प्रदर्शन को बेहतर बनाता है और ग्रिड सेवाओं में सहायता करता है। यह BESS खावड़ा में AGEL के उस विशाल अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जहाँ 538 वर्ग किलोमीटर के बंजर क्षेत्र में 30 गीगावाट का अक्षय ऊर्जा संयंत्र विकसित किया जा रहा है।

गौरतलब है कि यह क्षमता वृद्धि खावड़ा को एक ही स्थान पर दुनिया की सबसे बड़ी ऑपरेशनल बैटरी एनर्जी स्टोरेज स्थापना के रूप में और मज़बूती से स्थापित करती है।

आगे की राह

AGEL ने बताया कि वह वित्त वर्ष 2026-27 में 10 गीगावाट-घंटे से अधिक BESS क्षमता जोड़ने की राह पर है। कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 50 गीगावाट-घंटे की कुल स्टोरेज क्षमता हासिल करना है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार 2030 तक 500 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्रिड स्थिरता समाधानों पर ज़ोर दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है — भारत की कुल ऑपरेशनल BESS क्षमता का 50% से अधिक एक ही निजी कंपनी के पास होना ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में एकाग्रता की ओर इशारा करता है। यह ऊर्जा सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा नीति के नज़रिए से नीति-निर्माताओं के लिए विचारणीय है। दूसरी तरफ, 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने के लिए ग्रिड-स्केल स्टोरेज अपरिहार्य है — और AGEL की रफ़्तार यह साबित करती है कि निजी निवेश इस खाई को भर सकता है, बशर्ते नियामक ढाँचा पारदर्शी और जवाबदेह बना रहे।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी ग्रीन एनर्जी की BESS क्षमता 6.63 गीगावाट-घंटे क्यों अहम है?
यह उपलब्धि AGEL को भारत की कुल ऑपरेशनल बैटरी स्टोरेज क्षमता के 50% से अधिक का स्वामी बनाती है और खावड़ा को दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट ऑपरेशनल BESS संयंत्र बनाती है। यह क्षमता अक्षय ऊर्जा को ग्रिड में स्थिर और भरोसेमंद तरीके से जोड़ने में मदद करती है।
खावड़ा BESS क्षमता को 14 महीनों में दोगुना कैसे किया गया?
AGEL ने जून 2026 में 3.55 GWh की क्षमता से शुरुआत करते हुए लिथियम-आयन बैटरी तकनीक, एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) और ऑटोमेटेड टेलीमेट्री के साथ क्षमता विस्तार किया। यह BESS खावड़ा में 538 वर्ग किलोमीटर में विकसित हो रहे 30 GW अक्षय ऊर्जा प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
AGEL का भविष्य में BESS क्षमता के लिए क्या लक्ष्य है?
AGEL का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 में 10 GWh से अधिक BESS क्षमता जोड़ना और अगले 5 वर्षों में कुल 50 GWh की स्टोरेज क्षमता हासिल करना है।
6.63 GWh की BESS क्षमता से आम जनता को क्या फायदा होगा?
यह क्षमता लगभग 20 लाख घरों को एक दिन तक बिजली देने में सक्षम है और दिल्ली मेट्रो की दैनिक ऊर्जा ज़रूरत के दोगुने के बराबर ऊर्जा संचित कर सकती है। इससे ग्रिड स्थिरता बढ़ती है, पीक डिमांड बेहतर तरीके से मैनेज होती है और बिजली कटौती का जोखिम कम होता है।
खावड़ा BESS को दुनिया का सबसे बड़ा क्यों माना जा रहा है?
कंपनी के अनुसार, 6.63 GWh की यह ऑपरेशनल क्षमता एक ही स्थान पर स्थापित दुनिया के किसी भी अन्य BESS संयंत्र से बड़ी है। यह 538 वर्ग किलोमीटर के विशाल खावड़ा अक्षय ऊर्जा परिसर से जुड़ी है, जो इसे पैमाने और एकीकरण दोनों के लिहाज़ से अनूठा बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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