अदाणी पोर्ट्स की सब्सिडियरी एस्ट्रो ऑफशोर का ओशनियरिंग से समझौता, डीपवॉटर कारोबार में वैश्विक विस्तार की तैयारी

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अदाणी पोर्ट्स की सब्सिडियरी एस्ट्रो ऑफशोर का ओशनियरिंग से समझौता, डीपवॉटर कारोबार में वैश्विक विस्तार की तैयारी

सारांश

अदाणी पोर्ट्स की सब्सिडियरी एस्ट्रो ऑफशोर ने अमेरिकी कंपनी ओशनियरिंग के साथ साझेदारी कर अल्ट्रा-डीपवॉटर और यूरोपीय ऑफशोर बाज़ार में कदम रखा है। नया जहाज 'एस्ट्रो एटलस' 3,000 मीटर गहराई तक काम करने में सक्षम है — यह एपीएसईजेड के FY2031 तक ₹13,000 करोड़ निवेश और 200 जहाजों के बेड़े के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम है।

मुख्य बातें

एस्ट्रो ऑफशोर (एपीएसईजेड की सब्सिडियरी) ने 12 मई 2026 को अमेरिकी कंपनी ओशनियरिंग इंटरनेशनल इंक.
के साथ रणनीतिक साझेदारी की।
समझौते का फोकस यूरोप में अल्ट्रा-डीपवॉटर, सबसी इंजीनियरिंग, पाइपलाइन इंस्टॉलेशन और रखरखाव परियोजनाओं पर है।
नया जहाज 'एस्ट्रो एटलस' — 97 मीटर लंबा, 3,000 मीटर गहराई तक सक्षम, 150 टन क्रेन और 100 लोगों की आवास क्षमता।
एपीएसईजेड का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक 200 जहाजों का बेड़ा, ₹6,000 करोड़ राजस्व और ₹13,000 करोड़ पूंजीगत निवेश।
सीईओ अश्वनी गुप्ता ने इसे वैश्विक विविधीकृत समुद्री प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (एपीएसईजेड) की समुद्री क्षेत्र की सब्सिडियरी एस्ट्रो ऑफशोर ने 12 मई 2026 को अमेरिकी इंजीनियरिंग और एप्लाइड टेक्नोलॉजी कंपनी ओशनियरिंग इंटरनेशनल इंक. के साथ एक रणनीतिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अल्ट्रा-डीपवॉटर और सबसी ऑपरेशंस में क्षमता विस्तार करना है, जिसे एपीएसईजेड की वैश्विक ऑफशोर रणनीति में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

समझौते में क्या शामिल है

दोनों कंपनियों के बीच हुई यह साझेदारी विशेष रूप से यूरोप में ऑफशोर अवसरों का दोहन करने और जटिल सबसी इंजीनियरिंग परियोजनाओं में क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार की गई है। इस समझौते के दायरे में अंडरवॉटर कंस्ट्रक्शन, पाइपलाइन इंस्टॉलेशन, निरीक्षण और रखरखाव जैसे विशेष कार्य शामिल हैं।

गौरतलब है कि यह कदम एपीएसईजेड की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी लॉजिस्टिक्स, ऑफशोर सपोर्ट सर्विसेज और डीपवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस को एकीकृत कर एक वैश्विक समुद्री प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहती है।

नए जहाज से मजबूत हुई क्षमता

अपने विस्तार अभियान के तहत एस्ट्रो ऑफशोर ने अपना पहला अल्ट्रा-डीपवॉटर जहाज 'एस्ट्रो एटलस' बेड़े में शामिल किया है। यह 97 मीटर लंबा डीपी2 मल्टीपर्पज सपोर्ट वेसल (पूर्व नाम एनर्जी सवाना) अत्याधुनिक सबसी सिस्टम से लैस है।

इस जहाज में 150 टन क्षमता वाली क्रेन, एक अतिरिक्त क्रेन, मूनपूल और 100 लोगों तक के रहने की सुविधा मौजूद है। कंपनी के अनुसार यह जहाज 3,000 मीटर से अधिक गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में परिचालन करने में सक्षम है।

वरिष्ठ अधिकारियों की प्रतिक्रिया

एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अश्वनी गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के वैश्विक स्तर पर विविधीकृत समुद्री प्लेटफॉर्म बनाने के लक्ष्य को मजबूती देती है। उनके अनुसार, एस्ट्रो ऑफशोर के आधुनिक जहाजों और ओशनियरिंग की डीपवॉटर इंजीनियरिंग तथा आरओवी (ROV) विशेषज्ञता के संयोजन से कंपनी जटिल ऑफशोर ऑपरेशंस में अपनी क्षमताएँ बढ़ा रही है।

एस्ट्रो ऑफशोर के सीईओ मार्क हम्फ्रीज ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मीटर गहराई तक की क्षमता एक तकनीकी छलांग है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — यूरोप का ऑफशोर क्षेत्र अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है और वहाँ स्थापित यूरोपीय व अमेरिकी खिलाड़ी पहले से मौजूद हैं। FY2031 तक ₹13,000 करोड़ के पूंजीगत निवेश का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, और निवेशकों की नज़र इस बात पर होगी कि ₹6,000 करोड़ के राजस्व लक्ष्य को हासिल करने का रोडमैप कितना ठोस है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एस्ट्रो ऑफशोर और ओशनियरिंग के बीच समझौता किस बारे में है?
यह समझौता अल्ट्रा-डीपवॉटर और सबसी ऑपरेशंस में संयुक्त रूप से काम करने के लिए है, जिसमें यूरोप में पाइपलाइन इंस्टॉलेशन, अंडरवॉटर कंस्ट्रक्शन और निरीक्षण-रखरखाव परियोजनाएँ शामिल हैं। एस्ट्रो ऑफशोर की आधुनिक जहाज क्षमता और ओशनियरिंग की ROV व डीपवॉटर इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को मिलाकर यह साझेदारी बनाई गई है।
'एस्ट्रो एटलस' जहाज की खासियतें क्या हैं?
'एस्ट्रो एटलस' एक 97 मीटर लंबा डीपी2 मल्टीपर्पज सपोर्ट वेसल है जो 3,000 मीटर से अधिक गहराई में काम कर सकता है। इसमें 150 टन क्षमता वाली क्रेन, मूनपूल और 100 लोगों तक के रहने की सुविधा है।
एपीएसईजेड का वित्त वर्ष 2031 तक समुद्री कारोबार में क्या लक्ष्य है?
एपीएसईजेड का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031 तक 200 जहाजों का बेड़ा तैयार करना, समुद्री कारोबार से ₹6,000 करोड़ का राजस्व अर्जित करना और ₹13,000 करोड़ का पूंजीगत निवेश करना है। यह साझेदारी उसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
ओशनियरिंग इंटरनेशनल इंक. कौन सी कंपनी है?
ओशनियरिंग इंटरनेशनल इंक. अमेरिका की एक प्रमुख इंजीनियरिंग और एप्लाइड टेक्नोलॉजी कंपनी है, जो डीपवॉटर ऑफशोर क्षेत्र में ROV (रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल) और सबसी इंजीनियरिंग समाधानों के लिए जानी जाती है। यह वैश्विक ऊर्जा और समुद्री उद्योग में एक स्थापित नाम है।
यह साझेदारी एपीएसईजेड की समग्र रणनीति में कैसे फिट होती है?
एपीएसईजेड लॉजिस्टिक्स, ऑफशोर सपोर्ट सर्विसेज और डीपवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर को एकीकृत कर एक वैश्विक समुद्री प्लेटफॉर्म बनाना चाहती है। यह समझौता उस रणनीति को यूरोपीय बाज़ार तक विस्तार देता है और तकनीकी क्षमता को मजबूत करता है।
राष्ट्र प्रेस