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अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और अदाणी फाउंडेशन का 'उत्थान' शिविर: बीएमसी छात्रों को मिला रियल-लाइफ लर्निंग का अनुभव

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अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और अदाणी फाउंडेशन का 'उत्थान' शिविर: बीएमसी छात्रों को मिला रियल-लाइफ लर्निंग का अनुभव

सारांश

'उत्थान' शिविर ने मुंबई के बीएमसी स्कूलों के बच्चों को कक्षा से बाहर निकालकर बढ़ई, दर्जी और सब्जी विक्रेताओं की दुनिया से रूबरू कराया — यह सिर्फ ग्रीष्मकालीन शिविर नहीं, बल्कि NEP 2020 की भावना को ज़मीन पर उतारने का एक व्यावहारिक प्रयास था।

मुख्य बातें

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और अदाणी फाउंडेशन ने मुंबई के बीएमसी स्कूलों के छात्रों के लिए 'उत्थान' सीएसआर शिविर का सफलतापूर्वक समापन किया।
शिविर निपुण भारत मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित हुआ, जिसमें मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल (FLN) पर जोर दिया गया।
छात्रों ने बढ़ई, इलेक्ट्रीशियन, दर्जी, लोहार, प्लंबर, नर्स और सब्जी विक्रेताओं के साथ व्यावसायिक सत्रों में भाग लिया।
मालवानी पश्चिम के MHB हिंदी तृतीय विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवशंकर आर.
तिवारी ने शिविर को 'समग्र शिक्षा का सच्चा उदाहरण' बताया।
कक्षा 4 की छात्रा एराम जावेद शेख सहित कई छात्रों ने 'न्यूजरूम एक्सप्लोरर' और 'बाजार के उस्ताद' जैसी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और अदाणी फाउंडेशन ने मुंबई के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) स्कूलों के छात्रों के लिए आयोजित बहु-दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिक्षण शिविर के सफल समापन की घोषणा की है। 'उत्थान' नामक इस सीएसआर पहल को कक्षा की शिक्षा को वास्तविक जीवन के व्यावसायिक अनुभवों से जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।

शिविर की संरचना और उद्देश्य

यह कार्यक्रम निपुण भारत मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित किया गया। आयोजकों के अनुसार, शिविर का मुख्य लक्ष्य बच्चों में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल (FLN) को सुदृढ़ करना था, साथ ही अकादमिक अवधारणाओं को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना था। शिविर का प्रत्येक दिन एक विशिष्ट विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें शैक्षणिक गतिविधियों को कौशल-आधारित व्यवसायों के साथ एकीकृत किया गया।

मुख्य गतिविधियाँ और सत्र

'हर बच्चे के पास एक कहानी है जिसे प्रेरित किया जा सकता है' शीर्षक वाले एक सत्र में छात्रों को 'न्यूजरूम एक्सप्लोरर' की भूमिका में रखा गया, जहाँ उन्होंने समाचार पत्र पढ़े, शब्दों, संख्याओं, तिथियों और कीमतों की पहचान की, शीर्षक बनाए और छोटी रिपोर्टें लिखीं। इस गतिविधि को मोची जैसे पेशेवरों के साथ बातचीत से पूरक बनाया गया, जिससे बच्चों को श्रम की गरिमा और कुशल व्यवसायों का महत्व समझाया गया।

'माप का जादू' और 'बाजार के उस्ताद' जैसी गणित-आधारित गतिविधियों में बच्चों ने वस्तुओं को मापा, मात्राओं की तुलना की और नकली खरीद-बिक्री अभ्यासों में भाग लिया। बढ़ई, इलेक्ट्रीशियन और सब्जी विक्रेताओं के साथ बातचीत के माध्यम से छात्रों ने समझा कि गणितीय अवधारणाएँ रोज़मर्रा के व्यवसायों में किस प्रकार काम आती हैं।

साक्षरता और संचार कौशल पर जोर

शिविर में कहानी निर्माण, पठन मंडलियों, पोस्टर बनाने और सार्वजनिक भाषण गतिविधियों के ज़रिये साक्षरता, रचनात्मकता और संचार कौशल को बढ़ावा दिया गया। दर्जी, लोहार, प्लंबर और नर्सों के साथ व्यावसायिक सत्रों ने छात्रों को शिल्प कौशल, स्थिरता, स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक सेवा से जुड़े विचारों से परिचित कराया। समापन सत्रों में समस्या-समाधान क्षमता, तार्किक सोच, टीम वर्क और सामाजिक जिम्मेदारी के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया

मालवानी पश्चिम स्थित महाराष्ट्र हाउसिंग बोर्ड (MHB) हिंदी तृतीय विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवशंकर आर. तिवारी ने कहा, 'इस शिविर ने हमें दिखाया है कि बच्चों को वास्तविक जीवन कौशल से परिचित कराने पर कक्षा शिक्षण कैसे रूपांतरित हो सकता है। हमारे छात्रों ने न केवल पढ़ने और गणित में सुधार किया बल्कि विभिन्न व्यवसायों के प्रति आत्मविश्वास और सम्मान भी विकसित किया। यह समग्र शिक्षा का एक सच्चा उदाहरण है।'

मालवानी पूर्व स्थित MHB हिंदी तृतीय विद्यालय की छात्रा की अभिभावक पूजा भाईशंकर भट्ट ने बताया, 'अब वह घर पर अखबार पढ़ती है और बाजार में माप-तोल के बारे में जो कुछ सीखा है, उसे समझाती है। शिविर ने सीखने को आनंददायक और व्यावहारिक बना दिया है।' मालवानी पश्चिम स्थित MHB विद्यालय की कक्षा 4 की छात्रा एराम जावेद शेख ने कहा, 'मुझे वो गतिविधि बहुत पसंद आई जिसमें हम रिपोर्टर बने और अपनी खुद की हेडलाइन लिखीं। बढ़ई और दर्जी से मिलना भी मजेदार था क्योंकि हमने देखा कि वे अपने काम में गणित और पढ़ने का इस्तेमाल कैसे करते हैं।'

अदाणी समूह का दृष्टिकोण

अदाणी समूह के एक प्रतिनिधि ने कहा कि यह पहल संगठन के उस विश्वास को दर्शाती है जिसके अनुसार शिक्षा तब अधिक सार्थक हो जाती है जब बच्चे सीखने को वास्तविक जीवन के अनुभवों से जोड़ पाते हैं। गौरतलब है कि 'उत्थान' जैसी पहलें सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के राष्ट्रीय प्रयासों की दिशा में कॉर्पोरेट सहभागिता का एक उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। आने वाले समय में इस कार्यक्रम के विस्तार की संभावनाएँ भी तलाशी जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उपस्थिति दर, या दीर्घकालिक शैक्षणिक प्रदर्शन — स्वतंत्र रूप से मापे और सार्वजनिक किए जाएँ। मुंबई के सरकारी स्कूलों में बुनियादी साक्षरता की चुनौती वास्तविक है और NEP 2020 के लक्ष्य महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन एकल शिविर की प्रतिक्रियाएँ प्रभाव का पूरा चित्र नहीं देती हैं। यह पहल तब नीतिगत बदलाव का हिस्सा बन सकती है जब बीएमसी और राज्य सरकार इसे स्केल करने के लिए ढाँचागत सहयोग दें।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अदाणी फाउंडेशन का 'उत्थान' शिविर क्या है?
'उत्थान' अदाणी इलेक्ट्रिसिटी और अदाणी फाउंडेशन की एक सीएसआर पहल है, जिसके तहत मुंबई के बीएमसी स्कूलों के छात्रों के लिए बहु-दिवसीय ग्रीष्मकालीन शिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य कक्षा की शिक्षा को वास्तविक जीवन के व्यावसायिक अनुभवों से जोड़ना और बच्चों में मूलभूत साक्षरता व संख्यात्मक कौशल को मज़बूत करना है।
इस शिविर में किन गतिविधियों का आयोजन किया गया?
शिविर में 'न्यूजरूम एक्सप्लोरर', 'माप का जादू' और 'बाजार के उस्ताद' जैसी गतिविधियाँ शामिल थीं। इसके अलावा बढ़ई, इलेक्ट्रीशियन, दर्जी, लोहार, प्लंबर, नर्स और सब्जी विक्रेताओं के साथ व्यावसायिक सत्र आयोजित किए गए, जिनसे छात्रों ने समझा कि गणित और भाषा का उपयोग रोज़मर्रा के कामों में कैसे होता है।
यह शिविर किन सरकारी नीतियों के अनुरूप है?
यह शिविर निपुण भारत मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित किया गया। दोनों नीतियाँ बच्चों में मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक कौशल (FLN) को प्राथमिकता देती हैं और अनुभव-आधारित शिक्षण पद्धतियों को प्रोत्साहित करती हैं।
शिविर में किन स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया?
शिविर में मुंबई के मालवानी पश्चिम और मालवानी पूर्व स्थित महाराष्ट्र हाउसिंग बोर्ड (MHB) हिंदी तृतीय विद्यालयों के बीएमसी छात्रों ने भाग लिया। शिविर में कक्षा 4 तक के छात्र शामिल थे।
अभिभावकों और शिक्षकों ने इस पहल पर क्या कहा?
MHB हिंदी तृतीय विद्यालय के प्रधानाचार्य शिवशंकर आर. तिवारी ने इसे 'समग्र शिक्षा का सच्चा उदाहरण' बताया। अभिभावक पूजा भाईशंकर भट्ट ने कहा कि शिविर के बाद उनकी बच्ची घर पर अखबार पढ़ने लगी और बाजार में सीखी बातें साझा करती है।
राष्ट्र प्रेस
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