त्रिपुरा निकाय चुनाव से पहले अगरतला में 3 पिस्तौल, 50 कारतूस बरामद; बिहार के 2 संदिग्ध गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा पुलिस ने 4 नवंबर 2026 को अगरतला में एक विशेष अभियान के दौरान बिहार के दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया और उनके पास से तीन पिस्तौल, 50 कारतूस तथा छह मैगजीन बरामद कीं। यह कार्रवाई 27 नवंबर को प्रस्तावित शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से महज़ कुछ दिन पहले की गई है, जिससे चुनावी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
गिरफ्तारी और बरामदगी का विवरण
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अवैध हथियारों की आवाजाही की खुफिया सूचना मिलने के बाद बट्टाला पुल के निकट एक शिव मंदिर के पास छापेमारी की गई। पुलिस दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों संदिग्धों को मौके पर ही दबोच लिया। उनके पास से दो मोबाइल फोन भी ज़ब्त किए गए, जिनकी जाँच की जा रही है।
गिरफ्तार व्यक्तियों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस ने कहा है कि जाँच की संवेदनशीलता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
हथियारों की प्रकृति और फोरेंसिक जाँच
पुलिस के बयान के अनुसार, बरामद तीनों पिस्तौलों पर 'मेड इन इटली' का उल्लेख है और ये फैक्ट्री-निर्मित प्रतीत होती हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हथियारों की प्रामाणिकता, उत्पत्ति और इनके संभावित उपयोग का उद्देश्य जानने के लिए फोरेंसिक जाँच और विस्तृत पूछताछ जारी है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क में अन्य व्यक्ति शामिल हैं या नहीं।
पिछले हफ्ते भी हुई थी हथियार तस्करी की घटना
गौरतलब है कि यह पहली ऐसी घटना नहीं है। पिछले सप्ताह गोमती जिले के महारानी में नाकाबंदी के दौरान एक यात्री वाहन से 200 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे और इस संबंध में बिमल चकमा उर्फ जयंता लाल चकमा (37 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार वह मैक्स वाहन अगरतला से ढलाई जिले के रायश्यबारी की ओर जा रहा था, जब महारानी पुलिस चौकी पर नियमित जाँच के दौरान उसे रोका गया।
चुनावी सुरक्षा और प्रशासन की तैयारी
यह रिकवरी 27 नवंबर को होने वाले नगर निगम चुनावों — जिनमें अगरतला नगर निगम के चुनाव भी शामिल हैं — की पृष्ठभूमि में हुई है। प्रशासन ने इन चुनावों को लेकर कड़ी सुरक्षा तैयारियाँ की हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर राज्यों में चुनावों के दौरान हथियारों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से ही हाई अलर्ट पर रहती हैं।
आने वाले दिनों में जाँच के परिणाम और संभावित नेटवर्क का खुलासा चुनावी सुरक्षा की दृष्टि से निर्णायक साबित हो सकता है।