1 अक्टूबर 2026
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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 2008: सुप्रीम कोर्ट ने बरेलवी की फांसी पर लगाई रोक, गुजरात सरकार को नोटिस

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अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 2008: सुप्रीम कोर्ट ने बरेलवी की फांसी पर लगाई रोक, गुजरात सरकार को नोटिस

सारांश

2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में 56 लोगों की जान गई थी। अब, करीब 18 साल बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने मौत की सजा पाए दोषी बरेलवी की फांसी पर अंतरिम रोक लगा दी है। 7,000 पन्नों के फैसले और 7.88 लाख पन्नों की केस फाइल वाला यह मुकदमा एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे पर है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की फांसी पर अंतरिम रोक लगाई।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और संदीप मेहता की पीठ ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया।
26 जुलाई 2008 के धमाकों में 56 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए थे।
18 फरवरी 2022 को 38 दोषियों को मौत की सजा; 11 को आजीवन कारावास; 29 बरी।
ट्रायल कोर्ट का फैसला 7,000 पृष्ठ , केस फाइल 7.88 लाख पृष्ठ ; 1,163 गवाह की जाँच हुई।
बरेलवी के अधिवक्ता का तर्क — दोषसिद्धि केवल कथित साजिश के आधार पर, साक्ष्य में खामी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में मौत की सजा पाए दोषी अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की फांसी पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली बरेलवी की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर गुजरात सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब माँगा है।

पीठ और सुनवाई का विवरण

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की विशेष तीन-सदस्यीय पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया। बरेलवी की ओर से अधिवक्ता आशुतोष ठाकुर ने पैरवी करते हुए तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को पूरी तरह कथित साजिश के आधार पर दोषी ठहराया गया था और दोषसिद्धि तथा मृत्युदंड की पुष्टि करने वाले निष्कर्षों में गंभीर खामियाँ हैं। गौरतलब है कि यह याचिका गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले के विरुद्ध दाखिल की गई है, जिसमें बरेलवी की दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।

निचली अदालत का फैसला और सजा

18 फरवरी 2022 को अहमदाबाद सेशंस कोर्ट ने इस मामले में 78 आरोपियों में से 49 को दोषी ठहराया था। दोषसिद्ध 49 में से 38 को — जिनमें बरेलवी भी शामिल हैं — मौत की सजा सुनाई गई, जबकि शेष 11 को आजीवन कारावास की सजा दी गई। 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इसके पश्चात गुजरात सरकार ने उच्च न्यायालय में 38 दोषियों की सजा के क्रियान्वयन की माँग की थी।

2008 के धमाकों की पृष्ठभूमि

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद के कई स्थानों पर एक के बाद एक विस्फोट हुए थे, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए। इस मामले में व्यापक जाँच के आधार पर 35 एफआईआर दर्ज की गईं और 548 आरोप-पत्र दाखिल किए गए। हजारों सबूतों और 1,163 गवाहों की जाँच के बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला लगभग 7,000 पृष्ठों का था, जबकि पूरी केस फाइल में लगभग 7.88 लाख पृष्ठ थे — जो इसे देश के सर्वाधिक जटिल आतंकवाद मुकदमों में से एक बनाता है।

आरोपियों का भौगोलिक विस्तार और कानूनी धाराएँ

इस मामले के आरोपी देश के नौ राज्यों — गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और झारखंड — से थे। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से संबंधित अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और शस्त्र अधिनियम समेत कई कानूनों के तहत मुकदमा चलाया गया।

आगे की कानूनी स्थिति

फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने बरेलवी की मौत की सजा पर अंतरिम रोक बरकरार रखते हुए गुजरात सरकार और अन्य प्रतिवादियों से जवाब माँगा है। यह मामला ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया है, जब देश में मृत्युदंड के मामलों की न्यायिक समीक्षा को लेकर विधिक बहस तेज हो रही है। अगली सुनवाई की तारीख अभी निर्धारित होनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

163 गवाहों के बाद भी यदि शीर्ष अदालत दोषसिद्धि के आधारों पर पुनर्विचार के लिए तैयार है, तो यह न केवल बरेलवी बल्कि उन शेष 37 दोषियों के लिए भी नई उम्मीद खोलता है जिन्हें मौत की सजा दी गई है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस तथ्य को नजरअंदाज करती है कि 'साजिश के आधार पर दोषसिद्धि' की चुनौती — यदि स्वीकार की गई — तो पूरे मामले की नींव हिला सकती है। पीड़ित परिवारों के लिए यह अनिश्चितता का एक और अध्याय है।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने बरेलवी की फांसी पर रोक क्यों लगाई?
सर्वोच्च न्यायालय ने बरेलवी की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक का आदेश दिया। याचिका में गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें उनकी दोषसिद्धि और मृत्युदंड बरकरार रखा गया था। अदालत ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में क्या हुआ था?
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद के कई स्थानों पर एक के बाद एक बम विस्फोट हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हुए। मामले में 35 एफआईआर, 548 आरोप-पत्र और 1,163 गवाहों के बयान दर्ज हुए।
अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में अब तक क्या सजा हुई है?
18 फरवरी 2022 को अहमदाबाद सेशंस कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया, जिनमें से 38 को मौत की सजा और 11 को आजीवन कारावास दिया गया। 29 आरोपियों को बरी किया गया था।
बरेलवी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में क्या तर्क दिया?
अधिवक्ता आशुतोष ठाकुर ने तर्क दिया कि बरेलवी को पूरी तरह कथित साजिश के आधार पर दोषी ठहराया गया और दोषसिद्धि तथा मृत्युदंड की पुष्टि करने वाले निष्कर्षों में गंभीर खामियाँ हैं। उन्होंने दोनों — दोषसिद्धि और सजा — को चुनौती दी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। जवाब मिलने के बाद मामले की अगली सुनवाई होगी, तब तक बरेलवी की फांसी पर अंतरिम रोक बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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