अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट 2008: सुप्रीम कोर्ट ने बरेलवी की फांसी पर लगाई रोक, गुजरात सरकार को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर 2026 को 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में मौत की सजा पाए दोषी अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की फांसी पर अंतरिम रोक लगा दी। न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली बरेलवी की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर गुजरात सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब माँगा है।
पीठ और सुनवाई का विवरण
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की विशेष तीन-सदस्यीय पीठ ने यह अंतरिम आदेश पारित किया। बरेलवी की ओर से अधिवक्ता आशुतोष ठाकुर ने पैरवी करते हुए तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को पूरी तरह कथित साजिश के आधार पर दोषी ठहराया गया था और दोषसिद्धि तथा मृत्युदंड की पुष्टि करने वाले निष्कर्षों में गंभीर खामियाँ हैं। गौरतलब है कि यह याचिका गुजरात उच्च न्यायालय के उस फैसले के विरुद्ध दाखिल की गई है, जिसमें बरेलवी की दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था।
निचली अदालत का फैसला और सजा
18 फरवरी 2022 को अहमदाबाद सेशंस कोर्ट ने इस मामले में 78 आरोपियों में से 49 को दोषी ठहराया था। दोषसिद्ध 49 में से 38 को — जिनमें बरेलवी भी शामिल हैं — मौत की सजा सुनाई गई, जबकि शेष 11 को आजीवन कारावास की सजा दी गई। 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इसके पश्चात गुजरात सरकार ने उच्च न्यायालय में 38 दोषियों की सजा के क्रियान्वयन की माँग की थी।
2008 के धमाकों की पृष्ठभूमि
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद के कई स्थानों पर एक के बाद एक विस्फोट हुए थे, जिनमें 56 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक लोग घायल हुए। इस मामले में व्यापक जाँच के आधार पर 35 एफआईआर दर्ज की गईं और 548 आरोप-पत्र दाखिल किए गए। हजारों सबूतों और 1,163 गवाहों की जाँच के बाद ट्रायल कोर्ट का फैसला लगभग 7,000 पृष्ठों का था, जबकि पूरी केस फाइल में लगभग 7.88 लाख पृष्ठ थे — जो इसे देश के सर्वाधिक जटिल आतंकवाद मुकदमों में से एक बनाता है।
आरोपियों का भौगोलिक विस्तार और कानूनी धाराएँ
इस मामले के आरोपी देश के नौ राज्यों — गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और झारखंड — से थे। उन पर भारतीय दंड संहिता (IPC), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से संबंधित अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और शस्त्र अधिनियम समेत कई कानूनों के तहत मुकदमा चलाया गया।
आगे की कानूनी स्थिति
फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने बरेलवी की मौत की सजा पर अंतरिम रोक बरकरार रखते हुए गुजरात सरकार और अन्य प्रतिवादियों से जवाब माँगा है। यह मामला ऐसे समय में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष आया है, जब देश में मृत्युदंड के मामलों की न्यायिक समीक्षा को लेकर विधिक बहस तेज हो रही है। अगली सुनवाई की तारीख अभी निर्धारित होनी बाकी है।