इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बबलू राय की 2017 हत्या मामले में दोषसिद्धि पर लगाई रोक, जमानत मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नंदलाल राय उर्फ बबलू राय को 2017 के हत्या मामले में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा पर 5 अक्टूबर 2026 को रोक लगा दी और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एक आम नागरिक के आजीविका के अधिकार का महत्व किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
बबलू राय को एक हत्या मामले में निचली अदालत ने दोषी ठहराया था। यह मामला एक मुखबिर के पिता की हत्या से संबंधित है, जिनकी शाम करीब 7:30 बजे बाजार से घर लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राय के अधिवक्ता ने दोषसिद्धि को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) में उनका नाम नहीं था और FIR दर्ज होने के करीब 17 दिन बाद ही उनकी कथित संलिप्तता सामने आई। 2026 में दायर इस आपराधिक अपील पर उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
उच्च न्यायालय का तर्क
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि 2026 में दायर अपील पर निकट भविष्य में सुनवाई होने की संभावना नहीं है। पीठ ने यह भी माना कि यदि कार्यवाही लंबित रहने के दौरान दोषसिद्धि बनी रही, तो अपीलकर्ता के साथ अन्याय हो सकता है और इसके परिणाम अपरिवर्तनीय हो सकते हैं। इसी आधार पर दोषसिद्धि एवं सजा पर रोक उचित मानी गई।
पीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के अफजल अंसारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2024) के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें दोषसिद्धि को निलंबित करने के मापदंड निर्धारित किए गए थे। उच्च न्यायालय ने दर्ज किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई अवसरों पर जन प्रतिनिधियों की दोषसिद्धि पर रोक लगाई है, क्योंकि ऐसी दोषसिद्धि चुनाव लड़ने की क्षमता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है।
जमानत की शर्तें
उच्च न्यायालय ने बबलू राय को व्यक्तिगत मुचलका और दो जमानतदार प्रस्तुत करने पर रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही, पीठ ने कड़ी शर्तें भी लगाई हैं — जमानत पर रहते हुए वे न्यायालय की अनुमति के बिना अपने नाम की किसी भी अचल संपत्ति का हस्तांतरण, विक्रय या अन्य प्रकार से निपटान नहीं कर सकते। रिहाई के एक महीने के भीतर जुर्माने का 50 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य है, जबकि शेष राशि अपील के अंतिम निर्णय तक निलंबित रहेगी।
राजनीतिक पहलू
गौरतलब है कि बबलू राय ने दोषसिद्धि से पूर्व खुद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का सक्रिय कार्यकर्ता बताया था। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में या BJP के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की थी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों पर न्यायिक रुख एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
आगे की राह
अपील पर अंतिम सुनवाई होने तक बबलू राय की दोषसिद्धि और सजा निलंबित रहेगी। न्यायालय ने अपील के शीघ्र निस्तारण का कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं किया है, जिससे यह मामला 2027 के विधानसभा चुनाव तक लंबित रह सकता है। यह निर्णय उन मामलों के लिए एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है जहाँ लंबित अपीलों के दौरान दोषसिद्धि की राहत की माँग की जाती है।