कर्नाटक हाईकोर्ट ने BJP नेता हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की अपील पर CBI से जवाब तलब किया

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने BJP नेता हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की अपील पर CBI से जवाब तलब किया

सारांश

कर्नाटक हाईकोर्ट में BJP नेता योगेश गौड़ा हत्याकांड की गूँज एक बार फिर सुनाई दी। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली अपील पर CBI से जवाब माँगा गया है। 2016 की यह हत्या, एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की हिंसक परिणति थी जिसने कर्नाटक की राजनीति को हिला दिया था।

मुख्य बातें

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 7 मई को पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की अपील याचिका पर CBI से जवाब माँगा।
BJP नेता योगेश गौड़ा की हत्या 15 जून 2016 को धारवाड़ के एक जिम में हुई थी।
दोषसिद्धि के बाद 15 अप्रैल को कुलकर्णी का विधायक पद रद्द कर दिया गया।
मामले की अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित है; पुलिस अधिकारी टिंगारिकर की याचिका पर सुनवाई 14 मई को होगी।
आरोपी चंद्रशेखर इंडी ने भी अलग से अपील दायर की है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन खंडपीठ ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और जिला पंचायत सदस्य योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में पूर्व कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी की अपील याचिका पर 7 मई को अभियोजन पक्ष से जवाब माँगा। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई तक के लिए स्थगित कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

15 जून 2016 को धारवाड़ शहर के एक जिम में योगेश गौड़ा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। गौड़ा ने कुलकर्णी को राजनीतिक चुनौती दी थी, और यह प्रतिद्वंद्विता हिंसक परिणति को पहुँची। राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। आरोपों के सामने आने के समय कुलकर्णी मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री के पद पर कार्यरत थे।

दोषसिद्धि और विधायक पद का रद्द होना

कुलकर्णी को 2020 में गिरफ्तार किया गया और 2021 में जमानत पर रिहा किया गया। बाद में उन पर गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगा, जिसके बाद CBI ने जमानत शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनकी जमानत रद्द करने की माँग की। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए जमानत रद्द कर दी। दोषसिद्धि के बाद 15 अप्रैल को उनका विधायक पद भी रद्द कर दिया गया। मामले में उन्हें अभियुक्त संख्या 15 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

हाईकोर्ट में सुनवाई का घटनाक्रम

यह मामला न्यायमूर्ति सचिन शंकर मगदुम और न्यायमूर्ति राजेश राय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष आया। कुलकर्णी ने आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने और जमानत की माँग की है। CBI के वकील ने याचिका पर आपत्तियाँ दर्ज करने के लिए अतिरिक्त समय माँगा, जिसे पीठ ने स्वीकार करते हुए सुनवाई 26 मई तक स्थगित कर दी।

अन्य अभियुक्तों की स्थिति

इसी मामले में एक अन्य आरोपी चंद्रशेखर इंडी ने भी अपील दायर की है। सात वर्ष की कैद की सजा पाए पुलिस सर्कल इंस्पेक्टर चन्नाकेशवा टिंगारिकर के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल पर केवल जमानती अपराधों का आरोप है, इसलिए उन्हें कारावास की सजा नहीं दी जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार, पीठ ने टिंगारिकर की याचिका पर अलग से सुनवाई का निर्णय लेते हुए उनका मामला 14 मई तक के लिए स्थगित किया।

आगे क्या होगा

अब सभी पक्षों की निगाहें 26 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जब CBI अपनी आपत्तियाँ दर्ज करेगी और अदालत यह तय करेगी कि आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगाई जाए या नहीं। यह मामला कर्नाटक में राजनीतिक हिंसा और न्यायिक जवाबदेही के व्यापक प्रश्नों को एक बार फिर सामने ला रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मामले को अंतिम फैसले तक पहुँचने में लगभग नौ वर्ष लगे। CBI जाँच का स्थानांतरण और जमानत रद्द होने की पूरी प्रक्रिया यह दर्शाती है कि बिना बाहरी दबाव के जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना कठिन है। अब जब मामला उच्च न्यायालय में है, तो असली परीक्षा यह होगी कि क्या अपील प्रक्रिया न्याय को आगे बढ़ाती है या विलंब का एक और अध्याय बन जाती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विनय कुलकर्णी कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
विनय कुलकर्णी कर्नाटक के पूर्व कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री हैं, जिन्हें BJP नेता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में दोषी पाया गया है। उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है और दोषसिद्धि के बाद 15 अप्रैल को उनका विधायक पद भी रद्द कर दिया गया।
योगेश गौड़ा की हत्या कब और कहाँ हुई थी?
योगेश गौड़ा की हत्या 15 जून 2016 को धारवाड़ शहर के एक जिम में हुई थी। वे BJP के नेता और जिला पंचायत सदस्य थे, जिन्होंने कुलकर्णी को राजनीतिक चुनौती दी थी।
कर्नाटक हाईकोर्ट में अगली सुनवाई कब होगी?
कुलकर्णी की अपील याचिका पर अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित है, जब CBI अपनी आपत्तियाँ दर्ज करेगी। पुलिस अधिकारी चन्नाकेशवा टिंगारिकर की याचिका पर अलग सुनवाई 14 मई को होगी।
इस मामले की जाँच CBI को क्यों सौंपी गई?
मामले की संवेदनशीलता और आरोपियों के राजनीतिक रसूख को देखते हुए कर्नाटक राज्य सरकार ने जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी। CBI ने बाद में जमानत शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कुलकर्णी की जमानत रद्द कराई।
क्या इस मामले में अन्य आरोपी भी हैं?
हाँ, इस मामले में कई आरोपी हैं। चंद्रशेखर इंडी ने भी अपील दायर की है, जबकि पुलिस सर्कल इंस्पेक्टर चन्नाकेशवा टिंगारिकर को सात वर्ष की सजा सुनाई गई है और उनकी याचिका पर अलग से सुनवाई होगी।
राष्ट्र प्रेस
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