23 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: गुजरात हाईकोर्ट ने 38 की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार रखी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: गुजरात हाईकोर्ट ने 38 की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार रखी

सारांश

17 साल बाद न्याय की दिशा में बड़ा कदम — गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार रखी। 56 मौतें, 21 धमाके, 70 मिनट का आतंक — और अब एक ऐतिहासिक फैसला जो सुप्रीम कोर्ट की अगली परीक्षा के लिए तैयार है।

मुख्य बातें

गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को 2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट में 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद बरकरार रखी।
न्यायमूर्ति अल्पेश वाई.
कोग्जे और न्यायमूर्ति समीर जे.
दवे की खंडपीठ ने फरवरी 2022 के विशेष अदालत के फैसले की पुष्टि की।
26 जुलाई 2008 को 70 मिनट में 21 धमाके , 56 मौतें और 200 से अधिक घायल ।
मारे गए 56 पीड़ितों के परिजनों को ₹10-10 लाख और 200 से अधिक घायलों को ₹1-1 लाख मुआवजे का आदेश।
दोषियों के पास अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील का कानूनी अधिकार उपलब्ध है।

गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को 2008 अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजाओं को पूर्णतः बरकरार रखा। अदालत ने 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की आजीवन कारावास की सजा की पुष्टि करते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं। यह फैसला भारत के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक के न्यायिक निपटारे की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

मुख्य घटनाक्रम

न्यायमूर्ति अल्पेश वाई. कोग्जे और न्यायमूर्ति समीर जे. दवे की खंडपीठ ने विशेष अदालत के फरवरी 2022 के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें 49 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था और 28 अन्य को बरी किया गया था। मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार, निचली अदालत द्वारा सुनाई गई प्रत्येक फांसी की सजा को लागू करने से पहले हाईकोर्ट की अनिवार्य पुष्टि आवश्यक होती है।

विशेष अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी थी, जबकि गुजरात सरकार ने फांसी की सजाओं की पुष्टि के लिए अलग से याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई के बाद मंगलवार को अपना फैसला सुनाया।

पीड़ितों को मुआवजे का निर्देश

अदालत ने सजाओं की पुष्टि के साथ-साथ पीड़ितों के लिए मुआवजे का भी आदेश दिया। हमलों में मारे गए 56 लोगों के परिजनों को ₹10-10 लाख और 200 से अधिक घायलों को ₹1-1 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। यह राहत उन परिवारों के लिए आंशिक न्याय है, जो डेढ़ दशक से अधिक समय से इस मामले के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे थे।

26 जुलाई 2008 के धमाके: पृष्ठभूमि

यह मामला 26 जुलाई 2008 की शाम को अहमदाबाद में हुए समन्वित बम विस्फोटों से जुड़ा है। उस दिन करीब 70 मिनट के भीतर 21 धमाके हुए थे — बसों, सार्वजनिक स्थानों और उन दो अस्पतालों में भी, जहाँ पहले के धमाकों के पीड़ितों को उपचार के लिए ले जाया गया था। इन हमलों में 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक लोग घायल हुए।

गौरतलब है कि यह देश की सबसे बड़ी आतंकवाद जाँचों में से एक बनी। पुलिस ने विस्तृत जाँच के बाद 35 एफआईआर दर्ज कीं और सैकड़ों आरोप-पत्र दाखिल किए। विशेष अदालत के समक्ष 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए और हजारों दस्तावेजी व भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

आगे क्या होगा

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोषियों के पास अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार उपलब्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आतंकवाद के मामलों में सजा की दर और न्यायिक प्रक्रिया की गति पर व्यापक बहस जारी है। फांसी की सजाओं को वास्तव में अमल में लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर और राष्ट्रपति की दया-याचिका प्रक्रिया अभी शेष रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि फांसी की सजा अमल में कब आएगी — क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और दया-याचिका प्रक्रिया अभी बाकी है। भारत में आतंकवाद के बड़े मामलों में सजा सुनाए जाने और उसके क्रियान्वयन के बीच का अंतराल अक्सर दशकों में मापा जाता है। 1,100 से अधिक गवाह और हजारों साक्ष्य — यह जाँच अपने आप में एक मिसाल है, लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए ₹10 लाख का मुआवजा डेढ़ दशक की पीड़ा के सामने प्रतीकात्मक ही रहेगा।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 अहमदाबाद ब्लास्ट मामले में क्या फैसला सुनाया?
गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2026 को 38 दोषियों की फांसी की सजा और 11 दोषियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी। अदालत ने सभी अपीलें खारिज करते हुए फरवरी 2022 के विशेष अदालत के फैसले की पुष्टि की।
26 जुलाई 2008 के अहमदाबाद बम धमाके क्या थे?
26 जुलाई 2008 की शाम अहमदाबाद में करीब 70 मिनट के भीतर 21 समन्वित बम धमाके हुए थे। ये धमाके बसों, सार्वजनिक स्थानों और दो अस्पतालों में हुए, जिनमें 56 लोगों की मौत हुई और 200 से अधिक घायल हुए।
क्या अब भी दोषी इस फैसले को चुनौती दे सकते हैं?
हाँ, दोषियों के पास अब सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार है। इसके अलावा, फांसी की सजा लागू होने से पहले राष्ट्रपति के समक्ष दया-याचिका दायर करने का भी विकल्प उपलब्ध है।
पीड़ितों और उनके परिजनों को क्या मुआवजा मिलेगा?
हाईकोर्ट ने हमलों में मारे गए 56 लोगों के परिजनों को ₹10-10 लाख और 200 से अधिक घायलों को ₹1-1 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
इस मामले की जाँच और सुनवाई कितनी लंबी चली?
2008 के धमाकों के बाद पुलिस ने 35 एफआईआर दर्ज कीं और यह देश की सबसे बड़ी आतंकवाद जाँचों में से एक बनी। विशेष अदालत के समक्ष 1,100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज हुए और फरवरी 2022 में फैसला आया, जिसे अब हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले