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एम्स राजकोट बना सौराष्ट्र का मेडिकल हब: ₹10 में परामर्श, 8.5 लाख मरीजों को मिला मुफ्त सुपर स्पेशियलिटी इलाज

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एम्स राजकोट बना सौराष्ट्र का मेडिकल हब: ₹10 में परामर्श, 8.5 लाख मरीजों को मिला मुफ्त सुपर स्पेशियलिटी इलाज

सारांश

सौराष्ट्र के मरीजों को अब अहमदाबाद नहीं जाना पड़ता — एम्स राजकोट ने यह बदल दिया। ₹10 के कार्ड पर साल भर परामर्श, 2025 में 1,927 ऑपरेशन और 8.5 लाख से अधिक मरीजों के भरोसे के साथ, यह संस्थान गुजरात के वंचित वर्ग के लिए सच्ची 'संजीवनी' बन चुका है।

मुख्य बातें

एम्स राजकोट में 22 स्पेशियलिटी और 6 सुपर स्पेशियलिटी सेवाएँ एक ही परिसर में उपलब्ध हैं।
मात्र ₹10 के पंजीकरण पर पूरे वर्ष किसी भी विभाग में परामर्श; दुर्घटना मरीजों को पहले 24 घंटे निःशुल्क उपचार।
वर्ष 2024 में 861 से बढ़कर 2025 में 1,927 ऑपरेशन ; प्रतिमाह लगभग 180 क्रिटिकल सर्जरी ।
अब तक 8.5 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित; द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़ के मरीजों को अहमदाबाद जाने की ज़रूरत नहीं।
सी-डैक विकसित EMR प्रणाली से मरीजों का डिजिटल रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध।
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से एमबीबीएस सीटें 50 से बढ़ाकर 75 की गईं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) राजकोट सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए एक व्यापक चिकित्सा केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है, जहाँ एक ही परिसर में 22 स्पेशियलिटी और 6 सुपर स्पेशियलिटी सेवाएँ उपलब्ध हैं। फरवरी 2024 में सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की शुरुआत के बाद से अब तक 8.5 लाख से अधिक मरीज यहाँ इलाज करा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों की है।

संस्थान की स्थापना और विस्तार

200 एकड़ में फैले एम्स राजकोट की आधारशिला दिसंबर 2020 में रखी गई थी। फरवरी 2024 में सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का संचालन शुरू हुआ, जिसके बाद यह संस्थान तेज़ी से क्षेत्र की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बन गया। शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से एमबीबीएस सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 75 कर दी गई है, जो चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थान की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

मुख्य चिकित्सा सुविधाएँ

एम्स राजकोट में मरीजों को मात्र ₹10 का पंजीकरण कार्ड बनवाना होता है, जिसके बाद वे पूरे वर्ष किसी भी विभाग में चिकित्सकों से परामर्श ले सकते हैं। दुर्घटना या अत्यंत गंभीर स्थिति में भर्ती होने वाले मरीजों को पहले 24 घंटे सम्पूर्ण निःशुल्क उपचार दिया जाता है।

अत्याधुनिक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और लाइफ सपोर्ट सिस्टम से सुसज्जित आईसीयू के कारण यहाँ न्यूरोसर्जरी और यूरोलॉजी जैसी जटिल शल्यक्रियाएँ भी संभव हो रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में जहाँ 861 ऑपरेशन हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,927 हो गई। वर्तमान में प्रतिमाह लगभग 180 क्रिटिकल सर्जरी यहाँ की जाती हैं।

निदान सुविधाओं में सीटी स्कैन और 3 टेस्ला एमआरआई सहित सभी डायग्नोस्टिक और प्रयोगशाला परीक्षण किफ़ायती दरों पर उपलब्ध हैं।

तकनीकी नवाचार: डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड

एम्स राजकोट में सी-डैक द्वारा विकसित इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMR) प्रणाली लागू की गई है। इससे मरीजों की पुरानी रिपोर्ट और उपचार इतिहास एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाते हैं — मरीजों को अब कागज़ात लेकर भटकने की ज़रूरत नहीं रहती।

विशेषज्ञ की राय और क्षेत्रीय प्रभाव

एम्स राजकोट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. एल.एन. दोराईराजन ने बताया कि पहले द्वारका, पोरबंदर और जूनागढ़ के मरीजों को उपचार के लिए अहमदाबाद या वडोदरा तक जाना पड़ता था। अब राजकोट में ही सुपर स्पेशियलिटी उपचार उपलब्ध होने से इन ज़िलों के मरीजों की यात्रा और खर्च दोनों में उल्लेखनीय कमी आई है।

मरीज मयूरी मोरजरिया ने बताया कि दाँत के इलाज के लिए यहाँ केवल ₹10 का शुल्क लगता है, जबकि किसी निजी अस्पताल में यही इलाज बहुत महँगा पड़ता। एक अन्य मरीज श्रद्धा ने कहा कि कम खर्च में बेहतर उपचार मिलने के कारण एम्स उनके लिए सर्वश्रेष्ठ अस्पताल है।

आगे की राह

एम्स राजकोट की बढ़ती सर्जरी संख्या, डिजिटल अवसंरचना और विस्तारित एमबीबीएस सीटें यह संकेत देती हैं कि यह संस्थान आने वाले वर्षों में सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ बन सकता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह विस्तार टिकाऊ है। एक वर्ष में सर्जरी की संख्या दोगुनी से अधिक होना क्षमता पर दबाव का संकेत भी हो सकता है — विशेषकर जब एमबीबीएस सीटें बढ़ाई जा रही हों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की राष्ट्रव्यापी कमी एक ज्ञात तथ्य है। ₹10 की पंजीकरण नीति सराहनीय है, परंतु दीर्घकालिक वित्त पोषण और स्टाफिंग मॉडल पर स्पष्टता ज़रूरी है। सौराष्ट्र जैसे वंचित क्षेत्र में यह प्रयोग सफल हुआ तो यह अन्य नए एम्स संस्थानों के लिए एक मानदंड बन सकता है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम्स राजकोट में इलाज कराने के लिए कितना खर्च आता है?
एम्स राजकोट में मात्र ₹10 का पंजीकरण कार्ड बनवाना होता है, जिसके बाद पूरे वर्ष किसी भी विभाग में चिकित्सकों से परामर्श लिया जा सकता है। दुर्घटना या गंभीर स्थिति में भर्ती होने वाले मरीजों को पहले 24 घंटे पूर्णतः निःशुल्क उपचार दिया जाता है।
एम्स राजकोट में कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
एम्स राजकोट में 22 स्पेशियलिटी और 6 सुपर स्पेशियलिटी सेवाएँ उपलब्ध हैं। इनमें न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, सीटी स्कैन, 3 टेस्ला एमआरआई सहित सभी डायग्नोस्टिक और प्रयोगशाला सुविधाएँ शामिल हैं। सी-डैक द्वारा विकसित इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड प्रणाली भी लागू है।
एम्स राजकोट सौराष्ट्र के मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पहले द्वारका, पोरबंदर और जूनागढ़ जैसे ज़िलों के मरीजों को सुपर स्पेशियलिटी इलाज के लिए अहमदाबाद या वडोदरा जाना पड़ता था। एम्स राजकोट के खुलने से अब ये सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो गई हैं, जिससे यात्रा का समय और खर्च दोनों में कमी आई है।
एम्स राजकोट में अब तक कितने मरीजों का इलाज हुआ है?
फरवरी 2024 में सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं की शुरुआत के बाद से एम्स राजकोट 8.5 लाख से अधिक मरीजों का उपचार कर चुका है। वर्ष 2025 में 1,927 ऑपरेशन हुए, जो 2024 के 861 ऑपरेशनों की तुलना में दोगुने से अधिक हैं।
एम्स राजकोट में मेडिकल शिक्षा की क्या स्थिति है?
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 से एम्स राजकोट में एमबीबीएस सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 75 कर दी गई है। यह विस्तार संस्थान की चिकित्सा शिक्षा में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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