अखिलेश यादव का अमित शाह पर पलटवार: 'देश भाषण सुनने के मूड में नहीं, सरकार सत्र खत्म करने को उतावली'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 12 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसदीय गतिरोध संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। लखनऊ से एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर अखिलेश ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार चर्चा से नहीं, बल्कि सत्र की जल्द समाप्ति से दिलचस्पी रखती है। उन्होंने कहा, 'देश भाषण सुनने के मूड में नहीं है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में जारी गतिरोध के बीच विपक्ष से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने देने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को लोकसभा अध्यक्ष को चर्चा के लिए पत्र लिखना चाहिए। शाह ने प्रस्ताव रखा कि सरकार बुधवार दोपहर तीन बजे से रात तक और गुरुवार दोपहर तीन बजे तक भी चर्चा के लिए तैयार है।
शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही NEET मुद्दे पर चर्चा का प्रस्ताव दे चुके हैं।
अखिलेश का पलटवार
इसी बयान पर पलटवार करते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि संसद में जवाब देने के लिए सरकार जो समय-सीमा तय करना चाहती है, वह 'स्वयं में अलोकतांत्रिक है।' उन्होंने कहा कि इस तरह का जवाब वास्तव में जवाब नहीं, बल्कि 'थोथा बयान' होगा।
अखिलेश ने आगे कहा कि जिम्मेदारी और जवाबदेही किसी समय की शर्त से नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व के तर्क से निभाई जाती है। उन्होंने इसे 'भगवान और इंसान दोनों के साथ दुर्व्यवहार व दुर्भावना का बेहद गंभीर मुद्दा' बताया।
सरकार की मंशा पर सवाल
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि BJP वास्तव में किसी भी प्रश्न का उत्तर देने की इच्छुक नहीं है और मौजूदा संसद सत्र को जल्द से जल्द समाप्त करने की कोशिश में है। उनके अनुसार, सरकार की चर्चा की पेशकश केवल एक औपचारिकता है, जिज्ञासा के सतही समाधान की कोशिश।
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र NEET परीक्षा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्षी हंगामे से प्रभावित है। गौरतलब है कि विपक्ष सरकार से सीधे जवाब की माँग पर अड़ा है, जबकि सत्तापक्ष बिना शर्त चर्चा की पेशकश कर रहा है।
आगे क्या
सरकार और विपक्ष के बीच इस जुबानी जंग के बाद संसद में गतिरोध जारी रहने की संभावना है। अब देखना होगा कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष को चर्चा के लिए पत्र लिखता है या सदन में हंगामे का रुख बनाए रखता है। दोनों पक्षों के बीच यह टकराव संसदीय कामकाज की दिशा तय करेगा।