शंकराचार्य अपमान विवाद: अखिलेश यादव बोले — सनातन समाज BJP का 'सत्ता का मद' चूर-चूर करेगा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 29 सितंबर 2026 को लखनऊ से जारी बयान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि सत्ता के अहंकार में सनातन समाज की आस्था और सम्मान को ठेस पहुँचाई जा रही है। उन्होंने शंकराचार्य के कथित अपमान का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि इस व्यवहार की राजनीतिक कीमत BJP को चुकानी पड़ेगी।
मुख्य आरोप और बयान
अखिलेश यादव ने कहा कि एक सार्वजनिक मंच से लाखों-करोड़ों सनातनियों की आस्था के प्रतीक और अत्यंत पूजनीय व्यक्ति के लिए एक 'बेहद आपत्तिजनक शब्द' का इस्तेमाल किया गया। उनके अनुसार, यह घटना इस बात की पुष्टि करती है कि 'सत्ता के अहंकार ने बुद्धि को किस तरह भ्रष्ट कर दिया है।'
सपा अध्यक्ष ने कहा, 'सनातन समाज आज से पहले इतना अधिक अपमानित कभी नहीं हुआ।' उन्होंने जोड़ा कि समाज का हर धर्मप्रधान और विचारशील व्यक्ति अपमान के इस कटु अनुभव से गहरे आहत है।
BJP समर्थकों पर भी निशाना
अखिलेश यादव ने दावा किया कि ऐसे लोग भी अब लज्जित हैं, जिन्होंने BJP का समर्थन करने के लिए अब तक कोई कुतर्क नहीं छोड़ा था। उनके अनुसार, यह टिप्पणी 'संपूर्ण समाज के मान-सम्मान, गरिमा और प्रतिष्ठा को सीधी चुनौती' है। उन्होंने कहा कि 'सत्ता के साथ खड़े उसके संगी-साथी भी अब किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचे हैं।'
राजनीतिक संदर्भ और चेतावनी
गौरतलब है कि अखिलेश यादव ने यह बयान ऐसे समय दिया है जब उत्तर प्रदेश में राजनीतिक माहौल गर्म है और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक मुद्दे चुनावी विमर्श को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 'आज के सत्ताधीश जान रहे हैं कि वे हारने वाले हैं, इसलिए जाते-जाते वे किसी और की संभावना को भी हमेशा के लिए खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।'
सपा प्रमुख ने एक पुरानी कहावत का हवाला देते हुए कहा — 'जो खुद नहीं खा पाता, वह फैलाकर जाता है।' उन्होंने शंकराचार्य के साथ हुए कथित व्यवहार को 'लगातार अपमान' की श्रृंखला बताया और कहा कि इसकी सजा BJP को मिलेगी।
वर्चस्ववाद पर सीधा प्रहार
अखिलेश यादव ने सत्ता के कथित वर्चस्ववाद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 'एक नितांत एकाकी और घोर वर्चस्ववादी का घमंड अपने सिवा किसी को कुछ नहीं मानता।' सपा अध्यक्ष ने अपने बयान का समापन तीखे शब्दों के साथ किया — 'दंभ के दिन लद गए।'
यह ऐसे समय में आया है जब धार्मिक नेताओं के सम्मान और सनातन परंपरा के मुद्दे पर राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस चल रही है। अब देखना होगा कि BJP इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह विवाद व्यापक राजनीतिक असर छोड़ता है।