दशहरा पर अक्षरधाम में 'विश्व शांति महायज्ञ': 30 संतों ने 108 यज्ञकुंडों में दी आहुति
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर में विजयदशमी, 20 अक्टूबर 2026 को 'विश्व शांति महायज्ञ' का भव्य आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें देश-विदेश के विभिन्न मंदिरों से पधारे 30 संतों-महंतों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विश्व कल्याण की प्रार्थना की। 108 यज्ञकुंडों में पवित्र आहुतियाँ अर्पित की गईं और हज़ारों श्रद्धालुओं ने यजमान के रूप में इस अनुष्ठान में भागीदारी की। बुराई पर अच्छाई की विजय के इस पर्व पर संपूर्ण विश्व में शांति, एकता और सद्भाव की कामना की गई।
महायज्ञ का आयोजन और वातावरण
प्रातः 6:00 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। पूरे अक्षरधाम परिसर को रंगोली और ध्वज-पताकाओं से सुसज्जित किया गया था। आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों सहित हज़ारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
परंपरा की पृष्ठभूमि
बीएपीएस (BAPS) संस्था के प्रमुख गुरुहरि महंत परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने इस विश्व शांति यज्ञ की परंपरा का सूत्रपात किया था। तब से प्रतिवर्ष दशहरे के अवसर पर अक्षरधाम परिसर में यह महायज्ञ आयोजित होता आ रहा है। गौरतलब है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वैश्विक शांति की सामूहिक प्रार्थना का प्रतीक है।
गुरुजी का संदेश
इस अवसर पर महंत स्वामी महाराज का संदेश दोहराया गया, जिसमें कहा गया कि विश्व में जहाँ कहीं भी युद्ध, हिंसा और अराजकता का माहौल है, वह शीघ्र समाप्त हो। उनकी प्रार्थना थी कि सभी लोग प्रेम, सद्भाव और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत करें तथा श्रद्धा, भक्ति और निष्ठा का प्रसार हो।
श्रद्धालुओं का संकल्प
उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने अपने जीवन से नकारात्मकता, अहंकार और घृणा को त्यागकर सकारात्मकता अपनाने का संकल्प लिया। उन्होंने न केवल अपने लिए, बल्कि संपूर्ण विश्व में शांति और बंधुता के प्रसार की कामना की। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भारत की आध्यात्मिक परंपरा वैश्विक सुख-शांति की कामना को अपने केंद्र में रखती है।