उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती, 'जय श्री महाकाल' के जयकारों से गूंजा परिसर
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन स्थित विश्वप्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में रविवार, 24 मई को बाबा महाकाल की दिव्य भस्म आरती संपन्न हुई, जिसमें देश-विदेश से आए हज़ारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। भोर से ही लंबी कतारों में खड़े भक्तों ने 'जय श्री महाकाल' के जयकारों के साथ इस अलौकिक अनुष्ठान का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।
कपाट खुलने से लेकर अभिषेक तक का क्रम
परंपरागत विधि के अनुसार, सुबह भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही पूरे मंदिर परिसर में शंखध्वनि, घंटियों की टंकार और मंत्रोच्चार का पवित्र वातावरण बन गया।
सबसे पहले भगवान को हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से निर्मित पंचामृत से बाबा महाकाल का दिव्य अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के प्रत्येक चरण में मंत्रोच्चार अनवरत जारी रहा।
भस्म आरती और महानिर्वाणी अखाड़े की भूमिका
अभिषेक के उपरांत बाबा महाकाल का मनमोहक और अलौकिक शृंगार किया गया। तत्पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई — यही भस्म आरती का केंद्रीय और सर्वाधिक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इस दौरान भगवान महाकाल 'निराकार से साकार' रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के इस अद्वितीय स्वरूप के दर्शन कर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
भस्म आरती के पश्चात मंदिर के पुजारियों ने महाआरती संपन्न कराई, जिसमें श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ उमड़ी।
'निराकार से साकार' का आध्यात्मिक अर्थ
बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' रूप का गहरा दार्शनिक अर्थ है। यह शिव के उस आध्यात्मिक रूपांतरण को दर्शाता है जिसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा (निराकार) भक्तों के कल्याण हेतु एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप (साकार) में प्रकट होते हैं। भस्म आरती इसी दिव्य अनुभूति का प्रत्यक्ष माध्यम मानी जाती है।
अधिकमास में विशेष महत्व
इस वर्ष अधिकमास के पावन योग में बाबा महाकाल के दर्शन का महत्व और भी बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास में महाकालेश्वर के दर्शन का पुण्य कई गुना अधिक होता है, यही कारण है कि इस अवधि में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक रहती है।
देश-विदेश से उमड़े श्रद्धालु
भस्म आरती के दर्शन के लिए श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर लंबी कतारों में खड़े नज़र आए। आम भक्तों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों की著名 हस्तियाँ भी समय-समय पर इस पवित्र आरती में सम्मिलित होती रहती हैं। महाकालेश्वर मंदिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उज्जैन की धार्मिक पहचान का केंद्र है। आने वाले दिनों में अधिकमास के चलते श्रद्धालुओं की यह आस्था की धारा निरंतर प्रवाहित रहने की संभावना है।