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अमरनाथ यात्रा मार्ग के लिए ₹3,500 करोड़ की सड़क DPR, जम्मू-कश्मीर में ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति

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अमरनाथ यात्रा मार्ग के लिए ₹3,500 करोड़ की सड़क DPR, जम्मू-कश्मीर में ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति

सारांश

अमरनाथ यात्रा मार्ग के लिए ₹3,500 करोड़ की DPR महज एक सड़क नहीं — यह जम्मू-कश्मीर को तीर्थ, पर्यटन और रक्षा तीनों मोर्चों पर जोड़ने की महत्वाकांक्षी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें ₹50,000 करोड़ के हाई-स्पीड कॉरिडोर से लेकर 54 रोपवे परियोजनाएँ तक शामिल हैं।

मुख्य बातें

अमरनाथ यात्रा मार्ग पर 60 किलोमीटर सड़क के लिए ₹3,500 करोड़ की DPR तैयार की जा रही है।
कटरा इंटरमॉडल स्टेशन ₹880 करोड़ की लागत से बनेगा, जो रेल, सड़क और हेली-सर्विस को एकीकृत करेगा।
54 रोपवे परियोजनाओं के प्रस्ताव ( ₹30,000 करोड़ ); पहले चरण में ₹16,000 करोड़ की 8 परियोजनाएँ शामिल।
₹50,000 करोड़ के 4 हाई-स्पीड कॉरिडोर निर्माणाधीन; दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का J&K हिस्सा अगस्त 2027 तक पूरा होने की उम्मीद।
जोजिला टनल के 2028 के अंत तक चालू होने की उम्मीद; केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ब्रेकथ्रू ब्लास्ट किया।
अगले चरण में 707 किलोमीटर हाईवे की DPR, लागत ₹65,000 करोड़ अनुमानित।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा की अध्यक्षता में 17 जून 2026 को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में खुलासा किया गया कि सरकार अमरनाथ यात्रा मार्ग पर 60 किलोमीटर लंबे सड़क प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रही है, जिसकी अनुमानित लागत ₹3,500 करोड़ है। यह परियोजना जम्मू-कश्मीर में तीर्थयात्रा और पर्यटन बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की व्यापक योजना का अहम हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि ₹880 करोड़ की लागत से कटरा इंटरमॉडल स्टेशन विकसित किया जा रहा है, जो श्री माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं के लिए रेल, सड़क और हेली-सर्विस को एकीकृत करेगा। इसके अलावा, ₹30,000 करोड़ की लागत वाली 54 रोपवे परियोजनाओं के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से पहले चरण में ₹16,000 करोड़ की आठ परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें 3,880 मीटर ऊँची अमरनाथ गुफा, शंकराचार्य मंदिर, थाजिवास ग्लेशियर, भद्रवाह, सनासर और दूधपथरी जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं।

हाई-स्पीड कॉरिडोर और एक्सप्रेसवे

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ₹50,000 करोड़ की लागत से चार हाई-स्पीड कॉरिडोर निर्माणाधीन हैं — जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर, जम्मू-चेन्नानी-अनंतनाग, श्रीनगर-बारामूला-उरी और जम्मू-अखनूर। ये परियोजनाएँ कश्मीर घाटी, चिनाब घाटी, राजौरी-पुंछ, उत्तर कश्मीर और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँच को बेहतर बनाएँगी, जिससे पर्यटन, व्यापार और रक्षा गतिशीलता को बल मिलेगा।

670 किलोमीटर लंबा दिल्ली-अमृतसर-कटरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे ₹41,000 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के भीतर इसके 143 किलोमीटर हिस्से (₹11,500 करोड़) का काम अगस्त 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे दिल्ली-कटरा की दूरी 58 किलोमीटर कम हो जाएगी।

रिंग रोड और शहरी कनेक्टिविटी

₹7,200 करोड़ की लागत से 104 किलोमीटर लंबी श्रीनगर रिंग रोड शहर के यातायात को सुगम बनाएगी और बारामूला, कुपवाड़ा, बांदीपोरा, गुरेज, कारगिल और लेह से कनेक्टिविटी बढ़ाएगी। वहीं, 58 किलोमीटर लंबी जम्मू रिंग रोड लगभग पूरी हो चुकी है — 53 किलोमीटर पहले ही चालू है — जबकि 33 किलोमीटर पूर्वी जम्मू रिंग रोड की DPR पर काम जारी है।

अगले चरण की योजना

अधिकारियों के अनुसार, अगले चरण में 707 किलोमीटर हाईवे परियोजनाओं की DPR तैयार की जाएगी, जिनकी अनुमानित लागत ₹65,000 करोड़ है। इनमें 125 किलोमीटर कटरा-श्रीनगर हाई-स्पीड कॉरिडोर, रफियाबाद-कुपवाड़ा-तंगधार मार्ग (सधना टनल सहित), सुरनकोट-बफलियाज-दूधपथरी-मगाम कॉरिडोर (पीर की गली टनल सहित), सांबा-मानसर-उधमपुर फोर लेन, श्रीनगर-सोनमर्ग-गुमरी कॉरिडोर और श्रीनगर-काजीगुंड सेक्शन पर नए सर्विस रोड और अंडरपास शामिल हैं।

जोजिला टनल और वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में जोजिला टनल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने टनल का ब्रेकथ्रू ब्लास्ट शुरू किया। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी उनके साथ मौजूद रहे। जोजिला टनल के 2028 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है, जो लद्दाख को सालभर देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन DPR और निर्माण के बीच की खाई भारत के पहाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर इतिहास में चौड़ी रही है। ₹65,000 करोड़ की 707 किलोमीटर परियोजनाओं की DPR 'अगले चरण' में है — यानी अभी तक कागज़ पर ही है। असली परीक्षा भूगोल, मौसम और सुरक्षा की जटिलताओं के बीच समयसीमा पर खरा उतरने की होगी, जो इस क्षेत्र में पहले भी कई परियोजनाओं को पीछे धकेल चुकी हैं। अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी दर्शन के लिए बेहतर कनेक्टिविटी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए वरदान होगी — बशर्ते घोषणाएँ समयबद्ध क्रियान्वयन में बदलें।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरनाथ यात्रा मार्ग के लिए ₹3,500 करोड़ की परियोजना क्या है?
यह 60 किलोमीटर लंबे अमरनाथ यात्रा मार्ग के लिए तैयार की जा रही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) है, जिसकी अनुमानित लागत ₹3,500 करोड़ है। इसका उद्देश्य तीर्थयात्रियों के लिए सड़क बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना है।
कटरा इंटरमॉडल स्टेशन क्या है और इसका क्या महत्व है?
कटरा इंटरमॉडल स्टेशन ₹880 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा है, जो श्री माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं के लिए रेल, सड़क और हेली-सर्विस को एक ही स्थान पर एकीकृत करेगा। यह तीर्थयात्रियों के अनुभव को सुगम और सुरक्षित बनाएगा।
जम्मू-कश्मीर में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएँ कौन-कौन सी हैं?
कुल 54 रोपवे परियोजनाओं के प्रस्ताव मिले हैं, जिनकी कुल लागत ₹30,000 करोड़ है। पहले चरण में ₹16,000 करोड़ की 8 परियोजनाएँ ली जाएँगी, जिनमें अमरनाथ गुफा, शंकराचार्य मंदिर, थाजिवास ग्लेशियर, भद्रवाह, सनासर और दूधपथरी शामिल हैं।
दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे कब तक पूरा होगा?
670 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की कुल लागत ₹41,000 करोड़ है। जम्मू-कश्मीर के भीतर 143 किलोमीटर का हिस्सा ( ₹11,500 करोड़ ) अगस्त 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे दिल्ली-कटरा दूरी 58 किलोमीटर घटेगी।
जोजिला टनल कब तक चालू होगी और इसका क्या असर होगा?
जोजिला टनल के 2028 के अंत तक चालू होने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इसका ब्रेकथ्रू ब्लास्ट किया; उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। यह टनल लद्दाख को सालभर देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी।
राष्ट्र प्रेस
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