अंबेडकर विकास निगम में ₹14.95 करोड़ का घोटाला: BJP ने राहुल गांधी से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 16 अक्टूबर 2026 को डॉ. बी.आर. अंबेडकर विकास निगम (ADCL) में ₹14.95 करोड़ से अधिक के वित्तीय घोटाले का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सीधा जवाब माँगते हुए दावा किया कि दलित कल्याण के लिए आवंटित सरकारी धन को फर्जी दस्तावेजों के ज़रिये हड़पा गया।
घोटाले का मुख्य घटनाक्रम
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बेंगलुरु ज़ोनल कार्यालय ने 14 अक्टूबर 2026 को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में खुलासा किया कि जाली दस्तावेजों और गलत पहचान का इस्तेमाल करके स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की HAL 2 स्टेज शाखा, बेंगलुरु में ADCL के नाम पर एक फर्जी चालू खाता खोला गया था। इसके बाद जाली TDR/FDR दस्तावेजों और फर्जी प्री क्लोजर पत्रों का उपयोग कर निगम की ₹5 5 करोड़ की चार फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पहले बंद करा दी गईं, जिससे कुल ₹14.95 करोड़ का गबन हुआ।
ED ने इस मामले में बेंगलुरु की स्पेशल कोर्ट (PMLA) में अयूब सैयद सहित 5 आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त अभियोजन शिकायत दायर की है। यह जाँच CBI और ACB, बेंगलुरु द्वारा IPC तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी।
BJP की प्रतिक्रिया और राहुल गांधी पर निशाना
आर. अशोक ने अपनी एक्स पोस्ट में कहा कि एक ओर राहुल गांधी देशभर में सामाजिक न्याय के उपदेश देते हैं, वहीं दूसरी ओर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए आवंटित धनराशि को व्यवस्थित तरीके से लूटने में लगी है। उन्होंने कहा, 'क्या इसी को राहुल गांधी "न्याय" कहते हैं?'
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता ने यह भी आरोप लगाया कि पहले महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में ₹187 करोड़ की कथित लूट हुई और अब अंबेडकर के नाम पर स्थापित निगम में भी इसी तरह की धोखाधड़ी सामने आई है। उन्होंने माँग की कि राहुल गांधी कर्नाटक की जनता को जवाब दें।
दलित कल्याण कोष पर उठे सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से ही वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर विपक्ष के निशाने पर है। गौरतलब है कि ADCL की स्थापना मूलतः दलित समुदायों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए की गई थी। आलोचकों का कहना है कि ऐसे निगमों में बार बार होने वाली वित्तीय अनियमितताएँ संस्थागत निगरानी की कमज़ोरियों को उजागर करती हैं।
आर. अशोक ने कहा कि कर्नाटक भाजपा तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक इन घोटालों में शामिल हर एक व्यक्ति को सजा नहीं मिल जाती और पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हो जाती।
कानूनी कार्यवाही की स्थिति
ED ने स्पष्ट किया है कि ₹14.95 करोड़ की यह राशि PMLA, 2002 के तहत 'अपराध से प्राप्त आय' की श्रेणी में आती है। मामले में आगे की जाँच जारी है और विशेष अदालत में अभियोजन प्रक्रिया चल रही है।
इस मामले में कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में सत्तारूढ़ दल का जवाब और अदालत में मामले की सुनवाई इस राजनीतिक विवाद की दिशा तय करेगी।