16 अक्टूबर 2026
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अंबेडकर विकास निगम में ₹14.95 करोड़ की धोखाधड़ी: ईडी की कार्रवाई, भाजपा ने कांग्रेस सरकार को घेरा

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अंबेडकर विकास निगम में ₹14.95 करोड़ की धोखाधड़ी: ईडी की कार्रवाई, भाजपा ने कांग्रेस सरकार को घेरा

सारांश

कर्नाटक में अनुसूचित जाति कल्याण के लिए निर्धारित ₹14.95 करोड़ की कथित लूट — फर्जी खाते, जाली दस्तावेज, पहचान की धोखाधड़ी। ईडी ने पाँच आरोपियों पर पूरक शिकायत दर्ज की; भाजपा ने इसे राज्य में कांग्रेस शासन में वित्तीय अराजकता की एक और मिसाल बताया।

मुख्य बातें

अंबेडकर विकास निगम (एडीसीएल) से ₹14.95 करोड़ की कथित धोखाधड़ी में फर्जी बैंक खाते और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
ईडी ने 5 अक्टूबर 2026 को अयूब सैयद समेत पाँच आरोपियों के खिलाफ बेंगलुरु की पीएमएलए विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की।
25 मार्च 2026 को पहले की शिकायत में 15 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज और ₹6.02 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की माँग की गई थी।
22 जुलाई को दूसरे कुर्की आदेश में एक आरोपी की ₹24 लाख की अचल संपत्ति कुर्क की गई।
अशोक ने इसे वाल्मीकि निगम घोटाले के बाद कर्नाटक में वित्तीय अनियमितता की दूसरी बड़ी घटना बताते हुए कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा।

कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 17 अक्टूबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर विकास निगम (एडीसीएल) में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनके अनुसार, अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए आवंटित ₹14.95 करोड़ की राशि कथित तौर पर फर्जी बैंक खातों, जाली दस्तावेजों और समयपूर्व सावधि जमा (एफडी) निकासी के जरिए हड़प ली गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की 14 अक्टूबर की प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर अशोक ने यह मुद्दा उठाया।

धोखाधड़ी का तरीका: फर्जी खाता और जाली दस्तावेज

ईडी की जांच में सामने आया कि बेंगलुरु स्थित स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की एचएएल सेकंड स्टेज शाखा में अंबेडकर विकास निगम के नाम पर एक फर्जी चालू खाता खोला गया। इसके बाद निगम की पाँच-पाँच करोड़ रुपये की चार सावधि जमाओं को जाली टर्म डिपॉजिट रसीद (टीडीआर/एफडीआर) और फर्जी समयपूर्व निकासी पत्रों का सहारा लेकर बंद करा दिया गया।

ईडी के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में पहचान संबंधी धोखाधड़ी का भी इस्तेमाल किया गया — अर्थात किसी दूसरे व्यक्ति के रूप में पहचान प्रस्तुत कर लेनदेन को अंजाम दिया गया। जांच एजेंसी ने पाया कि अपराध से प्राप्त धन को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया और मूल स्रोत को छिपाने के लिए रकम को नकद में भी निकाला गया।

ईडी की कानूनी कार्रवाई

ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय ने इस मामले में अयूब सैयद समेत पाँच आरोपियों के विरुद्ध 5 अक्टूबर को बेंगलुरु की धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गठित विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, बेंगलुरु में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जो भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज की गई थी।

इससे पूर्व, 25 मार्च 2026 को ईडी ने इस धनशोधन मामले में 15 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी और ₹6.02 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त करने की माँग की थी। इसके अलावा, 22 जुलाई को दूसरे अस्थायी कुर्की आदेश के तहत एक आरोपी की ₹24 लाख मूल्य की अचल संपत्ति कुर्क की गई।

भाजपा का राजनीतिक हमला

नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने इस प्रकरण को महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के कथित घोटाले से जोड़ते हुए कहा कि यह कर्नाटक में वित्तीय धोखाधड़ी की एक और घटना है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए पूछा, 'राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय की बात करते हैं, जबकि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए निर्धारित धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं।'

अशोक ने यह भी कहा कि भाजपा पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग जारी रखेगी और कथित घोटालों में संलिप्त लोगों को न्याय के कटघरे में लाने तक पीछे नहीं हटेगी। गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पहले से ही कई विवादों के घेरे में है।

आगे क्या होगा

पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों से भी संकेत मिला है कि कथित धनशोधन प्रक्रिया के तहत धनराशि को जानबूझकर प्राप्त किया गया, स्थानांतरित किया गया और निकाला गया। ईडी की जांच अभी जारी है और विशेष अदालत में मामले की सुनवाई आगे बढ़ने के साथ इस प्रकरण के और पहलू सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मूल सवाल दलीय राजनीति से परे है — दलित और आदिवासी कल्याण के लिए बने इन निगमों में आंतरिक ऑडिट, बोर्ड स्तरीय जवाबदेही और रियल-टाइम वित्तीय निगरानी क्यों नहीं है? इस प्रश्न का उत्तर किसी भी सरकार ने नहीं दिया।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. बी.आर. अंबेडकर विकास निगम (एडीसीएल) में क्या धोखाधड़ी हुई?
एडीसीएल में अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए आवंटित ₹14.95 करोड़ की राशि कथित तौर पर फर्जी चालू खाते खोलकर और जाली दस्तावेजों से सावधि जमाएँ समय से पहले तुड़वाकर हड़पी गई। ईडी की जांच में सामने आया कि पाँच-पाँच करोड़ रुपये की चार एफडी को नकली टीडीआर/एफडीआर के जरिए बंद कराया गया।
ईडी ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु की पीएमएलए विशेष अदालत में अयूब सैयद समेत पाँच आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। इससे पहले 25 मार्च 2026 को 15 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था और ₹6.02 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की माँग की गई थी; 22 जुलाई को ₹24 लाख की अचल संपत्ति कुर्क भी की गई।
भाजपा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को कैसे घेरा?
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने इसे वाल्मीकि निगम घोटाले के बाद कर्नाटक में वित्तीय अनियमितता की दूसरी बड़ी घटना बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर भी प्रहार करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की राष्ट्रीय स्तर पर बात करते हुए कर्नाटक में SC/ST कल्याण के धन का कथित दुरुपयोग उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाता।
इस मामले की जांच का आधार क्या है?
ईडी ने सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, बेंगलुरु में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। यह प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज थी और इन अपराधों को पीएमएलए, 2002 के तहत अनुसूचित अपराध माना गया है।
इस मामले में आगे क्या होने की संभावना है?
पीएमएलए विशेष अदालत में पूरक शिकायत दाखिल होने के बाद सुनवाई आगे बढ़ेगी और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया तेज होगी। ईडी की जांच जारी है और अधिक संपत्तियों की कुर्की तथा नए तथ्यों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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