21 अक्टूबर 2026
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अमित शाह: बंगाल में शून्य हिंसा के साथ चुनाव ऐतिहासिक सफलता, 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य

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अमित शाह: बंगाल में शून्य हिंसा के साथ चुनाव ऐतिहासिक सफलता, 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य

सारांश

पुलिस स्मृति दिवस पर अमित शाह ने दो बड़े ऐलान किए — बंगाल में पहली बार शून्य मृत्यु के साथ चुनाव को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, और 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त भारत का रोडमैप पेश किया। कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सलवाद के बाद अब नशा देश की अगली बड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौती घोषित।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस स्मृति दिवस पर राष्ट्रीय पुलिस स्मारक, नई दिल्ली से संबोधन किया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पहली बार शून्य मृत्यु के साथ संपन्न हुए; पूर्व में प्रत्येक चुनाव में 25 से 200 नागरिकों तक की मृत्यु होती थी।
गृह मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से मुक्त कराने का लक्ष्य निर्धारित किया।
शाह ने कश्मीर , पूर्वोत्तर और नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली को सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि बताया।
सीआरपीएफ , कोबरा बटालियन और छत्तीसगढ़ पुलिस को पाँच दशक पुराने नक्सलवाद के उन्मूलन के लिए विशेष सराहना।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर संबोधन करते हुए घोषणा की कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पहली बार बिना किसी व्यक्ति की मृत्यु के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से पूर्णतः मुक्त कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

पुलिस बलों की प्रशंसा और सेवा का सम्मान

शाह ने कहा, 'आज मैं देश की जनता से कहना चाहता हूं कि सरकार की सभी सेवाओं में यदि कोई सेवा सबसे कठिन है, तो वह पुलिस सेवा है।' उन्होंने रेखांकित किया कि जब आम नागरिक रक्षाबंधन, होली, दीपावली और ईद जैसे पर्व परिवार के साथ मनाते हैं, तब भी पुलिसकर्मी ड्यूटी पर तैनात रहकर देश की आंतरिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने जीवन के स्वर्णिम दौर को परिवार से दूर रहकर राष्ट्र को समर्पित करना अपने आप में बहुत बड़ी सेवा है।

बंगाल चुनाव: शून्य मृत्यु का नया मानदंड

गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से प्रत्येक चुनाव में 25 से 200 नागरिकों तक की मौत होती आई है। इस बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों ने बिना किसी व्यक्ति की मृत्यु के चुनाव संपन्न कराकर एक नया मानदंड स्थापित किया है। उन्होंने कहा, 'आज पूरा देश चुनावी हिंसा से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ा है।'

कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सलवाद: तीनों मोर्चों पर सफलता

शाह ने तीन दशकों से अधिक समय से देश को परेशान करने वाले तीन प्रमुख आंतरिक सुरक्षा हॉटस्पॉट — कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल-प्रभावित क्षेत्र — में शांति स्थापित होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद पर लगभग पूरी तरह अंकुश लगाया जा चुका है और पूरा पूर्वोत्तर शांति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। पाँच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या को समाप्त करने के लिए उन्होंने विशेष रूप से सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन के जवानों तथा छत्तीसगढ़ पुलिस की सराहना की।

नशामुक्त भारत: 2029 तक का रोडमैप

शाह ने घोषणा की कि गृह मंत्रालय ने तय किया है कि वर्ष 2026 के शेष महीनों से शुरू होकर 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से मुक्त कराने के लिए संयुक्त लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा, 'नशे की समस्या हमारी आने वाली पीढ़ियों को खोखला करती है, हमारे अर्थतंत्र पर भारी बोझ डालती है और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल संगठनों को आर्थिक सहायता पहुंचाने का माध्यम भी बनती है।'

गृह मंत्री ने देशभर की पुलिस का आह्वान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित नशामुक्त भारत के लक्ष्य को पूरी प्रतिबद्धता और मनोयोग से प्राप्त किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित किया जा सके। गौरतलब है कि यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में ड्रग तस्करी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और पंजाब सहित सीमावर्ती राज्य इससे बुरी तरह प्रभावित हैं।

आगे की राह

शाह के इस संबोधन के बाद देशभर की पुलिस के लिए नशे के खिलाफ अभियान को प्राथमिकता देना केंद्र का स्पष्ट निर्देश माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि 2029 की समयसीमा महत्वाकांक्षी है और इसकी सफलता राज्य सरकारों के साथ समन्वय, न्यायिक प्रक्रिया की गति और सीमापार तस्करी रोकने की क्षमता पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी विश्वसनीयता इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकारें — विशेषकर वे जहाँ विपक्ष का शासन है — केंद्र के रोडमैप के साथ कितना तालमेल बिठाती हैं। बंगाल में शून्य हिंसा की उपलब्धि वास्तविक है, लेकिन यह CAPF की तैनाती पर निर्भर थी — स्थायी संस्थागत सुधार पर नहीं। नशे की समस्या के लिए भी इसी तरह के केंद्रीय बल-निर्भर मॉडल की सीमाएँ हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या गृह मंत्रालय का रोडमैप माँग-पक्ष (जागरूकता, पुनर्वास) और आपूर्ति-पक्ष (तस्करी नेटवर्क ध्वंस) दोनों को समान रूप से संबोधित करता है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने पश्चिम बंगाल चुनाव को ऐतिहासिक क्यों बताया?
अमित शाह के अनुसार पश्चिम बंगाल में यह पहली बार हुआ जब विधानसभा चुनाव बिना किसी व्यक्ति की मृत्यु के शांतिपूर्वक संपन्न हुए। पूर्व में प्रत्येक चुनाव में 25 से 200 नागरिकों तक की मौत होती आई थी, इसलिए इसे शाह ने CAPF जवानों द्वारा स्थापित नया मानदंड बताया।
नशामुक्त भारत 2029 का लक्ष्य क्या है?
गृह मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2029 तक देश को नशे की समस्या से मुक्त कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। शाह ने कहा कि 2026 के शेष महीनों से ही देशभर की पुलिस इस संयुक्त अभियान में जुट जाएगी।
नशे की समस्या को आंतरिक सुरक्षा से कैसे जोड़ा गया है?
अमित शाह ने कहा कि नशे की समस्या न केवल युवा पीढ़ी को खोखला करती है और अर्थव्यवस्था पर बोझ डालती है, बल्कि देशविरोधी संगठनों को धन मुहैया कराने का माध्यम भी बनती है। इसीलिए इसे कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सलवाद जितना ही गंभीर आंतरिक सुरक्षा खतरा बताया गया।
नक्सलवाद के उन्मूलन में किन बलों की भूमिका सराही गई?
शाह ने विशेष रूप से सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और छत्तीसगढ़ पुलिस को पाँच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या को समाप्त करने में उनके साहस, दृढ़ता और धैर्य के लिए सराहना की।
पुलिस स्मृति दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
पुलिस स्मृति दिवस प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिन उन पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी। इस वर्ष समारोह नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर आयोजित हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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