अमित शाह ने गायत्री परिवार शताब्दी समारोह में कहा: माता भगवती देवी के 100 वर्ष भारतीय संस्कृति का पूर्णांक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित शताब्दी समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा एवं अखंड दीप के 100 वर्ष भारतीय संस्कृति के लिए एक पूर्णांक वर्ष के समान हैं। यह समारोह पूजनीय गुरुदेव और माता भगवती के जीवनकाल के स्वर्णिम अध्याय को नमन करने के लिए आयोजित किया गया था।
माता भगवती देवी की विरासत और विश्वव्यापी प्रसार
गृह मंत्री शाह ने अपने संबोधन में कहा कि माता भगवती देवी ने स्वयं तप कर दूसरों को प्रकाश दिया। उन्होंने बताया कि 100 वर्ष पूर्व प्रज्वलित हुई यह ज्योति आज 100 से अधिक देशों में 15 करोड़ से अधिक परिवारों तक पहुँच चुकी है और अनगिनत मानवों के कल्याण की प्रतीक बन गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस शताब्दी वर्ष में वे 20 से 23 जनवरी के बीच हरिद्वार में आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में सम्मिलित हुए थे।
गायत्री मंत्र और 24 शुभ शक्तियाँ
शाह ने गायत्री मंत्र को केवल धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संपूर्ण परिवर्तन का मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के 24 अक्षर हमारी 24 शुभ ग्रंथियों से सीधा संबंध रखते हैं। गुरु से शुद्ध उच्चारण का संस्कार लेकर इन्हें जागृत करने पर अशुभ शक्तियों का दमन होता है और शुभ शक्तियों का उद्भव होता है।
उन्होंने बताया कि ये 24 शुभ शक्तियाँ दूरदर्शिता, संयम, तप, साहस, विवेक, बुद्धि, रक्षा, उत्पादन, सेवा, ओजस, प्रेम और पराक्रम जैसे गुणों से जुड़ी हैं। शाह के अनुसार जिन व्यक्तियों में ये गुण उदित होते हैं, उनका मोक्ष का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाता है।
विश्वविद्यालयों में युवाओं से संवाद का अनुभव
गृह मंत्री ने एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब वे विश्वविद्यालयों में जाकर गायत्री मंत्र पर बात करते हैं, तो कई छात्र कहते हैं कि उन्हें इसका अर्थ नहीं पता, इसलिए उन्हें क्या लाभ होगा। इस पर उन्होंने डायबिटीज की दवाई का उदाहरण दिया — जिस प्रकार रोगी दवाई की कार्यप्रणाली जाने बिना उसका लाभ उठाता है, उसी प्रकार पंडित राम शर्मा के अनुसार श्रद्धापूर्वक गायत्री मंत्र के उच्चारण से 24 सद्ग्रंथियाँ जागृत होती हैं और उनका अंतःस्राव 24 सद्शक्तियों का विकास करता है।
उन्होंने बताया कि इस संवाद के बाद कई छात्रों और युवाओं ने उन्हें मेल कर यह जानकारी दी कि ऐसा करने से उन्हें और उनके माता-पिता को काफी लाभ मिला। गौरतलब है कि गायत्री परिवार का यह शताब्दी समारोह भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
समारोह का महत्त्व और आगे की यात्रा
शाह ने बताया कि नई दिल्ली में हो रहे दो महत्वपूर्ण आयोजन इस शताब्दी यात्रा के अगले पड़ाव हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संस्थाएँ वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति सुदृढ़ कर रही हैं। गायत्री परिवार की 100 से अधिक देशों में सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि भारत की वैदिक परंपरा की जड़ें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गहरी हैं।