30 सितंबर 2026
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अनिल राजभर का सपा पर हमला: 2012-17 में लाल टोपी की आड़ में गुंडागर्दी और ज़मीन कब्ज़े को मिला सत्ता संरक्षण

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अनिल राजभर का सपा पर हमला: 2012-17 में लाल टोपी की आड़ में गुंडागर्दी और ज़मीन कब्ज़े को मिला सत्ता संरक्षण

सारांश

यूपी मंत्री अनिल राजभर ने सपा के 2012-17 के शासनकाल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लाल टोपी की आड़ में गुंडागर्दी और ज़मीन कब्ज़े को सत्ता का संरक्षण मिलता था। चुनाव से पहले यह हमला BJP की उस रणनीति का हिस्सा है जो सपा के पुराने कार्यकाल को जनता के बीच ज़िंदा रखना चाहती है।

मुख्य बातें

यूपी मंत्री अनिल राजभर ने 30 सितंबर 2026 को लखनऊ में सपा पर गुंडागर्दी और ज़मीन कब्ज़े को सत्ता संरक्षण देने का आरोप लगाया।
राजभर ने कहा कि 2012-2017 के सपा शासनकाल में लाल टोपी पहनने वाले लोगों द्वारा ज़मीन कब्ज़े और कानून-व्यवस्था की घटनाओं के आरोप लगते रहे।
महिलाओं के सम्मान से जुड़ी घटनाओं पर प्रशासन की चुप्पी का भी उन्होंने ज़िक्र किया।
पुरानी पेंशन के मुद्दे पर राजभर ने सपा पर तथ्यहीन राजनीति करने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव के पीडीए गठजोड़ के राजनीतिक संदेश को राजभर ने अस्पष्ट बताया।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने 30 सितंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच सपा शासनकाल में गुंडागर्दी और ज़मीन कब्ज़ाने की घटनाओं को सत्ता का खुला संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता उस दौर को भूली नहीं है और सपा नेताओं को बयानबाज़ी के बजाय तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

मुख्य आरोप: लाल टोपी और सत्ता का संरक्षण

मंत्री राजभर ने कहा कि सपा के शासनकाल में यदि किसी को किसी की ज़मीन पर कब्ज़ा करना होता था या कोई अवैध काम करना होता था, तो लाल टोपी पहनने वाले लोगों के समूह के पहुँचने की बात कही जाती थी। उनके अनुसार, महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध होने वाली घटनाओं पर प्रशासन पर्याप्त कार्रवाई नहीं करता था।

राजभर ने यह भी कहा कि सपा भले ही अपने राजनीतिक प्रतीकों और रंगों में बदलाव करती रहे, लेकिन 2012-2017 के कार्यकाल की यादें जनता के ज़ेहन से मिटती नहीं हैं। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि पार्टी सत्ता में रहने पर और सत्ता से बाहर रहने पर दोहरा राजनीतिक व्यवहार अपनाती है।

पुरानी पेंशन और राजनीतिक बयानबाज़ी पर निशाना

पुरानी पेंशन व्यवस्था के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने कहा कि सपा नेताओं को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि पेंशन व्यवस्था में बदलाव किसके शासनकाल में हुआ था। उनके अनुसार, सपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है, जबकि उसके बयानों का तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।

गौरतलब है कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा बन चुका है, और विपक्षी दलों ने इसे सरकारी कर्मचारियों के बीच प्रमुखता से उठाया है।

पीडीए और अखिलेश पर कटाक्ष

राजभर ने सपा के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) गठजोड़ के राजनीतिक संदेश पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपने राजनीतिक संदेश को जनता के बीच स्पष्ट रूप से नहीं रख पाए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस उत्तर प्रदेश की जनता ने सपा को चार बार सरकार बनाने का अवसर दिया, कम से कम उस जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए।

सरकार की स्थिति और आगे की राजनीति

यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियाँ धीरे-धीरे तेज़ होने लगी हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता सपा के शासनकाल को लेकर लगातार हमलावर रुख़ अपनाए हुए हैं, जबकि सपा का कहना है कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश के विकास के वादे पूरे नहीं किए।

राजभर ने अंत में सपा नेताओं से अपील की कि वे जनता के सामने तथ्य-आधारित बातें रखें और राजनीतिक बयानबाज़ी से बचें। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब 'जंगलराज' का नैरेटिव सपा के विरुद्ध सफलतापूर्वक काम किया था। दूसरी तरफ़, सपा का पीडीए फॉर्मूला और नई पीढ़ी के मतदाता इस पुरानी कहानी से कितने प्रभावित होंगे, यह देखना बाकी है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस आरोप-प्रत्यारोप को महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी के रूप में पेश करती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के मामले में ठोस बदलाव साबित किए हैं।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनिल राजभर ने सपा पर क्या आरोप लगाए हैं?
यूपी मंत्री अनिल राजभर ने आरोप लगाया कि 2012-2017 के सपा शासनकाल में गुंडागर्दी और ज़मीन कब्ज़े की घटनाओं को सत्ता का खुला संरक्षण मिलता था। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ी घटनाओं पर प्रशासन पर्याप्त कार्रवाई नहीं करता था।
लाल टोपी विवाद क्या है?
सपा अपनी लाल टोपी को क्रांति का प्रतीक बताती है, लेकिन राजभर ने आरोप लगाया कि 2012-2017 के सपा शासनकाल में लाल टोपी पहनने वाले लोगों पर ज़मीन कब्ज़े और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के आरोप लगते रहे। अखिलेश यादव की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने यह बयान दिया।
पुरानी पेंशन के मुद्दे पर राजभर की क्या प्रतिक्रिया है?
राजभर ने कहा कि सपा नेताओं को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुरानी पेंशन व्यवस्था में बदलाव किसके शासनकाल में हुआ था। उनके अनुसार सपा इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठा रही है और उसके बयानों का तथ्यों से कोई संबंध नहीं है।
सपा का पीडीए गठजोड़ क्या है और इस पर राजभर की क्या राय है?
पीडीए यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक, सपा का चुनावी सामाजिक गठजोड़ है जिसे अखिलेश यादव ने प्रमुखता से उठाया है। राजभर ने कहा कि सपा इस राजनीतिक संदेश को जनता के बीच स्पष्ट रूप से नहीं रख पाई है।
यूपी में अगले विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में यह बयान कितना अहम है?
यह बयान ऐसे समय आया है जब यूपी विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ होने लगी हैं। BJP और सपा दोनों एक-दूसरे के शासनकाल को लेकर आक्रामक रुख़ अपनाए हुए हैं, और यह आरोप-प्रत्यारोप आने वाले महीनों में और तीखा होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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