12 अक्टूबर 2026
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एसआईआर विरोधी संघर्ष दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन: तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी का बड़ा बयान

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एसआईआर विरोधी संघर्ष दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन: तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी का बड़ा बयान

सारांश

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने एसआईआर को मतदाताओं के नाम हटाने की 'साजिश' करार देते हुए इसे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा — और 'ज्ञानेश गो बैक' के नारे के साथ भारत गठबंधन की लड़ाई को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप देने की कोशिश की।

मुख्य बातें

रेवंत रेड्डी ने 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में एसआईआर विरोधी संघर्ष को नया स्वतंत्रता आंदोलन बताया।
देश बचाओ' अभियान के तहत बैठक में 'ज्ञानेश गो बैक' और 'एसआईआर गो बैक' के नारों का आह्वान किया गया।
रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ कथित मिलीभगत से मतदाता नाम हटाने की साजिश रची।
लड़ाई कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे , राहुल गांधी और भारत गठबंधन के नेतृत्व में लड़ी जा रही है।
1950 में नेहरू सरकार के दौरान एसआईआर का उपयोग मतदाताओं को जोड़ने के लिए हुआ था — आज की प्रक्रिया से विपरीत, ऐसा विपक्ष का तर्क है।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को कहा कि नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए जारी संघर्ष एक नए स्वतंत्रता आंदोलन के समान है। नई दिल्ली स्थित तेलंगाना भवन में आयोजित 'वोट बचाओ... देश बचाओ' अभियान की बैठक में उन्होंने विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर / SIR) को संविधान प्रदत्त मताधिकार के विरुद्ध साजिश बताया। उनका यह बयान विपक्षी दलों के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जो चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर देशभर में तेज़ हो रहा है।

मुख्यमंत्री का आरोप: 'ज्ञानेश गो बैक'

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के बयान के अनुसार, रेवंत रेड्डी ने स्वतंत्रता संग्राम के 'साइमन गो बैक' आंदोलन से तुलना करते हुए कहा कि अब 'ज्ञानेश गो बैक' और 'एसआईआर गो बैक' के नारों के साथ मतदान के अधिकार की रक्षा की ज़रूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की मोदी सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ कथित तौर पर मिलकर मतदाता सूची संशोधन की आड़ में मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रची है। गौरतलब है कि ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और सरकार की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।

भारत गठबंधन की अगुवाई में लड़ाई

रेवंत रेड्डी ने कहा कि यह लड़ाई कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भारत गठबंधन के सहयोगी दलों के नेतृत्व में लड़ी जा रही है। उन्होंने इसे 'वोट चोरी' के विरुद्ध राष्ट्रीय संघर्ष का रूप दिया। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर दबाव बना रहे हैं।

संविधान और अंबेडकर का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान ने जनता को मतदान का अधिकार एक सशक्त हथियार के रूप में दिया। उन्होंने जोड़ा कि इसी मताधिकार ने राजशाही और वंशवादी शासन को समाप्त कर सत्ता को जनता के हाथों में सौंपने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एसआईआर का इतिहास: 1950 की पृष्ठभूमि

रेवंत रेड्डी ने बताया कि एसआईआर पहले भी हो चुका है — 1950 में, जब जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री थे, तब इसका उपयोग उन लोगों को मतदान का अधिकार देने के लिए किया गया था जिनके पास यह अधिकार नहीं था। देश विभाजन के बाद नए क्षेत्रों में बसे लोगों का विवरण उस वक्त इसी प्रक्रिया के तहत दर्ज किया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि तब की एसआईआर समावेशी थी, जबकि आज की प्रक्रिया कथित तौर पर मतदाताओं को बाहर करने के लिए इस्तेमाल की जा रही है।

आगे क्या होगा

भारत गठबंधन के दलों का यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता मुहिम की शक्ल लेता दिख रहा है। आने वाले दिनों में विपक्ष के अन्य नेताओं के भी इस मुद्दे पर सक्रिय होने की संभावना है। चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की औपचारिक प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा तथ्यों पर होगी — क्या एसआईआर में वास्तव में अनुपातहीन रूप से अल्पसंख्यक, दलित या प्रवासी मतदाताओं के नाम कटे हैं, यह अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है। विपक्ष का 'साइमन गो बैक' से 'ज्ञानेश गो बैक' का सादृश्य भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है, पर संस्थागत तुलना संदिग्ध है — साइमन कमीशन एक औपनिवेशिक थोपी गई संस्था थी, जबकि चुनाव आयोग संविधान की उपज है। मुख्यधारा की कवरेज इस बारीकी को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। असली सवाल यह है कि क्या भारत गठबंधन इस मुद्दे को जमीनी आंदोलन में बदल पाएगा, या यह दिल्ली की बैठकों तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) क्या है और इसपर विवाद क्यों है?
एसआईआर यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' मतदाता सूचियों की एक विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है जो चुनाव आयोग द्वारा की जाती है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बार इस प्रक्रिया का उपयोग वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाने के लिए कथित तौर पर किया जा रहा है, जिससे उनके संवैधानिक मताधिकार का हनन होता है।
रेवंत रेड्डी ने एसआईआर की तुलना स्वतंत्रता आंदोलन से क्यों की?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तर्क दिया कि जैसे ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध अधिकारों के लिए संघर्ष किया गया था, वैसे ही आज संविधान द्वारा मिले मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी है। उन्होंने 'साइमन गो बैक' आंदोलन की तर्ज पर 'ज्ञानेश गो बैक' का नारा दिया।
'वोट बचाओ... देश बचाओ' अभियान क्या है?
यह भारत गठबंधन के दलों द्वारा एसआईआर के विरोध में चलाया जा रहा राष्ट्रव्यापी अभियान है। इसका नेतृत्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य मतदाताओं में जागरूकता फैलाना और दबाव राजनीति के जरिए इस प्रक्रिया को रोकना है।
1950 के एसआईआर और मौजूदा एसआईआर में क्या फर्क बताया जा रहा है?
रेवंत रेड्डी के अनुसार, 1950 में जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में हुए एसआईआर का उद्देश्य विभाजन के बाद नए क्षेत्रों में बसे लोगों को मतदान का अधिकार देना था — यानी मतदाताओं को जोड़ना। उनका कहना है कि इस बार की प्रक्रिया इसके उलट, मतदाताओं के नाम हटाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल हो रही है।
इस विवाद में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग का रुख क्या है?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के आरोपों पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद आगे और गहरा हो सकता है क्योंकि भारत गठबंधन इसे राष्ट्रीय अभियान बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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