आरा में कस्टम विभाग के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर की गोली मारकर हत्या, 8 गोलियां दागीं; भू-माफिया पर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के आरा में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 की सुबह तीन हथियारबंद अपराधियों ने कस्टम विभाग के पूर्व असिस्टेंट कमिश्नर रामकुमार सिंह (67) पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी। मृतक के परिजनों ने इस नृशंस हत्याकांड के पीछे आरा के भू-माफियाओं का हाथ बताया है और पुलिस पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बनाया है।
घटनाक्रम: कैसे हुई हत्या
यह हमला नवादा थाना क्षेत्र के अंतर्गत जैन कॉलेज गेट के समीप हुआ। रामकुमार सिंह रोज़ की तरह अपने बेटे राजेश कुमार के साथ रमना मैदान में सुबह की सैर के लिए निकले थे। जब वे कार का गेट बंद कर रहे थे, उसी दौरान तीन हथियारबंद अपराधियों ने उन पर अंधाधुंध गोलियाँ चला दीं।
राजेश कुमार उस वक्त गाड़ी के भीतर थे, जिससे उनकी जान बच गई। उन्होंने बताया, 'हर रोज की तरह सुबह उनके पापा कार से बाहर निकले और हम गाड़ी में बैठ गए। जैसे ही पापा गाड़ी का गेट बंद कर रहे थे, तभी तीन हथियारबंद अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।'
घाव की गंभीरता और मृत्यु की पुष्टि
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, रामकुमार सिंह को कुल आठ गोलियाँ लगीं — छह गोलियाँ दाहिनी तरफ से पेट और सीने के पास, एक गोली बाईं ओर सीने के पास और एक गोली बाईं ओर गर्दन में। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें आरा सदर अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जमीन विवाद की पृष्ठभूमि
मृतक के बेटे राजेश कुमार ने बताया कि नगर थाना क्षेत्र के सिंगही मोड़ के समीप एक जमीन विवाद काफी समय से चल रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि आरा के कुछ जमीन माफियाओं ने उस भूमि पर कब्जा जमाने की कोशिश की थी, जिसके बाद रामकुमार सिंह ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। राजेश के अनुसार, इससे पहले भी कई बार उनके पिता पर जानलेवा हमले हो चुके थे।
रामकुमार सिंह मूल रूप से बिहिया थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव के निवासी थे और भागलपुर से 2015 में सेवानिवृत्त हुए थे। एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को दिनदहाड़े इस तरह निशाना बनाया जाना इलाके में दहशत का कारण बन गया है।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जाँच
फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी बताई जा रही है। परिजनों की शिकायत के आधार पर भू-माफिया कनेक्शन की भी जाँच की जा रही है।
क्या होगा आगे
यह घटना बिहार में संगठित भू-माफिया के बढ़ते दुस्साहस को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाने की ऐसी घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि जमीन विवादों में शिकायत करने वालों को खुलेआम धमकाया जा रहा है। परिवार ने मुख्यमंत्री से त्वरित न्याय की माँग की है।