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अराकू कॉफी को वैश्विक पहचान दिलाने में जुटी आंध्र सरकार: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू

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अराकू कॉफी को वैश्विक पहचान दिलाने में जुटी आंध्र सरकार: मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू

सारांश

अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अराकू कॉफी को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का संकल्प लिया। पूर्वी घाट की इस आदिवासी कॉफी ने संसद के विशेष स्टालों तक का सफर तय किया है — अब निशाना विश्व बाज़ार है।

मुख्य बातें

चंद्रबाबू नायडू ने 1 अक्टूबर 2026 को अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस पर अराकू को वैश्विक अग्रणी कॉफी गंतव्य बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने अराकू कॉफी को पूर्वी घाट के आदिवासी समुदायों की पहचान और परंपरागत ज्ञान का प्रतीक बताया।
नई दिल्ली के संसद भवन में विशेष स्टालों के ज़रिए अराकू कॉफी का राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन किया जा चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अराकू कॉफी उत्पादन से जुड़े आदिवासी परिवारों के योगदान को सार्वजनिक रूप से रेखांकित किया है।
राज्य सरकार स्थानीय उत्पादकों को सशक्त बनाते हुए आंध्र प्रदेश को विश्व कॉफी मानचित्र पर स्थापित करने में जुटी है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 1 अक्टूबर 2026 को अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस के अवसर पर घोषणा की कि राज्य सरकार अराकू कॉफी को विश्व के अग्रणी कॉफी गंतव्यों में स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से निवेश कर रही है। उन्होंने स्थानीय उत्पादकों को सशक्त बनाने और आंध्र प्रदेश को वैश्विक कॉफी मानचित्र पर उचित स्थान दिलाने का संकल्प दोहराया।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'मेरे लिए, इसकी शुरुआत अराकू से होती है — आंध्र प्रदेश की समृद्ध विरासत का स्वाद।' उन्होंने आगे कहा कि 'हम अराकू को वैश्विक स्तर पर अग्रणी कॉफी गंतव्य बनाने के लिए सक्रिय रूप से निवेश कर रहे हैं, अपने स्थानीय उत्पादकों को सशक्त बना रहे हैं, और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि आंध्र प्रदेश विश्व कॉफी मानचित्र पर अपना उचित स्थान प्राप्त करे।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूर्वी घाट की पहाड़ियों में उगाई जाने वाली अराकू कॉफी अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है और आदिवासी किसानों की आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी है।

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी इस अवसर पर अराकू कॉफी की विशेषता को रेखांकित करते हुए कहा कि 'अराकू कॉफी के हर कप में पूर्वी घाट की सुगंध, इसकी मिट्टी की समृद्धि और हमारे आदिवासी किसानों की कड़ी मेहनत समाहित है।' उन्होंने इस उत्पाद को महज एक पेय से परे बताते हुए इसे 'जंगलों, आदिवासी समुदायों और उनके पारंपरिक ज्ञान के बीच के बंधन का प्रतीक' कहा।

पवन कल्याण ने यह भी उल्लेख किया कि नई दिल्ली स्थित संसद भवन में विशेष स्टालों के माध्यम से अराकू कॉफी का प्रदर्शन किया जा चुका है, जो इसकी राष्ट्रीय स्वीकृति का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री मोदी की स्वीकृति

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अराकू कॉफी और इसकी खेती से जुड़े आदिवासी परिवारों के योगदान को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। गौरतलब है कि यह पहचान अराकू कॉफी को न केवल एक कृषि उत्पाद, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कहानी का हिस्सा बनाती है।

अराकू कॉफी का महत्व

अराकू घाटी, जो आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम जिले में स्थित है, अपनी जैविक और शेड-ग्रोन कॉफी के लिए विश्व भर में जानी जाती है। यहाँ की कॉफी मुख्यतः आदिवासी समुदायों द्वारा पारंपरिक पद्धतियों से उगाई जाती है और इसे यूरोपीय बाज़ारों में विशेष माँग प्राप्त है।

पवन कल्याण ने आह्वान किया कि 'आइए हम उन किसानों, जंगलों और पूर्वी घाटों का जश्न मनाएं जिनकी बदौलत हर कप कॉफी संभव हो पाती है।' राज्य सरकार की यह पहल अराकू कॉफी के ब्रांड को वैश्विक मंच पर और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक सुनियोजित कदम के रूप में देखी जा रही है।

आगे की राह

राज्य सरकार की इस प्रतिबद्धता से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में अराकू कॉफी उत्पादन से जुड़े आदिवासी किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आंध्र प्रदेश कृषि-निर्यात के क्षेत्र में एक नया मानदंड स्थापित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आपूर्ति श्रृंखला, मूल्य निर्धारण और आदिवासी सहकारिता को मज़बूत किए बिना 'वैश्विक अग्रणी गंतव्य' का लक्ष्य महज नारेबाज़ी बन सकता है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अराकू कॉफी क्या है और यह क्यों खास है?
अराकू कॉफी आंध्र प्रदेश की अराकू घाटी में पूर्वी घाट की पहाड़ियों पर आदिवासी किसानों द्वारा पारंपरिक और जैविक पद्धतियों से उगाई जाती है। इसकी विशिष्ट सुगंध और स्वाद के कारण यूरोपीय बाज़ारों में इसकी विशेष माँग है और यह भारत के प्रीमियम कॉफी निर्यात उत्पादों में शुमार है।
चंद्रबाबू नायडू ने अराकू कॉफी को लेकर क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 1 अक्टूबर 2026 को अंतर्राष्ट्रीय कॉफी दिवस पर कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार अराकू को वैश्विक स्तर पर अग्रणी कॉफी गंतव्य बनाने के लिए सक्रिय रूप से निवेश कर रही है और स्थानीय उत्पादकों को सशक्त बना रही है।
पवन कल्याण ने अराकू कॉफी के बारे में क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि अराकू कॉफी के हर कप में पूर्वी घाट की सुगंध, मिट्टी की समृद्धि और आदिवासी किसानों की कड़ी मेहनत समाहित है। उन्होंने इसे जंगलों, आदिवासी समुदायों और उनके पारंपरिक ज्ञान के बंधन का प्रतीक बताया।
क्या प्रधानमंत्री मोदी ने भी अराकू कॉफी का समर्थन किया है?
हाँ, पवन कल्याण के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अराकू कॉफी और इसकी खेती से जुड़े आदिवासी परिवारों के योगदान को सार्वजनिक रूप से उजागर किया है। इसके अलावा नई दिल्ली के संसद भवन में भी विशेष स्टालों के माध्यम से अराकू कॉफी का प्रदर्शन किया जा चुका है।
अराकू कॉफी का आदिवासी किसानों से क्या संबंध है?
अराकू कॉफी मुख्यतः आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी समुदायों द्वारा उगाई जाती है। यह उनकी पारंपरिक कृषि पद्धतियों और वन-ज्ञान पर आधारित है, जो इसे एक विशिष्ट और टिकाऊ उत्पाद बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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