आर्टिलरी रेजिमेंट के 200 वर्ष: जवानों ने 7,756 मीटर ऊँचे माउंट कामेट पर फहराया तिरंगा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट के पर्वतारोहियों ने 21 सितंबर 2026 को 7,756 मीटर ऊँचे माउंट कामेट की चोटी को सफलतापूर्वक फतह किया। यह ऐतिहासिक अभियान रेजिमेंट की स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित समापन समारोह में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अभियान दल का स्वागत किया और विधिवत ध्वज ग्रहण कर अभियान के समापन की औपचारिकता पूरी की।
अभियान की पृष्ठभूमि और मार्ग
यह अभियान पंजाब के फिरोजपुर से प्रारंभ होकर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माउंट कामेट तक पहुँचा। माउंट कामेट गढ़वाल हिमालय की प्रमुख चोटियों में गिना जाता है और नंदा देवी के बाद यह गढ़वाल क्षेत्र की दूसरी सबसे ऊँची पर्वत चोटी है। 7,756 मीटर की इस ऊँचाई पर अचानक बदलता मौसम, अत्यंत कम तापमान और पतली होती जाती ऑक्सीजन पर्वतारोहियों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियाँ थीं।
तैयारी और प्रशिक्षण
अभियान दल ने 21 जुलाई से 7 अगस्त तक ऊँचाई के अनुकूल ढलने का गहन अभ्यास किया। इसके बाद 8 से 22 अगस्त तक गोठिंग में कठोर पर्वतारोहण प्रशिक्षण लिया गया, जहाँ दल ने दुर्गम परिस्थितियों में आगे बढ़ने और अभियान की चुनौतियों से निपटने की तैयारी की। गोल्डन एरो डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने इस अभियान दल को रवाना किया था।
मुख्य घटनाक्रम: शिखर तक का संघर्ष
दल ने पहले बेस कैंप स्थापित किया, फिर अग्रिम आधार शिविर तक पहुँचा और अगस्त से सितंबर के बीच शिविर-1, शिविर-2 और शिविर-3 तैयार किए। दल ने सबसे पहले माउंट अबी गामिन की चोटी फतह करने का प्रयास किया। इसके बाद माउंट कामेट की ओर अभियान शुरू किया गया, किंतु खराब मौसम ने बाधा उत्पन्न की और 18 सितंबर को पर्वतारोहियों को शिविर-1 में वापस लौटना पड़ा।
विपरीत परिस्थितियों में दल ने घबराने के बजाय धैर्य और सूझबूझ का परिचय दिया। पर्वतारोहियों ने हालात की समीक्षा की, अनुकूल अवसर का इंतज़ार किया और 21 सितंबर 2026 को सफलतापूर्वक माउंट कामेट की चोटी पर पहुँचकर तिरंगा फहराया।
अभियान का व्यापक उद्देश्य
आर्टिलरी रेजिमेंट की द्विशताब्दी के अवसर पर आयोजित यह अभियान केवल एक भौगोलिक चोटी फतह करने तक सीमित नहीं था। इसके माध्यम से सैनिकों में साहसिक गतिविधियों के प्रति उत्साह बढ़ाने, सामूहिक प्रयास की भावना को सुदृढ़ करने और पेशेवर उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य भी रखा गया था। गौरतलब है कि भारतीय सेना की विभिन्न रेजिमेंटें अपने स्थापना वर्षगाँठ के अवसर पर इसी तरह के साहसिक अभियान आयोजित करती हैं, जो युद्धकौशल और मनोबल दोनों को मज़बूत करते हैं।
समापन समारोह
नई दिल्ली में आयोजित समापन समारोह में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को विधिवत अभियान का ध्वज सौंपा गया। इस समारोह के साथ तोपखाना रेजिमेंट के द्विशताब्दी वर्ष का यह महत्त्वपूर्ण अभियान आधिकारिक तौर पर संपन्न हुआ। आने वाले समय में इस अभियान की सफलता से प्रेरित होकर रेजिमेंट के और जवान ऐसे साहसिक अभियानों की ओर प्रेरित होंगे, यह उम्मीद जताई जा रही है।