माउंट कामेट फतह: भारत-अर्जेंटीना सेनाओं ने 7,756 मीटर की ऊंचाई पर फहराया तिरंगा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना और अर्जेंटीना की सेना के संयुक्त पर्वतारोहण दल ने 21 सितंबर 2026 को 7,756 मीटर ऊंची माउंट कामेट की चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा और अर्जेंटीना का झंडा फहराया। इससे पहले 17 सितंबर को दल ने 7,355 मीटर ऊंची माउंट अबी गामिन को भी फतह किया था। संयुक्त अभियान के सफल समापन पर सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में दल के सदस्यों का औपचारिक स्वागत किया।
अभियान का विवरण
इस संयुक्त पर्वतारोहण मुहिम में कुल 35 सदस्य शामिल थे — जिनमें भारतीय सेना के 25 और अर्जेंटीना की सेना के 10 जवान थे। दल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल चिराग चटर्जी ने किया। अभियान की आधिकारिक शुरुआत 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर से हुई।
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित माउंट कामेट, कंचनजंगा और नंदा देवी के बाद भारत की तीसरी सबसे ऊंची चोटी है। इस चोटी पर पहुंचना तकनीकी दृष्टि से अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
मार्ग की चुनौतियाँ
रक्षा सूत्रों के अनुसार, पर्वतारोहियों को पूरे अभियान के दौरान कड़ाके की ठंड, तेज हवाओं, बर्फ से ढके विशाल मैदानों, खड़ी चट्टानों और गहरी बर्फीली दरारों (क्रेवासेज़) का सामना करना पड़ा। ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक कम तापमान ने हर कदम को जोखिम भरा बना दिया।
इसके बावजूद, दोनों सेनाओं के जवानों ने अनुशासन और आपसी तालमेल के बल पर दोनों लक्ष्य समय पर हासिल किए। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह अभियान दोनों देशों की सेनाओं के बीच बढ़ते व्यावसायिक सहयोग और विश्वास की मिसाल है।
तीसरा संयुक्त अभियान — एक बढ़ती साझेदारी
यह भारत और अर्जेंटीना की सेनाओं का तीसरा संयुक्त पर्वतारोहण अभियान था। इससे पहले जनवरी 2025 में अर्जेंटीना के मेंडोजा में 6,962 मीटर ऊंची माउंट एकॉनकागुआ और अगस्त 2025 में लद्दाख की सुरू घाटी में 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन पर दोनों देशों के सैनिकों ने संयुक्त रूप से चढ़ाई की थी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ रक्षा एवं सामरिक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। गौरतलब है कि हर अभियान के साथ दोनों सेनाओं ने ऊंचाई, कठिनाई और भौगोलिक विविधता — तीनों मानकों पर खुद को और परखा है।
सैन्य महत्व
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संयुक्त अभियानों का प्रत्यक्ष सामरिक महत्व होता है। इस तरह के अभ्यास दोनों सेनाओं को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में समन्वय, संचार और संसाधन प्रबंधन के मामले में व्यावहारिक अनुभव देते हैं।
माउंट अबी गामिन और माउंट कामेट की सफल चढ़ाई ने दोनों देशों के पर्वतारोहियों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता और मानसिक दृढ़ता को प्रमाणित किया है। आने वाले वर्षों में इस श्रृंखला का विस्तार और भी ऊंचे लक्ष्यों की ओर होने की संभावना जताई जा रही है।