अरुणाचल के लोग राष्ट्रीय एकता की मिसाल: गवर्नर केटी परनाइक ने 'हर घर तिरंगा' अभियान की शुरुआत की
सारांश
मुख्य बातें
अरुणाचल प्रदेश के गवर्नर केटी परनाइक ने 9 अगस्त 2026 को ईटानगर में कहा कि राज्य के लोग भारत की पूर्वी सीमा के अटल प्रहरी हैं और उन्होंने देश की एकता व अखंडता की रक्षा में सदैव अनुकरणीय देशभक्ति का परिचय दिया है। यह अवसर था राज्यव्यापी 'हर घर तिरंगा' अभियान के शुभारंभ का, जिसमें मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उपमुख्यमंत्री चौना मीन भी उपस्थित रहे।
अभियान का शुभारंभ और उद्देश्य
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने गवर्नर परनाइक और उपमुख्यमंत्री चौना मीन के साथ मिलकर 'हर घर तिरंगा' अभियान की औपचारिक शुरुआत की। खांडू ने स्पष्ट किया कि यह पहल महज झंडा फहराने के समारोह से कहीं आगे है — यह देशभक्ति को गहरा करने, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने और भारतीय पहचान के मूल्यों से जुड़ाव बनाने की एक व्यापक देशव्यापी कोशिश है।
इस अवसर पर गवर्नर परनाइक ने मुख्यमंत्री के साथ युवाओं को राष्ट्रीय ध्वज सौंपा और सभी प्रतिभागियों के साथ मिलकर राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' गाया।
तिरंगे का प्रतीकात्मक महत्व
गवर्नर परनाइक ने अरुणाचल प्रदेश के लोगों की देशभक्ति पर अपनी लिखी एक कविता का पाठ करते हुए तिरंगे के गहरे अर्थ को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केसरिया रंग साहस और निस्वार्थ सेवा का, सफेद रंग शांति, सद्भाव और सत्य का, तथा हरा रंग समृद्धि और प्रकृति के साथ सामंजस्य का प्रतीक है। अशोक चक्र न्याय और धर्म के मार्ग पर निरंतर प्रगति की प्रेरणा देता है।
उन्होंने तिरंगे को भारत की एकता, बलिदान, आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक बताया।
भारत छोड़ो आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति
9 अगस्त के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए गवर्नर परनाइक ने कहा कि 1942 में इसी तिथि को महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' के ऐतिहासिक नारे के साथ भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया था, जिसने लाखों भारतीयों को औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एकजुट होने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में राष्ट्रीय ध्वज स्वाधीनता, दृढ़ता और सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा था।
देशभक्ति को कार्यरूप देने का आह्वान
गवर्नर परनाइक ने सभी नागरिकों से गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने और इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि जिम्मेदार आचरण में भी प्रकट होनी चाहिए — जिसमें संविधान का सम्मान, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, पर्यावरण की देखभाल और समाज व राष्ट्र के प्रति समर्पित सेवा शामिल है।
उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों, युवा संगठनों, स्वयं-सहायता समूहों और सामुदायिक संस्थाओं से आग्रह किया कि वे ऐसी गतिविधियाँ आयोजित करें जो देशभक्ति, राष्ट्रीय जागरूकता और नागरिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा दें। गवर्नर ने इस अभियान को एक जन-आंदोलन की संज्ञा दी जो भावनात्मक एकता को पुनर्जीवित करता है।