14 अक्टूबर 2026
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असम-अरुणाचल सीमा विवाद: 33 गांवों में सीमांकन तेज़ करने पर दोनों राज्य सहमत, दिसंबर में अगली बैठक

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असम-अरुणाचल सीमा विवाद: 33 गांवों में सीमांकन तेज़ करने पर दोनों राज्य सहमत, दिसंबर में अगली बैठक

सारांश

दशकों पुराने असम-अरुणाचल सीमा विवाद में नई हलचल — 33 विवादित गांवों को तीन श्रेणियों में बाँटकर सीमांकन का रोडमैप तैयार हुआ। श्रेणी-प्रथम के 9 गांवों में तत्काल खंभे लगेंगे, सर्वेक्षण विभाग दो महीने में नियुक्त होगा। 1951 से जारी इस विवाद के समाधान की दिशा में नामसाई घोषणा के बाद यह सबसे ठोस कदम है।

मुख्य बातें

असम और अरुणाचल प्रदेश ने 14 अक्टूबर 2026 को क्षेत्रीय समिति की दूसरी बैठक में 33 विवादित गांवों में सीमांकन तेज़ करने पर सहमति जताई।
33 गांवों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया: श्रेणी-प्रथम में 9, श्रेणी-द्वितीय में 22, और श्रेणी-तृतीय में 2 गांव।
श्रेणी-प्रथम के 9 गांवों में तत्काल सीमांकन स्तंभ लगाने पर सहमति; भारतीय सर्वेक्षण विभाग को 2 महीने में नियुक्त किया जाएगा।
विवादित क्षेत्रों में यथास्थिति बनाए रखने और अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी।
यह विवाद 1951 से चला आ रहा है; नामसाई घोषणा (जुलाई 2022) के तहत विवादित गांव 123 से घटाकर 86 किए गए थे।
अगली बैठक दिसंबर 2026 के अंत में निर्धारित।

असम और अरुणाचल प्रदेश ने 14 अक्टूबर 2026 को पापुम पारे, बिश्वनाथ और लखीमपुर जिलों से जुड़े 33 विवादित गांवों में सीमांकन प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर सहमति जताई है। क्षेत्रीय समिति की दूसरी बैठक के बाद दोनों राज्यों ने एक ठोस कार्यसूची तैयार करने का निर्णय लिया, जिसका उद्देश्य दशकों से लंबित इस सीमा विवाद को वार्ता के ज़रिए सुलझाना है।

बैठक में कौन शामिल हुए

इस उच्चस्तरीय बैठक में अरुणाचल प्रदेश के शहरी मामलों के मंत्री बालो राजा और असम के राजस्व मंत्री केशव महंत ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया। जिला अधिकारियों ने 9 जनवरी 2023 की पिछली बैठक के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा की, जिसमें विवादित क्षेत्रों की पहचान के लिए किए गए संयुक्त क्षेत्र निरीक्षणों का भी मूल्यांकन किया गया।

गांवों का तीन श्रेणियों में वर्गीकरण

अधिकारियों ने बताया कि समाधान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए 33 विवादित गांवों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रेणी-प्रथम में 9 गांव हैं, जहाँ तत्काल सीमांकन स्तंभ लगाने पर सहमति बनी है। श्रेणी-द्वितीय में अपेक्षाकृत छोटे स्थानीय विवादों वाले 22 गांव शामिल हैं, जिनका निपटारा संबंधित जिला प्रशासन करेगा। श्रेणी-तृतीय में जटिल विवादों वाले 2 गांव हैं, जिनके लिए स्थानीय विधायकों, जिला अधिकारियों और निवासियों से परामर्श के बाद कार्ययोजना बनाई जाएगी।

मुख्य निर्णय और प्रतिबद्धताएँ

दोनों राज्यों ने दो महीने के भीतर औपचारिक सीमांकन शुरू करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग को नियुक्त करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, आपसी सहमति से तय समयसीमा के अनुसार विवादित क्षेत्रों में यथास्थिति बनाए रखने, नए अतिक्रमण और वृक्षारोपण रोकने, तथा किसी भी राज्य के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने पर भी सहमति बनी। क्षेत्रीय समिति की अगली बैठक दिसंबर 2026 के अंत में निर्धारित की गई है।

विवाद की पृष्ठभूमि

असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद 1951 से चला आ रहा है, जब गोपीनाथ बोरदोलोई समिति की सिफारिशों के बाद पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी से 3,600 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र असम को हस्तांतरित किया गया था। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश ने इस व्यवस्था को चुनौती दी। यह नवीनतम पहल 15 जुलाई 2022 को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित नामसाई घोषणा के बाद आई है।

गौरतलब है कि नामसाई घोषणा के तहत विवादित गांवों की संख्या 123 से घटाकर 86 कर दी गई थी और बातचीत के ज़रिए समाधान के लिए 12 क्षेत्रीय समितियों का गठन किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में कई अंतरराज्यीय सीमा विवाद एक साथ हल करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

आगे क्या होगा

श्रेणी-प्रथम के 9 गांवों में सीमांकन स्तंभ लगाने का कार्य सबसे पहले शुरू होगा। सर्वेक्षण विभाग की नियुक्ति के बाद औपचारिक प्रक्रिया अगले दो महीनों में आरंभ होने की उम्मीद है। दोनों राज्यों की यह साझा प्रतिबद्धता पूर्वोत्तर में शांति और विकास के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी: 2023 की पहली बैठक के बाद भी प्रगति धीमी रही, और सर्वेक्षण विभाग की नियुक्ति की दो महीने की समयसीमा पर नज़र रखनी होगी। यह ध्यान देने योग्य है कि 1951 से चले आ रहे इस विवाद में नामसाई घोषणा के बाद पहली बार इतनी विस्तृत कार्यसूची सामने आई है — लेकिन श्रेणी-तृतीय के दो जटिल गांव वह असली अग्निपरीक्षा होंगे जो बताएंगे कि यह सहमति कागज़ों से ज़मीन तक उतर पाती है या नहीं।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद क्या है और यह कब से चल रहा है?
यह विवाद 1951 से चला आ रहा है, जब गोपीनाथ बोरदोलोई समिति की सिफारिशों के बाद पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी से 3,600 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र असम को हस्तांतरित किया गया था। अरुणाचल प्रदेश ने इस व्यवस्था को चुनौती दी और तब से दोनों राज्यों के बीच दर्जनों गांवों को लेकर दावे-प्रतिदावे जारी हैं।
14 अक्टूबर 2026 की बैठक में 33 गांवों के बारे में क्या निर्णय हुए?
33 विवादित गांवों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया — श्रेणी-प्रथम के 9 गांवों में तत्काल सीमांकन स्तंभ लगाए जाएँगे, श्रेणी-द्वितीय के 22 गांवों के विवाद जिला प्रशासन सुलझाएगा, और श्रेणी-तृतीय के 2 जटिल गांवों के लिए स्थानीय परामर्श के बाद कार्ययोजना बनेगी।
नामसाई घोषणा क्या थी और इसका इस प्रक्रिया से क्या संबंध है?
नामसाई घोषणा 15 जुलाई 2022 को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता था, जिसके तहत विवादित गांवों की संख्या 123 से घटाकर 86 की गई और 12 क्षेत्रीय समितियाँ गठित की गईं। 14 अक्टूबर 2026 की बैठक उसी ढाँचे के तहत आयोजित दूसरी क्षेत्रीय समिति बैठक है।
सीमांकन की आगे की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी?
दोनों राज्यों ने भारतीय सर्वेक्षण विभाग को दो महीने के भीतर नियुक्त करने का निर्णय लिया है। अगली क्षेत्रीय समिति बैठक दिसंबर 2026 के अंत में निर्धारित है, जहाँ श्रेणी-तृतीय के गांवों सहित शेष मुद्दों पर विचार होगा।
इस बैठक में किन अधिकारियों ने भाग लिया?
बैठक में अरुणाचल प्रदेश के शहरी मामलों के मंत्री बालो राजा और असम के राजस्व मंत्री केशव महंत ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया। दोनों राज्यों के जिला अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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