असम-अरुणाचल सीमा विवाद: 33 गांवों में सीमांकन तेज़ करने पर दोनों राज्य सहमत, दिसंबर में अगली बैठक
सारांश
मुख्य बातें
असम और अरुणाचल प्रदेश ने 14 अक्टूबर 2026 को पापुम पारे, बिश्वनाथ और लखीमपुर जिलों से जुड़े 33 विवादित गांवों में सीमांकन प्रक्रिया में तेज़ी लाने पर सहमति जताई है। क्षेत्रीय समिति की दूसरी बैठक के बाद दोनों राज्यों ने एक ठोस कार्यसूची तैयार करने का निर्णय लिया, जिसका उद्देश्य दशकों से लंबित इस सीमा विवाद को वार्ता के ज़रिए सुलझाना है।
बैठक में कौन शामिल हुए
इस उच्चस्तरीय बैठक में अरुणाचल प्रदेश के शहरी मामलों के मंत्री बालो राजा और असम के राजस्व मंत्री केशव महंत ने अपने-अपने प्रतिनिधिमंडलों का नेतृत्व किया। जिला अधिकारियों ने 9 जनवरी 2023 की पिछली बैठक के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा की, जिसमें विवादित क्षेत्रों की पहचान के लिए किए गए संयुक्त क्षेत्र निरीक्षणों का भी मूल्यांकन किया गया।
गांवों का तीन श्रेणियों में वर्गीकरण
अधिकारियों ने बताया कि समाधान प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए 33 विवादित गांवों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। श्रेणी-प्रथम में 9 गांव हैं, जहाँ तत्काल सीमांकन स्तंभ लगाने पर सहमति बनी है। श्रेणी-द्वितीय में अपेक्षाकृत छोटे स्थानीय विवादों वाले 22 गांव शामिल हैं, जिनका निपटारा संबंधित जिला प्रशासन करेगा। श्रेणी-तृतीय में जटिल विवादों वाले 2 गांव हैं, जिनके लिए स्थानीय विधायकों, जिला अधिकारियों और निवासियों से परामर्श के बाद कार्ययोजना बनाई जाएगी।
मुख्य निर्णय और प्रतिबद्धताएँ
दोनों राज्यों ने दो महीने के भीतर औपचारिक सीमांकन शुरू करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग को नियुक्त करने का निर्णय लिया। इसके अलावा, आपसी सहमति से तय समयसीमा के अनुसार विवादित क्षेत्रों में यथास्थिति बनाए रखने, नए अतिक्रमण और वृक्षारोपण रोकने, तथा किसी भी राज्य के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने पर भी सहमति बनी। क्षेत्रीय समिति की अगली बैठक दिसंबर 2026 के अंत में निर्धारित की गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद 1951 से चला आ रहा है, जब गोपीनाथ बोरदोलोई समिति की सिफारिशों के बाद पूर्वोत्तर सीमांत एजेंसी से 3,600 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र असम को हस्तांतरित किया गया था। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश ने इस व्यवस्था को चुनौती दी। यह नवीनतम पहल 15 जुलाई 2022 को दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित नामसाई घोषणा के बाद आई है।
गौरतलब है कि नामसाई घोषणा के तहत विवादित गांवों की संख्या 123 से घटाकर 86 कर दी गई थी और बातचीत के ज़रिए समाधान के लिए 12 क्षेत्रीय समितियों का गठन किया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में कई अंतरराज्यीय सीमा विवाद एक साथ हल करने की दिशा में प्रयास जारी हैं।
आगे क्या होगा
श्रेणी-प्रथम के 9 गांवों में सीमांकन स्तंभ लगाने का कार्य सबसे पहले शुरू होगा। सर्वेक्षण विभाग की नियुक्ति के बाद औपचारिक प्रक्रिया अगले दो महीनों में आरंभ होने की उम्मीद है। दोनों राज्यों की यह साझा प्रतिबद्धता पूर्वोत्तर में शांति और विकास के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।