असम विधानसभा अध्यक्ष रणजीत कुमार दास का किसानों से आह्वान: बहुफसली खेती अपनाएं, आत्मनिर्भर भारत में दें योगदान
सारांश
मुख्य बातें
असम विधानसभा अध्यक्ष रणजीत कुमार दास ने बुधवार, 17 जून 2026 को गुवाहाटी में किसानों से बहुफसली खेती अपनाने और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने का आग्रह किया। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकारी सहायता योजनाओं का अधिकतम उपयोग कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
कृषि की भूमिका और सामूहिक जिम्मेदारी
पत्रकारों से बातचीत में दास ने कहा कि देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में कृषि क्षेत्र की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों, उद्यमियों, शिक्षकों और समाज के सभी वर्गों को अपने-अपने क्षेत्रों में उत्पादकता, गुणवत्ता और मानकों में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा, 'देश तभी सही मायने में आत्मनिर्भर बन सकता है जब हर क्षेत्र अपनी पूरी क्षमता से काम करे। कृषि उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता दोनों को बढ़ाकर किसान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।'
सरकारी सहायता तंत्र और किसान कल्याण
विधानसभा अध्यक्ष ने किसान कल्याण के लिए उठाए गए सरकारी कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि कृषि उपज पर बेहतर प्रतिफल सुनिश्चित करने और बिचौलियों पर निर्भरता घटाने के लिए ठोस उपाय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सहायता तंत्र को इस प्रकार मजबूत किया जा रहा है कि किसानों को बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक सामग्री के लिए साहूकारों के पास न जाना पड़े।
दास ने फसल बीमा योजनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि ये योजनाएं प्राकृतिक आपदाओं तथा प्रतिकूल मौसम से होने वाले नुकसान के विरुद्ध किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य किसानों को आर्थिक स्थिरता देना और उन्हें कृषि में अधिक निवेश के लिए प्रेरित करना है।
सरसों की खेती और खाद्य तेल आत्मनिर्भरता
अध्यक्ष ने विशेष रूप से सरसों की खेती बढ़ाने और खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में उतार-चढ़ाव यह रेखांकित करते हैं कि सरसों जैसी फसलों का घरेलू उत्पादन बढ़ाना कितना जरूरी है।
वर्तमान समय को सरसों की खेती के लिए अनुकूल बताते हुए दास ने किसानों से आग्रह किया कि वे जहाँ भी संभव हो, दोहरी और तिहरी फसल पद्धति अपनाएं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत खाद्य तेलों के आयात पर अरबों रुपये खर्च कर रहा है और घरेलू उत्पादन बढ़ाना नीतिगत प्राथमिकता बन चुकी है।
कृषि मशीनीकरण पर जोर
विधानसभा अध्यक्ष ने किसानों से ट्रैक्टर, पावर टिलर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि मशीनरी की खरीद पर उपलब्ध सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने की भी अपील की। उनका कहना था कि मशीनीकरण से न केवल उत्पादन लागत घटती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और समय पर कटाई भी सुनिश्चित होती है।
आगे की राह
गौरतलब है कि असम एक कृषि-प्रधान राज्य है और यहाँ के किसानों के लिए बहुफसली खेती की ओर बदलाव आय विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण अवसर है। विधानसभा अध्यक्ष के इस आह्वान से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में कृषि नीति को लेकर नई पहल हो सकती है और किसानों को योजनाओं से जोड़ने के प्रयास तेज होंगे।